#अव्यवस्था
July 10, 2026
हिमाचल के घरों में पहुंच रहा गंदा पानी- पाइप से निकले सांप और मेंढक, एक हफ्ते से परिवार...
गांव के लोगों की स्वास्थ्य को लेकर बढ़ी चिंता
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ऊना। हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले से सामने आई एक घटना ने सरकारी पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं। अंब उपमंडल के राजपुर जसवां पंचायत के बिल्ला दा थाप्लां गांव में एक ग्रामीण के घर की पानी की पाइपलाइन से मरा हुआ सांप और मरा हुआ मेंढक मिला है।
इस घटना के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। यह घटना केवल एक परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पूरे गांव के लोगों में भय, आक्रोश और असुरक्षा की भावना पैदा हो गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि जिस पानी को वे पीने और दैनिक उपयोग के लिए सुरक्षित मान रहे थे, वह कई दिनों से दूषित था। घटना के सामने आने के बाद अब लोग सरकारी जलापूर्ति की गुणवत्ता और विभागीय निगरानी पर सवाल उठा रहे हैं।
गांव निवासी सुरजीत सिंह के अनुसार पिछले करीब एक सप्ताह से उनके घर के नलों से आने वाले पानी में तेज और असहनीय बदबू आ रही थी। शुरुआत में उन्हें लगा कि शायद बरसात के कारण पानी की गुणवत्ता प्रभावित हुई होगी, लेकिन जब लगातार कई दिनों तक यही स्थिति बनी रही तो उन्हें किसी बड़ी समस्या की आशंका हुई।
आखिरकार उन्होंने अपने घर की मुख्य पाइपलाइन की स्वयं जांच करने का फैसला किया। पाइप खोलते ही उनके सामने जो दृश्य आया, उसने पूरे परिवार को हैरान कर दिया। पाइप के भीतर एक मरा हुआ सांप और एक मरा हुआ मेंढक फंसे हुए थे, जो काफी समय से सड़ रहे थे। इन्हीं के कारण पानी दूषित होकर घर तक पहुंच रहा था और उससे दुर्गंध आ रही थी।
सुरजीत सिंह का आरोप है कि उन्होंने बदबूदार पानी की शिकायत पहले ही जल शक्ति विभाग के कर्मचारियों को दी थी। उन्होंने कर्मचारियों से पाइपलाइन की जांच करने और समस्या का समाधान करने का आग्रह भी किया, लेकिन उनकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया गया।
ग्रामीण का कहना है कि विभाग के कुछ कर्मचारियों ने इसे निजी पाइपलाइन का मामला बताते हुए अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया और किसी प्रकार की जांच नहीं की। यदि उसी समय शिकायत पर कार्रवाई होती, तो शायद यह स्थिति सामने नहीं आती।
जब पाइपलाइन से मृत सांप और मेंढक निकलने की पुष्टि हुई, तब सुरजीत सिंह ने तुरंत जल शक्ति विभाग के कनिष्ठ अभियंता (जेई) **गणेश कुमार** को इसकी जानकारी दी। सूचना मिलने के बाद विभाग की टीम मौके पर पहुंची और पाइपलाइन की जांच की। विभाग ने भी मौके पर मृत सांप मिलने की पुष्टि की, जिसके बाद पूरे मामले ने गंभीर रूप ले लिया।
गांव के लोगों का कहना है कि यह कोई पहली बार नहीं हुआ है। सुरजीत सिंह ने बताया कि पिछले वर्ष भी उनके घर के नलों से मरे हुए चूहे और मेंढक निकल चुके हैं। उस समय भी विभाग को शिकायत दी गई थी, लेकिन केवल औपचारिक कार्रवाई कर मामला शांत कर दिया गया। स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
ग्रामीणों का आरोप है कि गांव को पानी उपलब्ध कराने वाले मुख्य ओवरहेड टैंक की नियमित सफाई नहीं होती। कई बार टैंक की सफाई की मांग उठाई गई, लेकिन विभाग ने इस ओर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया।
घटना के बाद गांव के लोगों में स्वास्थ्य संबंधी चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि कई दिनों तक सड़ा हुआ पानी लोगों के घरों तक पहुंचता रहा है तो इससे जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि समय रहते समस्या का पता नहीं चलता तो छोटे बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों के स्वास्थ्य पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ सकता था। इसलिए पूरे जलापूर्ति तंत्र की जांच बेहद जरूरी है।
घटना के बाद गांव के लोगों ने जल शक्ति विभाग और जिला प्रशासन से कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं। ग्रामीण चाहते हैं कि-
जल शक्ति विभाग अंब के कनिष्ठ अभियंता गणेश कुमार ने बताया कि विभाग को बुधवार को शिकायत मिली थी। शिकायत प्राप्त होते ही विभागीय टीम को मौके पर भेजा गया, जहां पाइपलाइन से मृत सांप मिलने की पुष्टि हुई।
उन्होंने बताया कि हाल ही में हुई भारी बारिश के दौरान कई स्थानों पर मुख्य पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हुई हो सकती है। प्रारंभिक संभावना यही है कि पाइपलाइन में किसी स्थान पर दरार या टूट-फूट होने के कारण सांप और मेंढक अंदर चले गए होंगे। अधिकारी ने कहा कि वह स्वयं मौके का निरीक्षण करेंगे और पूरे मामले की विस्तृत तथा निष्पक्ष जांच करवाई जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के दौरान कई बार जमीन धंसने, पाइपलाइन टूटने या जोड़ों के खुलने से बाहरी गंदगी, मिट्टी, कीड़े-मकोड़े या छोटे जीव पाइपलाइन में प्रवेश कर सकते हैं। यदि समय पर पाइपलाइन की मरम्मत और जलाशयों की सफाई न हो तो पेयजल दूषित होने का खतरा बढ़ जाता है। यही कारण है कि बारिश के मौसम में जलापूर्ति व्यवस्था की नियमित निगरानी, पाइपलाइन निरीक्षण और पानी की गुणवत्ता की जांच अत्यंत आवश्यक मानी जाती है।
घटना सामने आने के बाद ग्रामीणों की मांग है कि विभाग केवल जांच का आश्वासन देकर मामला ठंडा न करे, बल्किऐसी व्यवस्था विकसित करे जिससे भविष्य में किसी भी परिवार को इस प्रकार की स्थिति का सामना न करना पड़े।
ग्रामीणों का कहना है कि सुरक्षित पेयजल प्रत्येक नागरिक का अधिकार है और इसकी जिम्मेदारी संबंधित विभाग की है। यदि नियमित निरीक्षण, समय पर रखरखाव और शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए तो ऐसी घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।