कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले से उपभोक्ताओं के अधिकारों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मामला सामने आया है। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक्सपायर्ड खाद्य उत्पाद बेचने के मामले में एक दुकानदार के खिलाफ सख्त फैसला सुनाया है।
दुकानदार ने बेचे एक्सपायर्ड नूडल्स
अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और उनकी वैधता सुनिश्चित करना पूरी तरह विक्रेता की जिम्मेदारी है। आयोग ने दुकानदार को न केवल खरीदे गए उत्पाद की पूरी कीमत लौटाने का आदेश दिया, बल्कि उपभोक्ता को मानसिक पीड़ा के लिए 15 हजार रुपये का मुआवजा और 5 हजार रुपये मुकदमेबाजी खर्च भी देने के निर्देश दिए हैं।
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एक्सपायर्ड नूडल्स खाने के बाद बिगड़ी बच्ची की तबीयत
मामला कांगड़ा जिले के भवर्णा क्षेत्र का है। शिकायतकर्ता जुगल किशोर ने 26 फरवरी 2026 को एक स्थानीय दुकान से स्पाइसी कोरियन इंस्टेंट नूडल्स का पैकेट खरीदा था। घर पहुंचने के बाद उन्होंने नूडल्स तैयार किए और अपनी बेटी को खाने के लिए दिए।
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बच्ची को होने लगीं उल्टियां
कुछ ही समय बाद बच्ची की तबीयत अचानक खराब हो गई और उसे उल्टियां होने लगीं। परिवार घबरा गया और तुरंत उसे उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया।
अस्पताल से लौटने पर बड़ी लापरवाही सामने आई।
3 महीने पुराने थे नूडल्स
बेटी की तबीयत बिगड़ने के बाद जुगल किशोर ने नूडल्स के पैकेट की जांच की। जांच के दौरान उन्हें पता चला कि जिस उत्पाद को उन्होंने खरीदा था उसकी एक्सपायरी डेट नवंबर 2025 की थी। यानी वह उत्पाद लगभग तीन महीने पहले ही एक्सपायर हो चुका था।
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पिता ने शिकायत करवाई दर्ज
इसके बाद उन्होंने मामले को गंभीर मानते हुए जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया कि दुकानदार ने एक्सपायर्ड खाद्य पदार्थ बेचकर उनके परिवार के स्वास्थ्य को खतरे में डाला।
दुकानदार ने किया बचाव
सुनवाई के दौरान दुकानदार ने अपने बचाव में कई दलीलें दीं। उसने यह साबित करने की कोशिश की कि मामले में उसकी सीधी जिम्मेदारी नहीं बनती या उपभोक्ता को स्वयं उत्पाद की एक्सपायरी जांचनी चाहिए थी।
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आयोग ने नहीं सुनी दलीलें
हालांकि, आयोग ने इन दलीलों को स्वीहिमाचल में दुकानदार ने बेचे एक्सपायर्ड नूडल्स : लड़की की बिगड़ी हालत, पिता ने किया कोर्ट केसकार नहीं किया और स्पष्ट कहा कि खाद्य उत्पाद बेचने वाले प्रत्येक विक्रेता की यह कानूनी जिम्मेदारी है कि वह ग्राहकों को केवल वैध और सुरक्षित उत्पाद ही उपलब्ध कराए।
आयोग ने समझाया कानून का सिद्धांत
आयोग के अध्यक्ष हिमांशु मिश्रा तथा सदस्य आरती सूद और नारायण ठाकुर की पीठ ने अपने फैसले में भारतीय उपभोक्ता कानून के एक महत्वपूर्ण सिद्धांत को भी स्पष्ट किया। आयोग ने कहा कि पुराने समय का सिद्धांत Caveat Emptor (खरीदार सावधान रहे) आधुनिक भारतीय उपभोक्ता कानून में विशेष रूप से खाद्य पदार्थों और जनस्वास्थ्य से जुड़े मामलों में लागू नहीं माना जाता। इसके स्थान पर Caveat Venditor (विक्रेता सावधान रहे) का सिद्धांत लागू होता है। इसका अर्थ है कि ग्राहक को सुरक्षित और वैध उत्पाद उपलब्ध कराना विक्रेता की जिम्मेदारी है।
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हर ग्राहक से एक्सपायरी डेट जांचने की उम्मीद नहीं
आयोग ने अपने आदेश में यह भी कहा कि रोजमर्रा की खरीदारी के दौरान प्रत्येक ग्राहक से हर वस्तु की एक्सपायरी डेट जांचने की अपेक्षा नहीं की जा सकती। यदि कोई दुकानदार दुकान में यह सूचना लगा दे कि ग्राहक स्वयं एक्सपायरी डेट जांच लें, तब भी इससे उसकी कानूनी जिम्मेदारी समाप्त नहीं होती। यह दुकानदार की जिम्मेदारी है कि वह-
- एक्सपायर्ड खाद्य सामग्री बिक्री के लिए न रखे।
- समय-समय पर अपने स्टॉक की जांच करे।
- एक्सपायर हो चुके उत्पादों को तुरंत हटाए।
- उपभोक्ता को सुरक्षित और गुणवत्ता युक्त उत्पाद उपलब्ध कराए।
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मेडिकल दस्तावेज नहीं होने की दलील भी खारिज
दुकानदार ने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता ने बच्ची के इलाज से जुड़े पर्याप्त मेडिकल दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए हैं। इस पर आयोग ने टिप्पणी करते हुए कहा कि इतनी छोटी राशि के लिए कोई भी पिता अपनी बच्ची की बीमारी का झूठा दावा करने की संभावना नहीं रखता। आयोग ने माना कि उपलब्ध परिस्थितियां उपभोक्ता की शिकायत को विश्वसनीय बनाती हैं।
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत माना उल्लंघन
आयोग ने इस मामले को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत उपभोक्ता के सुरक्षा अधिकार का स्पष्ट उल्लंघन माना। आदेश में कहा गया कि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना केवल नैतिक जिम्मेदारी नहीं बल्कि कानूनी दायित्व भी है। अगर कोई विक्रेता इस जिम्मेदारी का पालन नहीं करता तो उसके खिलाफ उपभोक्ता कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
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30 दिनों में भुगतान का आदेश
आयोग ने दुकानदार को निर्देश दिए हैं कि वह 30 दिनों के अंदर-
- नूडल्स की पूरी खरीद राशि लौटाए।
- मानसिक पीड़ा के लिए 15,000 रुपये का मुआवजा दे।
- मुकदमेबाजी खर्च के रूप में 5,000 रुपये का भुगतान करे।
- आदेश का समय पर पालन नहीं किया जाता तो नियमानुसार आगे की कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
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उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण संदेश
यह फैसला केवल एक परिवार को न्याय दिलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि सभी उपभोक्ताओं के अधिकारों को मजबूत करने वाला निर्णय माना जा रहा है। यदि किसी को एक्सपायर्ड वस्तु बेची जाती है और उससे नुकसान होता है- तो वह संबंधित उपभोक्ता आयोग में बेझिझक शिकायत दर्ज कर सकता है।
