#अव्यवस्था
July 3, 2026
हिमाचल: हार्ट अटैक की आशंका पर आए मरीज से डॉक्टर बोला... "कल आना" कुल्लू मामले से भी नहीं लिया सबक
रात को अस्पताल पहुंचे मरीज को डॉक्टर ने बिना चेक किए अगले दिन आने को कहा
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देहरा (कांगड़ा)। हिमाचल प्रदेश में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एक के बाद एक सामने आ रहे मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अभी कुल्लू में प्रसव के बाद महिला की मौत को लेकर उठा विवाद पूरी तरह शांत भी नहीं हुआ था, जिसमें भारी जनआक्रोश के बाद संबंधित महिला डॉक्टर को निलंबित करना पड़ा था, कि अब कांगड़ा जिले के देहरा से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सरकारी अस्पतालों में आपातकालीन सेवाओं की व्यवस्था पर नई बहस छेड़ दी है।
देहरा सिविल अस्पताल में एक मरीज ने आरोप लगाया है कि वह रात के समय सीने में तेज दर्द और हार्ट अटैक जैसी आशंका के साथ अस्पताल पहुंचा था, लेकिन ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर ने उसकी जांच तक करना जरूरी नहीं समझा और अगले दिन ओपीडी में आने की सलाह देकर वापस भेज दिया। इस घटना ने एक बार फिर कुछ डॉक्टरों की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
जानकारी के अनुसार शिकायतकर्ता 27 जून की रात अचानक सीने, बाजू और पीठ में तेज दर्द के साथ घबराहट महसूस होने के बाद घबरा गया। दर्द लगातार बढ़ने पर परिजन उसे तत्काल देहरा सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे। मरीज को आशंका थी कि कहीं उसे हृदयाघात जैसी गंभीर समस्या तो नहीं हो रही, इसलिए वह तत्काल चिकित्सकीय सहायता की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचा था।
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लेकिन आरोप है कि अस्पताल में मौजूद डॉक्टर ने उसकी स्थिति का मूल्यांकन करने या प्राथमिक जांच करने के बजाय उसे सुबह ओपीडी खुलने के बाद आने को कह दिया। मरीज का कहना है कि उसकी न तो कोई जांच की गई और न ही स्वास्थ्य स्थिति को गंभीरता से लिया गया।
घटना के बाद मरीज और उसके परिजनों ने सवाल उठाया है कि यदि रात के समय गंभीर लक्षणों वाले मरीजों को भी तत्काल उपचार नहीं मिल सकता तो फिर अस्पतालों में इमरजेंसी सेवाओं का उद्देश्य क्या रह जाता है। उनका कहना है कि यदि स्थिति वास्तव में हृदयाघात की होती और कोई अनहोनी हो जाती, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेता। इस मामले ने ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता और डॉक्टरों की जिम्मेदारी को लेकर भी चर्चा तेज कर दी है।
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घटना से आहत मरीज ने मुख्यमंत्री सेवा संकल्प हेल्पलाइन 1100 पर शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में डॉक्टर की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई की मांग की गई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि ऐसे मामलों में जवाबदेही तय होना जरूरी है ताकि भविष्य में किसी अन्य मरीज के साथ इस तरह की स्थिति पैदा न हो।
मामले के सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन हरकत में आया है। सिविल अस्पताल देहरा के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी ने पुष्टि की है कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के माध्यम से शिकायत प्राप्त हुई है और पूरे मामले की रिपोर्ट तैयार कर उच्च अधिकारियों को भेज दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि तथ्यों की जांच की जा रही है और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
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स्वास्थ्य विभाग के लिए यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब कुल्लू में प्रसव के बाद महिला की मौत को लेकर पहले से ही विभाग आलोचनाओं का सामना कर रहा है। उस मामले में जनदबाव और जांच के बाद संबंधित महिला डॉक्टर को निलंबित किया गया था। अब देहरा की घटना ने एक बार फिर स्वास्थ्य व्यवस्था और कुछ चिकित्सकों की कार्यप्रणाली पर सवालों की नई परत जोड़ दी है।
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लगातार सामने आ रही घटनाओं के बाद आम लोगों के मन में यह सवाल उठने लगा है कि क्या सरकारी अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा और समय पर उपचार वास्तव में सर्वोच्च प्राथमिकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आपातकालीन सेवाओं में किसी भी तरह की लापरवाही गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है और ऐसे मामलों की गहन जांच के साथ जवाबदेही तय होना बेहद आवश्यक है।