शिमला: आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे छोटे पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश के लिए आबकारी एवं कराधान विभाग लगातार कमाई का बड़ा जरिया बना हुआ है। प्रदेश की कमजोर आर्थिक स्थिति के बीच शराब कारोबार सरकार के खजाने को भरने में अहम भूमिका निभा रहा है। हालात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले कुछ वर्षों में अकेले शराब से ही सरकार के खजाने में 8 हजार करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व पहुंचा है।

 

यानी एक तरफ प्रदेश सरकार आर्थिक संसाधनों की कमी और बढ़ते वित्तीय बोझ से जूझ रही है, तो दूसरी तरफ शराब की बिक्री से मिलने वाला राजस्व सरकारी खजाने के लिए बड़े सहारे के तौर पर सामने आया है। विधानसभा के मानसून सत्र में सरकार की ओर से पेश किए गए आंकड़ों ने आबकारी विभाग की इस कमाई की तस्वीर साफ कर दी है।

 

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शराब की कमाई ने पकड़ी रफ्तार

भाजपा विधायक त्रिलोक जम्वाल ने विधानसभा में अतारांकित सवाल के माध्यम से आबकारी एवं कराधान विभाग से मिलने वाले राजस्व, शराब कारोबार और लाइसेंस फीस से जुड़ी जानकारी मांगी थी। इस सवाल का लिखित जवाब मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की ओर से दिया गया।

 

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सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022-23 में शराब से 2,216.34 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था। इसके बाद वर्ष 2023-24 में यह बढ़कर 2,692.33 करोड़ रुपये हो गया। वहीं वर्ष 2024-25 में शराब से सरकार की कमाई 2,776.41 करोड़ रुपये रही। कमाई का सिलसिला यहीं नहीं रुका। वर्ष 2025-26 में शराब से मिलने वाला राजस्व बढ़कर 2,884.48 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। यानी पिछले वित्त वर्ष की तुलना में सरकार को शराब से 108 करोड़ रुपये से ज्यादा अतिरिक्त राजस्व मिला।

 

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चालू वित्त वर्ष 2026-27 में भी शराब कारोबार से सरकार की कमाई जारी है। 1 अप्रैल से 31 जुलाई 2026 तक ही 934.17 करोड़ रुपये का राजस्व आबकारी मद में दर्ज किया जा चुका है।

शराबियों ने संभाला खजाना? तीन साल में 8 हजार करोड़ पार

सरकार के आंकड़ों पर नजर डालें तो शराब कारोबार से मिलने वाला राजस्व लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। यही वजह है कि आर्थिक संकट से गुजर रहे हिमाचल में आबकारी विभाग सरकार के लिए कमाई का बेहद महत्वपूर्ण स्रोत बन गया है। तीन वित्त वर्षों में शराब से 8 हजार करोड़ रुपये से अधिक की कमाई का आंकड़ा इस बात को रेखांकित करता है कि प्रदेश के सरकारी खजाने में शराब कारोबार की हिस्सेदारी कितनी महत्वपूर्ण हो चुकी है।

 

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जीएसटी भी बना कमाई का बड़ा इंजन

सरकार के खजाने को केवल शराब से ही सहारा नहीं मिल रहा। जीएसटी कलेक्शन भी लगातार बढ़ रहा है। विधानसभा में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023-24 में जीएसटी से 5,339.89 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। वर्ष 2024-25 में जीएसटी कलेक्शन बढ़कर 5,816.61 करोड़ रुपये हो गया। वहीं वर्ष 2025-26 में सरकार को जीएसटी से 5,967.65 करोड़ रुपये की कमाई हुई। इस तरह लगातार तीसरे वर्ष जीएसटी कलेक्शन में बढ़ोतरी दर्ज की गई। वर्ष 2025-26 में पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले जीएसटी से सरकार की आय 151.04 करोड़ रुपये अधिक रही।

डीजल पर वैट बढ़ा तो सरकार की कमाई भी बढ़ी

हिमाचल सरकार की आय में वैट भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। डीजल समेत विभिन्न वस्तुओं पर वैट से सरकार के राजस्व में बढ़ोतरी हुई है। आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2025-26 में वैट के जरिए सरकार के खजाने में 1,920 करोड़ रुपये से अधिक पहुंचे। यह राशि पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 78.45 करोड़ रुपये अधिक रही। इससे पहले भी वैट कलेक्शन में 88.57 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। तीन साल की अवधि में वैट से सरकार को 5,500 करोड़ रुपये से ज्यादा का राजस्व प्राप्त हुआ।

 

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आर्थिक संकट के बीच टैक्स और आबकारी विभाग पर बढ़ी निर्भरता

हिमाचल प्रदेश लंबे समय से राजस्व और खर्च के बीच बढ़ते अंतर, कर्ज के बोझ और सीमित संसाधनों जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है। ऐसे में सरकार के लिए अपने मौजूदा राजस्व स्रोतों को मजबूत करना बेहद जरूरी है। आबकारी एवं कराधान विभाग इस मोर्चे पर सरकार के लिए सबसे अहम विभागों में शामिल हो गया है। शराब से मिलने वाला राजस्व, जीएसटी और वैट—तीनों मिलकर सरकारी खजाने को बड़ी रकम उपलब्ध करा रहे हैं।

 

खास तौर पर शराब कारोबार से हर साल बढ़ती कमाई ने इसे सरकार के राजस्व तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बना दिया है। यही कारण है कि 'शराबियों ने भरा सुक्खू सरकार का खजाना' जैसी राजनीतिक और व्यंग्यात्मक सुर्खियां इस आंकड़े के बाद चर्चा में आ सकती हैं।

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