नाहन। हिमाचल प्रदेश में नशे के बढ़ते कारोबार पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। जब शिलाई क्षेत्र में पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए लगभग एक किलोग्राम चरस के साथ एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया। यह गिरफ्तारी उस समय की गई जब पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर मीनस बाजार क्षेत्र में दबिश दी।
बैग में भरी थी चरस की बड़ी खेप
पुलिस सूत्रों के अनुसार शिलाई थाना क्षेत्र की टीम गश्त पर थी और रोहनाट से लौटते समय उन्हें सूचना मिली कि एक व्यक्ति नशे की खेप लेकर मीनस बाजार में एक ढाबे के पास मौजूद है। सूचना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत हरकत में आते हुए मौके पर पहुंचकर संदिग्ध व्यक्ति को हिरासत में लिया। तलाशी के दौरान उसके पिट्ठू बैग से कुल 955 ग्राम चरस बरामद की गई।
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पुलिस कर रही पूछताछ
गिरफ्तार व्यक्ति की पहचान जातिराम उर्फ जोतिया निवासी गांव जास्वी डाकघर कोटीबौंच तहसील शिलाई जिला सिरमौर के रूप में हुई है। आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है और उससे पूछताछ जारी है। इस कार्रवाई की पुष्टि डीएसपी पांवटा साहिब मानवेंद्र ठाकुर ने की। उन्होंने बताया कि आरोपी से यह जानने की कोशिश की जा रही है कि वह यह चरस कहां से लाता था और किन.किन लोगों को इसकी आपूर्ति करता था।
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प्रदेश में नशे की बढ़ती चुनौती
यह घटना प्रदेश में बढ़ते नशे के कारोबार की एक और कड़ी बनकर सामने आई है। पहले केवल बड़े शहरों तक सीमित यह समस्या अब ग्रामीण और सीमांत क्षेत्रों तक पहुंच चुकी हैए जो कि बेहद चिंताजनक है। खासतौर पर सीमावर्ती और दुर्गम इलाके अब नशे के सौदागरों के लिए आसान निशाना बनते जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बेरोजगारी सीमित शैक्षणिक अवसर और प्रशासनिक निगरानी की कमी ऐसे क्षेत्रों को नशे के कारोबार के लिए उपजाऊ ज़मीन बना देती है।
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क्या कहती है सरकार और समाज
प्रदेश सरकार ने नशे के खिलाफ सख्त कदम उठाने की बात तो कई बार कही है, लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे उलट है। हर महीने कहीं न कहीं से चरस, हेरोइन या अन्य नशीले पदार्थों की बरामदगी की खबरें सामने आती हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि केवल पुलिसिया कार्रवाई से इस समस्या का समाधान नहीं निकल सकता। इसके लिए शिक्षा, जन.जागरूकता, पुनर्वास और युवाओं को सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ने की ज़रूरत है।
