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July 3, 2026

हिमाचल: नसबंदी के बाद भी 45 महिलाएं गर्भवती! NHM रिपोर्ट ने खोली विभागीय लापरवाही की पोल

एनएचएम की रिपोर्ट ने गंभीर खामियों को किया उजागर, रिकॉर्ड में भी मिली लापरवाही

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Himachal Pradesh NHM Report

शिमला: हिमाचल प्रदेश के स्वास्थ्य महकमे से एक ऐसा चौंकाने वाला खुलासा हुआ है, जिसने सरकारी दावों और 'सुरक्षित' परिवार नियोजन कार्यक्रमों की साख पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) की एक आंतरिक समीक्षा रिपोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग के भीतर चल रही गंभीर चिकित्सकीय और प्रशासनिक खामियों को उजागर कर दिया है।

 

रिपोर्ट के मुताबिक देवभूमि हिमाचल में पिछले दो सालों के भीतर नसबंदी कराने के बावजूद 45 महिलाएं दोबारा गर्भवती हो गईं। इस हैरान करने वाले आंकड़े के सामने आने के बाद अब स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है, और जनता के बीच सरकारी ऑपरेशनों की विश्वसनीयता को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

एक साल में 14% बढ़े फेल्योर के केस

एनएचएम की स्टेट फैमिली प्लानिंग इंडेमनिटी सब कमेटी की रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में नसबंदी फेल होने की रफ्तार थमने के बजाय और तेजी से बढ़ रही है। महज एक साल के भीतर नसबंदी फेल होने के मामलों में करीब 14 प्रतिशत का भारी उछाल दर्ज किया गया है। 

 

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सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार जहां वित्तीय वर्ष 2024-25 में नसबंदी फेल होने के 21 मामले सामने आए थे, वहीं ठीक अगले साल यानी 2025-26 में यह आंकड़ा बढ़कर 24 तक पहुंच गया। दो सालों के इन कुल 45 मामलों में सबसे ज्यादा लापरवाही मंडी और शिमला जैसे बड़े जिलों के सरकारी अस्पतालों से सामने आई है, जो राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं का मुख्य केंद्र माने जाते हैं।

सिस्टम की चूक पर लगेगा मुआवजे का मरहम

नसबंदी फेल होने के बाद अनचाहे गर्भ का दंश झेलने वाली इन पीड़ित महिलाओं के दावों पर जब राज्यस्तरीय समिति ने समीक्षा की, तो विभाग की बड़ी लापरवाहियों की पुष्टि हुई। इसके बाद फैमिली प्लानिंग इंडेमनिटी स्कीम के तहत कुल 45 मामलों में से 19 पात्र परिवारों को मुआवजा देने की अंतिम मंजूरी दे दी गई है।

 

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वहीं दो दावों को तकनीकी और विभागीय नियमों के अनुरूप न पाए जाने पर खारिज कर दिया गया है। इसके अलावा तीन ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जिनका रिकॉर्ड इतना अधूरा था कि राज्य समिति भी कोई फैसला नहीं ले सकी, जिसके बाद उन्हें अतिरिक्त जांच के लिए जिला इंडेमनिटी कमेटी के पास वापस भेज दिया गया है।

रिकॉर्ड में भारी लापरवाही ने बढ़ाई चिंता

रिपोर्ट का सबसे गंभीर पहलू अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों में रिकॉर्ड प्रबंधन की खामियां हैं। जांच के दौरान कई मामलों में मरीजों की चिकित्सकीय जांच का पूरा विवरण उपलब्ध नहीं मिला। कई फाइलों में बीमारी का स्पष्ट उल्लेख नहीं था, जबकि अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट, लैब जांच, ऑपरेशन से संबंधित दस्तावेज और फॉलोअप रिकॉर्ड भी अधूरे पाए गए। समिति ने इन कमियों को साधारण त्रुटि नहीं बल्कि गंभीर प्रशासनिक और चिकित्सकीय लापरवाही माना है।

 

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मंडी और शिमला में सबसे अधिक मामले

रिपोर्ट के अनुसार नसबंदी के बाद गर्भधारण के सबसे ज्यादा मामले मंडी और शिमला जिलों से सामने आए हैं। इन जिलों में दर्ज मामलों ने स्वास्थ्य अधिकारियों का ध्यान विशेष रूप से आकर्षित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों की संख्या बढ़ना केवल चिकित्सा प्रक्रिया का मुद्दा नहीं है, बल्कि निगरानी, दस्तावेजीकरण और फॉलोअप व्यवस्था की कमजोरी को भी दर्शाता है।

स्वास्थ्य विभाग को जारी हुए सख्त निर्देश

रिपोर्ट सामने आने के बाद एनएचएम ने सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों और सरकारी अस्पतालों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। अब परिवार नियोजन से जुड़े प्रत्येक मामले में मरीज की प्रारंभिक जांच, ऑपरेशन प्रक्रिया, लैब रिपोर्ट, अल्ट्रासाउंड, चिकित्सकीय राय और फॉलोअप से जुड़ा पूरा रिकॉर्ड व्यवस्थित रूप से सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा। अधिकारियों को चेतावनी दी गई है कि भविष्य में किसी भी दावे या जांच के दौरान अधूरे दस्तावेज स्वीकार नहीं किए जाएंगे।

 

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सिर्फ मुआवजा नहीं, जवाबदेही भी होगी तय

एनएचएम ने साफ संकेत दिए हैं कि केवल प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता देकर मामले बंद नहीं किए जाएंगे। जहां कहीं भी चिकित्सकीय लापरवाही, रिकॉर्ड में गड़बड़ी या प्रशासनिक स्तर पर गंभीर खामियां सामने आएंगी, वहां संबंधित चिकित्सकों और अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। विभागीय कार्रवाई की संभावना ने स्वास्थ्य महकमे में भी हलचल पैदा कर दी है।

रिपोर्ट ने खड़े किए बड़े सवाल

परिवार नियोजन कार्यक्रम को जनसंख्या नियंत्रण और मातृ स्वास्थ्य सुरक्षा की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में दो वर्षों में 45 महिलाओं का नसबंदी के बावजूद गर्भवती होना और जांच के दौरान रिकॉर्ड संबंधी गंभीर कमियों का सामने आना स्वास्थ्य व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। एनएचएम की रिपोर्ट ने यह संकेत दिया है कि केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी निगरानी, गुणवत्ता नियंत्रण और जवाबदेही सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है।

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