मंडी। पहाड़ों की गोद में पला-बढ़ा एक जज्बा जब आसमान से भी ऊंचा सपना देखता है, तो मंजिलें खुद रास्ता देने लगती हैं। हिमाचल की वादियों से उठी ऐसी ही एक कहानी ने इस बार सात समंदर पार बर्फीली चोटियों के बीच भारत का मान बढ़ाया है।

सात समंदर पार रचा इतिहास

मंडी जिले के होनहार बेटे भूपेंद्र सिंह ने सात समंदर पार बर्फ से लदे पहाड़ों के बीच तिरंगा लहराकर इतिहास रच दिया है। भूपेंद्र ने ऐसा कर ना सिर्फ अपना बल्कि पूरे हिमाचल और देश का नाम दुनियाभर में रोशन कर दिया है।

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दक्षिण अमेरिका की सबसे ऊंची चोटी

आपको बता दें कि दक्षिण अमेरिका की सबसे ऊंची चोटी Mount Aconcagua (ऊंचाई लगभग 6,961 मीटर) को पर्वतारोहियों के लिए कठिन परीक्षा माना जाता है। एंडीज पर्वतमाला में स्थित यह शिखर तेज बर्फीली हवाओं, हड्डियां जमा देने वाले तापमान और बेहद कम ऑक्सीजन के लिए जाना जाता है।

विदेश में छाया हिमाचल का लाल

कई बार तापमान शून्य से कई डिग्री नीचे चला जाता है और मौसम पल-पल करवट बदलता है। इन्हीं विषम परिस्थितियों के बीच 22 फरवरी 2026 को दोपहर 2 बजकर 10 मिनट पर सुंदरनगर उपमंडल के बेच्छना गांव निवासी और भारतीय सेना में नायब सूबेदार भूपेंद्र सिंह ने शिखर पर कदम रखा। जैसे ही उन्होंने वहां तिरंगा लहराया, वह क्षण केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं रहा वह हिमाचल और पूरे देश के गौरव का प्रतीक बन गया।

 

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कठिन तैयारी, सधे कदम

यह अभियान नेहरू इंस्टीच्यूट ऑफ माउंटेनरिंग और जवाहर इंस्टीच्यूट ऑफ माउंटेनरिंग के संयुक्त दल द्वारा संचालित किया गया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय पर्वतारोहण कौशल का प्रदर्शन इस मिशन का लक्ष्य था। उच्च हिमालयी प्रशिक्षण, ग्लेशियर अभ्यास, क्रेवास रेस्क्यू ड्रिल और लंबी अवधि की शारीरिक तैयारी के बाद टीम दक्षिण अमेरिका के लिए रवाना हुई।

सहनशक्ति की कड़ी परीक्षा

ऊंचाई के साथ शरीर का तालमेल बैठाने (अक्लिमेटाइजेशन) की प्रक्रिया सबसे चुनौतीपूर्ण रही। हर कैंप के बीच की दूरी, सीमित संसाधन और मौसम की अनिश्चितता ने दल की सहनशक्ति की कड़ी परीक्षा ली।

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हर पड़ाव किया पार

नायब सूबेदार भूपेंद्र सिंह ने अनुशासन और धैर्य का परिचय देते हुए हर पड़ाव को पार किया। साथियों के मनोबल को बनाए रखना और टीम भावना के साथ आगे बढ़ना उनकी विशेष भूमिका रही।

गांव में जश्न का माहौल

जैसे ही सफलता की सूचना बेच्छना गांव पहुंची, वहां ढोल-नगाड़ों के साथ जश्न का माहौल बन गया। परिजनों की आंखों में गर्व के आंसू थे। पूर्व सैनिकों और ग्रामीणों ने मिठाइयां बांटी और एक-दूसरे को बधाई दी।

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सुंदरनगर के विधायक राकेश जम्वाल ने इसे प्रदेश के लिए ऐतिहासिक क्षण बताते हुए कहा कि ऐसी उपलब्धियां युवाओं को बड़े सपने देखने की प्रेरणा देती हैं। मंडी जिला, जो वीर सैनिकों की परंपरा के लिए जाना जाता है, एक बार फिर राष्ट्रीय गौरव का केंद्र बना।

युवाओं के लिए संदेश

यह उपलब्धि केवल एक पर्वत फतह करने की कहानी नहीं है, बल्कि यह संदेश है कि सीमित संसाधन भी बड़े सपनों को रोक नहीं सकते। हिमाचल की कठिन भौगोलिक परिस्थितियां यहां के युवाओं को बचपन से ही मजबूत बनाती हैं। अगर सही दिशा और प्रशिक्षण मिले, तो वे विश्व स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं।