शिमला/रामपुर। हिमाचल प्रदेश में मानसून की बारिश अब लोगों के लिए मुसीबत बनती जा रही है। प्रदेश के कई हिस्सों से भारी बारिश के कारण नुकसान की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। राजधानी शिमला के रामपुर क्षेत्र में भी बारिश ने अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। रामपुर की ग्राम पंचायत कूट में नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने से हालात बिगड़ गए हैं और कई स्थानों पर बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं। तेज बहाव की चपेट में पंचायत को जोड़ने वाली मुख्य पुलिया बह गई, जबकि खिऊंचा गांव में एक साथ करीब 7 से 8 बिजली के पोल भी पानी के तेज बहाव में बह गए। पुलिया टूटने और बिजली के पोल गिरने से ग्रामीणों की आवाजाही के साथ-साथ बिजली आपूर्ति भी बुरी तरह प्रभावित हुई है।
पानी का ऐसा सैलाब आया कि बह गई मुख्य पुलिया
कूट पंचायत क्षेत्र में लगातार हुई बारिश के बाद नदी-नालों में अचानक पानी बढ़ गया। तेज बहाव ने देखते ही देखते इलाके के संपर्क मार्गों और दूसरी बुनियादी सुविधाओं को अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया। इसी दौरान पंचायत क्षेत्र को जोड़ने वाली मुख्य पुलिया भी पानी के तेज बहाव को नहीं झेल पाई और बह गई। पुलिया के बह जाने से ग्रामीणों के सामने आवागमन की बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। फिलहाल लोग कंपनी की ओर से तैयार किए गए वैकल्पिक रास्ते और सरकारी मार्ग का इस्तेमाल कर किसी तरह आवाजाही कर रहे हैं। स्थानीय लोगों के लिए यह रास्ता राहत का अस्थायी जरिया जरूर बना है, लेकिन मुख्य संपर्क पुलिया के टूट जाने से सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है।
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एक साथ बह गए 8 बिजली के पोल, कई गांवों में अंधेरा
बारिश का असर बिजली व्यवस्था पर भी पड़ा है। खिऊंचा गांव में पानी के तेज बहाव के कारण बिजली लाइन के करीब 7 से 8 पोल बह गए, जिसके बाद किन्फी और खिऊंचा क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति ठप हो गई। एक साथ कई बिजली के पोल गिरने से इलाके में ब्लैकआउट जैसे हालात बन गए और ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गई। बिजली विभाग की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में व्यवस्था बहाल करने के प्रयास में जुटी हैं। कूट गांव में पिछले दिन बिजली आपूर्ति बहाल कर दी गई थी, लेकिन अन्य प्रभावित इलाकों में अभी भी बिजली व्यवस्था पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाई है।
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सड़कें टूटीं, परियोजना पाइपलाइन को भी नुकसान
भारी बारिश और तेज बहाव ने केवल पुलिया और बिजली लाइन को ही नुकसान नहीं पहुंचाया, बल्कि पंचायत क्षेत्र की कई सड़कों को भी जगह-जगह क्षतिग्रस्त कर दिया। कई स्थानों पर सड़कें टूटने से लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है। इसके अलावा परियोजना की पाइपलाइन को भी नुकसान पहुंचने की सूचना है। लगातार बारिश के बीच सड़क, बिजली और संपर्क व्यवस्था को हुए नुकसान ने ग्रामीणों के सामने कई तरह की परेशानियां खड़ी कर दी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि बारिश का दौर इसी तरह जारी रहा तो नुकसान और बढ़ सकता है।
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ग्राम पंचायत ने प्रशासन से मांगी तत्काल राहत
ग्राम पंचायत कूट की प्रधान सुषमा नेगी ने प्रशासन और संबंधित विभागों से प्रभावित क्षेत्र में जल्द राहत एवं बहाली का काम शुरू करने की मांग की है। उन्होंने एसडीएम रामपुर, बिजली विभाग और अन्य संबंधित अधिकारियों से टूटी पुलिया, क्षतिग्रस्त सड़कों तथा बिजली व्यवस्था को प्राथमिकता के आधार पर दुरुस्त करने का आग्रह किया है। पंचायत प्रधान का कहना है कि आपदा जैसी स्थिति में ग्रामीणों को तत्काल राहत और सुरक्षित आवागमन उपलब्ध करवाना जरूरी है, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को टाला जा सके।
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5 सितंबर तक बारिश का अलर्ट
मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक हिमाचल प्रदेश में बारिश का दौर अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। राज्य के कुछ हिस्सों में 5 सितंबर तक बारिश जारी रहने की संभावना है। मौसम विभाग ने आज और कल बिलासपुर, कांगड़ा और सिरमौर में भारी बारिश को लेकर यलो अलर्ट जारी किया है। वहीं 5 सितंबर को बिलासपुर, कांगड़ा और सोलन में भी भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। ऐसे में नदी-नालों के आसपास और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए खतरा अभी बना हुआ है।
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6 सितंबर के बाद कमजोर पड़ेगा मौसम
मौसम विभाग के अनुसार वेस्टर्न डिस्टरबेंस के 6 सितंबर से कमजोर पड़ने की संभावना है। इसके बाद 9 सितंबर तक प्रदेश के किसी भी जिले के लिए भारी बारिश का कोई अलर्ट जारी नहीं किया गया है। हालांकि पहाड़ी इलाकों में स्थानीय स्तर पर मौसम अचानक बदल सकता है, इसलिए प्रशासन की ओर से संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।
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मानसून में 1202 करोड़ की संपत्ति तबाह
इस मानसून सीजन में बारिश और प्राकृतिक आपदाओं ने हिमाचल को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाया है। 1 जून से 2 सितंबर तक प्रदेश में सरकारी और निजी संपत्ति को करीब 1202 करोड़ रुपये का नुकसान आंका गया है। इसमें सबसे बड़ा नुकसान लोक निर्माण विभाग को हुआ है। पीडब्ल्यूडी की संपत्तियों और बुनियादी ढांचे को करीब 914 करोड़ रुपये का नुकसान बताया गया है। इस दौरान 110 मकान पूरी तरह जमींदोज हो चुके हैं, जबकि 480 घरों को आंशिक नुकसान पहुंचा है।
बारिश और लैंडस्लाइड ने ली 19 जानें
मानसून सीजन के दौरान बारिश से जुड़ी प्राकृतिक आपदाओं ने कई परिवारों को गहरे जख्म दिए हैं। आंकड़ों के अनुसार लैंडस्लाइड में 18 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि फ्लैश फ्लड की चपेट में आने से एक व्यक्ति की जान गई है। ऐसे में रामपुर जैसे इलाकों में लगातार बढ़ता जलस्तर और नदी-नालों का तेज बहाव प्रशासन के लिए भी चिंता का विषय बना हुआ है।
