बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश में बीते कुछ वर्षों से चिट्टा तस्करी का प्रचलन लगातार बढ़ता जा रहा है। चिट्टा तस्करी राज्य के लिए एक गंभीर सामाजिक चुनौती बन चुकी है। चिंताजनक बात यह है कि चिट्टा अब केवल शहरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि गांवों और कस्बों तक भी इसकी पहुंच बन चुकी है।
22 साल के युवक से मिला चिट्टा
हिमाचल पुलिस लगातार नशे के खिलाफ अभियान चला रही है और आए दिन चिट्टा तस्करों की गिरफ्तारी भी हो रही है। ताजा मामला बिलासपुर जिले से रिपोर्ट हुआ है- जहां पुलिस टीम ने लाखों रुपये के चिट्टे के साथ एक 22 साल के युवक को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है।
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वर्षाशालिका में बैठा था युवक
जानकारी के अनुसार स्वारघाट थाना की पुलिस टीम नियमित गश्त पर थी। इसी दौरान पुलिस की नजर करमाला बस ठहराव पर वर्षाशालिका के नीचे बैठे एक युवक पर पड़ी। पुलिस वाहन को देखते ही युवक का अचानक घबरा जाना और उसका व्यवहार संदिग्ध लगने पर पुलिस टीम को शक हुआ।
60 ग्रााम चिट्टा (हेरोइन) बरामद
संदेह के आधार पर जब युवक की तलाशी ली गई तो उसके कब्जे से 60 ग्राम चिट्टा (हेरोइन) बरामद हुआ। इसके बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए युवक को हिरासत में ले लिया। आरोपी युवक कुलाड़ी–नालागढ़ का रहने वाला बताया जा रहा है- जिसकी उम्र 22 साल है।
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SP बिलासपुर संदीप धवल ने पुष्टि करते हुए बताया कि आरोपी के खिलाफ स्वाराघाट थाने में मामला दर्ज किया गया है। आरोपी को कोर्ट में पेश करने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। जल्द ही आरोपी को कोर्ट में पेश कर पुलिस रिमांड पर लिया जाएगा।
रिकॉर्ड खंगाल रही पुलिस
फिलहाल, पुलिस टीम आरोपी के रिकॉर्ड खंगालने में जुटी हुई है और उसकी फोन व बैंक डिटेल की जांच कर रही है- ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सके। उम्मीद है कि आरोपी से पूछताछ में नशा तस्करी से जुड़े किसी बड़े नेटवर्क का खुलासा होगा।
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समाज के लिए बेहद चिंताजनक
लोगों का कहना है कि मामला हिमाचल प्रदेश में लगातार बढ़ते चिट्टे के प्रचलन की ओर एक बार फिर गंभीर इशारा करता है। सीमावर्ती राज्यों से सटे होने के कारण प्रदेश के कई इलाके नशा तस्करों के लिए आसान रास्ता बनते जा रहे हैं। खासकर युवा वर्ग इस जहर की चपेट में तेजी से आ रहा है, जो समाज के लिए बेहद चिंताजनक है
युवाओं को बर्बाद कर रहा चिट्टा
चिट्टे की लत न केवल युवाओं का भविष्य बर्बाद कर रही है, बल्कि अपराध, चोरी और हिंसा जैसी घटनाओं को भी बढ़ावा दे रही है। हालांकि पुलिस द्वारा समय-समय पर की जा रही सख्त कार्रवाई से नशा तस्करों में हड़कंप जरूर मचा है, लेकिन नशे के नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के लिए समाज और अभिभावकों की भी सक्रिय भूमिका जरूरी है।
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खोखला बना देता है चिट्टा
विदित रहे कि, हिमाचल में चिट्टा युवाओं की जड़ों को कमजोर कर रही है। चिट्टा, जिसे हेरोइन के नाम से भी जाना जाता है, बेहद खतरनाक नशा है और इसकी लत बहुत कम समय में व्यक्ति को शारीरिक व मानसिक रूप से खोखला बना देती है।
अवैध धंधे में फंस रहे युवा
राज्य के कई जिले, खासकर सीमावर्ती और राष्ट्रीय राजमार्गों से जुड़े क्षेत्र, चिट्टा तस्करों के लिए आसान ठिकाने बनते जा रहे हैं। फोरलेन, हाईवे और बस अड्डों जैसे सार्वजनिक स्थानों का इस्तेमाल नशे की सप्लाई के लिए किया जा रहा है। तस्कर छोटे-छोटे नेटवर्क बनाकर युवाओं को मोहरे की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। बेरोजगारी, जल्दी पैसे कमाने का लालच और गलत संगत के कारण कई युवा इस अवैध धंधे में फंसते चले जा रहे हैं।
