शिमला। हिमाचल प्रदेश ऊर्जा निगम के दिवंगत मुख्य अभियंता विमल नेगी की मौत का मामला अब नया मोड़ ले रहा है। उनकी पत्नी किरण नेगी ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस जानबूझकर सबूतों को छिपा रही है और केस को दूसरी दिशा में मोड़ने की कोशिश कर रही है।
नहीं मिला फोन
किरण नेगी ने बताया कि उनके पति के शव की शिनाख्त के लिए न तो घटनास्थल पर परिवार को बुलाया गया और न ही मोबाइल फोन का अब तक कुछ पता चल पाया है। उन्होंने यह भी बताया कि विमल हमेशा अपनी जेब में आधार और एटीएम कार्ड रखते थे, लेकिन ये दोनों चीजें भी गायब हैं।
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पेन ड्राइव का नहीं किया जिक्र, FIR में भी लापरवाही
किरण ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने उस पेन ड्राइव का जिक्र तक नहीं किया जो उनके पति के पास होती थी। इतना ही नहीं, उन्होंने एफआईआर में देसराज और एमडी का नाम स्पष्ट रूप से लिखा था, लेकिन पुलिस ने इसे नज़रअंदाज़ करते हुए “अज्ञात” शब्दों का इस्तेमाल किया।
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10 मार्च को लापता, 18 को मिला शव
विमल नेगी 10 मार्च को शिमला से लापता हुए थे और 18 मार्च को उनका शव गोबिंदसागर झील (बिलासपुर) से बरामद हुआ था। इस घटना के बाद जब परिवार और स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन किया, तो सरकार ने 19 मार्च को मामले की जांच के आदेश दिए थे।
पुलिस की सफाई: फोरेंसिक जांच जारी
शिमला के एसपी संजीव गांधी ने कहा है कि पुलिस पूरी ईमानदारी से जांच कर रही है। अब तक जो भी सबूत मिले हैं, उन्हें फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। साथ ही, सभी संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है। कोर्ट में केस की स्टेटस रिपोर्ट भी दाखिल की गई है।
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परिवार को इंसाफ की उम्मीद, मगर जांच पर संदेह
किरण नेगी का कहना है कि पुलिस जिस तरह से जांच कर रही है, उससे संदेह और भी गहरा हो रहा है। उन्होंने मामले को हत्या की साजिश बताया और न्याय की मांग की है। अब देखना यह है कि आगे की जांच में क्या सच सामने आता है।
