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June 24, 2026

हिमाचल : ऑपरेशन के दौरान पत्नी ने तोड़ा दम- अब डेथ सर्टिफिकेट के लिए दर-दर भटक रहा पति

परेशान पति ने दी गलत कदम उठाने की चेतावनी

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Solan News  Arki Hospital IGMC Shimla Certificate Health Department

सोलन। किसी अपने को खोने का दर्द शायद ही कभी कम होता हो। मगर जब उस मौत के बाद भी परिवार को सिस्टम के सामने अपनी बात साबित करनी पड़े तो यह पीड़ा और बढ़ जाती है। हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के अर्की क्षेत्र में एक ऐसा ही मामला सामने आया है।

डेथ सर्टिफिकेट के लिए भटक रहा पति

यहां पत्नी की मौत के करीब डेढ़ महीने बाद भी परिवार को मृत्यु प्रमाणपत्र नहीं मिल पाया है। हालात ऐसे हैं कि परिजन कभी अर्की अस्पताल के चक्कर लगा रहे हैं तो कभी शिमला के आईजीएमसी के, लेकिन अब तक उन्हें कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला है।

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पति ने दी चेतावनी

परिवार का आरोप है कि दोनों अस्पताल एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं और इसी वजह से उन्हें मृत्यु प्रमाणपत्र जारी नहीं किया जा रहा। इस बीच मृतका के पति ने चेतावनी दी है- अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो वह मजबूर होकर बड़ा कदम उठा सकते हैं।

डेढ़ महीना पहले हुई पत्नी की मौत

मृतका सीमा देवी के पति हेमराज शर्मा का कहना है कि उनकी पत्नी को गुजरे करीब डेढ़ माह हो चुका है, लेकिन आज तक मृत्यु प्रमाणपत्र जारी नहीं किया गया। उन्होंने बताया कि कई बार अस्पतालों के चक्कर लगाने के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है।

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झेलनी पड़ रही कई परेशानियां

हेमराज का कहना है कि एक अस्पताल उन्हें दूसरे संस्थान के पास भेज देता है, जबकि दूसरा अस्पताल जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है। इससे परिवार मानसिक और आर्थिक दोनों तरह की परेशानी झेल रहा है।

यहीं फंसा है पूरा मामला

जानकारी के अनुसार सीमा देवी पथरी के इलाज और ऑपरेशन के लिए नागरिक चिकित्सालय अर्की पहुंची थीं। ऑपरेशन के बाद उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें शिमला स्थित IGMC रेफर किया गया। इसी दौरान उनकी मौत हो गई।

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कौन जारी करेगा प्रमाण पत्र?

अब विवाद इस बात को लेकर खड़ा हो गया है कि मृत्यु प्रमाणपत्र कौन जारी करेगा। अर्की अस्पताल का कहना है कि महिला को जीवित अवस्था में रेफर किया गया था। जबकि IGMC का पक्ष है कि अस्पताल पहुंचने से पहले ही महिला की मौत हो चुकी थी।

जांच टीम पहुंची, पर नहीं मिला जवाब

मृतका के पति ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से गठित जांच टीम मंगलवार को अर्की अस्पताल पहुंची थी। उन्हें भी जांच के सिलसिले में बुलाया गया था। वह अपने परिजनों के साथ कई घंटों तक अस्पताल में मौजूद रहे]। मगर उन्हें जांच की प्रगति या किसी निर्णय के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई। परिवार का कहना है कि उन्हें अब सिर्फ यह उम्मीद है कि जांच निष्पक्ष तरीके से पूरी हो और उन्हें जल्द न्याय मिले।

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राज्यपाल तक पहुंचा मामला

मामले को लेकर मृतका के परिजन पहले ही उच्च स्तर पर गुहार लगा चुके हैं। परिवार ने राज्यपाल से भी हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि मौत के कारणों की निष्पक्ष जांच के साथ-साथ मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया भी जल्द पूरी की जानी चाहिए ताकि परिवार को आगे की औपचारिकताओं में राहत मिल सके।

BMO ने क्या कहा?

खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. मुक्ता रस्तोगी का कहना है कि मृत्यु प्रमाणपत्र से जुड़े मामलों में पंचायत भी प्रमाण पत्र जारी कर सकती है। यदि किसी स्तर पर दिक्कत आ रही है तो संबंधित पक्ष चिकित्सा विभाग को लिखित शिकायत दे सकता है, जिसके बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

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