#अव्यवस्था

June 22, 2026

हिमाचल के सरकारी स्कूलों में आज नहीं पका खाना, भूख से बच्चे परेशान; जानें क्या है वजह

मिड डे मील वर्कर प्रदेशभर में सुक्खू सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं

शेयर करें:

himachal-mid-day-meal-workers-statewide-strike-secretariat-gherao-shimla

शिमला। हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कार्यरत लगभग 21 हजार मिड डे मील MDM वर्कर आज अपनी विभिन्न मांगों को लेकर राज्यव्यापी हड़ताल पर हैं। हिमाचल के अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में मिड डे मील वर्कर राजधानी शिमला में सचिवालय के बाहर पहुंच गए हैं।

21 हजार मिड डे मील वर्कर हड़ताल पर

आंदोलन के तहत पहले टॉलैंड से सचिवालय तक आक्रोश रैली निकाली जाएगी, जिसके बाद सरकार के समक्ष लंबित मांगों को जोरदार तरीके से उठाया जाएगा। मिड डे मील वर्करों का कहना है कि वर्षों से सरकार और संबंधित विभागों के समक्ष मांगें रखी जा रही हैं। मगर अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।

यह भी पढ़ें- महंगाई के बीच सुक्खू सरकार का तोहफा- हजारों बिजली कर्मचारियों की दिहाड़ी बढ़ी

हजारों स्कूलों में व्यवस्था प्रभावित

मिड डे मील वर्करों की सामूहिक हड़ताल का असर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में देखने को मिल सकता है। हिमाचल के करीब आठ हजार सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए तैयार होने वाले दोपहर के भोजन की व्यवस्था प्रभावित होने की संभावना है।

विद्यार्थियों को ना हो परेशानी

हालांकि, शिक्षा विभाग ने स्कूल प्रबंधन और शिक्षकों को वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं- ताकि विद्यार्थियों को भोजन उपलब्ध कराया जा सके। फिर भी कई स्कूलों में व्यवस्थाओं को लेकर चुनौती पैदा हो सकती है।

यह भी पढ़ें- हिमाचल : एडमिट कार्ड में मिला फर्जी सेंटर, छात्रा नहीं दे सकी NEET परीक्षा- एक साल बर्बाद

10 से 15 सालों से कर रहे काम

मिड डे मील वर्करों का कहना है कि उनमें से बड़ी संख्या ऐसे कर्मचारियों की है जो पिछले 10 से 15 वर्षों से लगातार सेवाएं दे रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें काफी कम मानदेय पर काम करना पड़ रहा है।

कम मानदेय मिलने का आरोप

वर्करों का कहना है कि मौजूदा समय में उन्हें कुल मिलाकर लगभग 4500 रुपये मासिक मानदेय मिलता है- जो लगातार बढ़ती महंगाई के दौर में परिवार का खर्च चलाने के लिए पर्याप्त नहीं है। उनका मानना है कि वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए मानदेय में उचित वृद्धि आवश्यक है।

यह भी पढ़ें- हिमाचल : नई बाइक बनी काल, घर से कुछ ही दूरी पर ट्रक से टकराई, 22 वर्षीय युवक की मौ.त

केंद्र सरकार पर भी लगाया उपेक्षा का आरोप

आंदोलनकारी वर्करों का आरोप है कि उनकी नियुक्ति केंद्र सरकार की मिड डे मील योजना के तहत की गई थी। मगर पिछले कई वर्षों से केंद्र स्तर पर मानदेय में कोई उल्लेखनीय बढ़ोतरी नहीं की गई।

आर्थिक स्थिति में नहीं हो रहा सुधार

केंद्र सरकार की ओर से मिलने वाली राशि बेहद सीमित है, जबकि शेष भुगतान राज्य सरकार द्वारा किया जाता है। वर्करों का आरोप है कि लंबे समय से सेवा देने के बावजूद उनकी आर्थिक स्थिति में कोई विशेष सुधार नहीं हो पाया है।

यह भी पढ़ें- हिमाचल सचिवालय की महिला कर्मचारी की ह*त्या- बेटे ने डंडे से पी.टा, पुलिस ने किया अरेस्ट

क्या है वर्करों की मांग?

मिड डे मील वर्करों ने अपनी प्रमुख मांगों में मासिक मानदेय को बढ़ाकर 7000 रुपये करने की मांग रखी है। उनका कहना है कि पड़ोसी राज्यों में बेहतर भुगतान व्यवस्था लागू है और हिमाचल में भी उसी प्रकार की व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।

 

वर्करों का तर्क है कि वे केवल भोजन तैयार करने का कार्य ही नहीं करते, बल्कि कई बार स्कूल प्रशासन के अन्य कार्यों में भी सहयोग देते हैं। ऐसे में उनके श्रम और योगदान के अनुरूप भुगतान किया जाना चाहिए।

यह भी पढ़ें- हिमाचल : शराब के नशे में कलयुगी बेटे ने मा.र डाली मां- डंडे से पी*टा, आरोपी गिरफ्तार

महिलाओं पर परिवार की जिम्मेदारी

सीटू नेताओं का कहना है कि मिड डे मील वर्करों में अधिकांश महिलाएं हैं और इनमें बड़ी संख्या आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आती है। कई महिलाएं विधवा, परित्यक्ता या एकल नारी हैं, जिन पर पूरे परिवार की जिम्मेदारी होती है।

फिर भी आर्थिक संघर्ष

ऐसी परिस्थितियों में कम मानदेय पर गुजारा करना उनके लिए बेहद कठिन हो गया है। संगठन का कहना है कि सरकार को इनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए संवेदनशील निर्णय लेना चाहिए।

यह भी पढ़ें- सावधान हिमाचल! अगले पांच दिन सताएगी भारी बारिश, आंधी-तूफान का भी अलर्ट

12 महीने के मानदेय को लेकर भी उठी मांग

मिड डे मील वर्करों की एक प्रमुख मांग पूरे वर्ष का मानदेय देने की भी है। उनका कहना है कि वर्तमान में उन्हें केवल 10 महीने का भुगतान मिलता है, जबकि स्कूलों की छुट्टियों के दौरान दो महीने का मानदेय नहीं दिया जाता।

 

संगठन का दावा है कि इस संबंध में न्यायालय के निर्देश भी मौजूद हैं, लेकिन इसके बावजूद भुगतान व्यवस्था में अपेक्षित बदलाव नहीं किए गए हैं। आंदोलनकारी इस मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाने जा रहे हैं।

यह भी पढ़ें- हिमाचल : बैंक से पेंशन लेकर लौट रहे थे सेना अधिकारी, सांड ने उठाकर पटका- हुई मौ*त

और तेज होगा आंदोलन

मिड डे मील वर्करों ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि अगर उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। संगठन का कहना है कि वर्षों से लंबित समस्याओं को अब और अधिक समय तक नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। राजधानी शिमला में होने वाला प्रदर्शन इसी दिशा में एक बड़ा शक्ति प्रदर्शन माना जा रहा है, जिससे सरकार पर दबाव बढ़ सकता है।

सरकार और वर्करों के बीच टकराव की स्थिति पर नजर

राज्यभर के हजारों मिड डे मील वर्करों के शिमला पहुंचने से आंदोलन को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इस विरोध प्रदर्शन पर क्या रुख अपनाती है और वर्करों की मांगों को लेकर कोई सकारात्मक घोषणा होती है या नहीं।

नोट : ऐसी ही तेज़, सटीक और ज़मीनी खबरों से जुड़े रहने के लिए इस लिंक पर क्लिक कर हमारे फेसबुक पेज को फॉलो करें

ट्रेंडिंग न्यूज़
LAUGH CLUB
संबंधित आलेख