#यूटिलिटी
February 24, 2026
हिमाचल में बढ़े सर्वाइकल कैंसर के मामले : हर साल इतनी महिलाएं हो रहीं शिकार, देखें आंकड़े
स्कूलों में छात्राओं को टीका लगाने पर भी जोर दिया जाएगा।
शेयर करें:

शिमला। हिमाचल प्रदेश में मध्यम आयु वर्ग की महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर के बढ़ते मामले स्वास्थ्य तंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय बनते जा रहे हैं। खासकर 35 से 55 वर्ष आयु वर्ग की महिलाएं इस बीमारी की चपेट में अधिक आ रही हैं।
राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल IGMC में हर वर्ष लगभग 3000 से 3200 कैंसर मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। इनमें औसतन 200 महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर की पुष्टि हो रही है।
IGMC के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2020 से 2025 के बीच 1127 महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर की पुष्टि की गई। वर्षवार आंकड़े इस प्रकार हैं-
इन मामलों में अधिकांश महिलाएं 35 से 55 वर्ष आयु वर्ग की हैं। जिला चंबा और सिरमौर से सर्वाइकल कैंसर के मरीज अपेक्षाकृत अधिक संख्या में सामने आ रहे हैं। स्तन कैंसर के बाद यह महिलाओं में दूसरा सबसे आम कैंसर बन चुका है।
सर्वाइकल कैंसर गर्भाशय ग्रीवा (बच्चेदानी के निचले हिस्से) में विकसित होने वाला कैंसर है। इसका प्रमुख कारण ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HVP) संक्रमण माना जाता है। यह संक्रमण-
शुरुआती चरण में इस बीमारी के लक्षण बहुत स्पष्ट नहीं होते, जिससे कई बार रोग का पता देर से चलता है। अनियमित या असामान्य रक्तस्राव, विशेषकर यौन संबंध के बाद रक्तस्राव, दुर्गंधयुक्त स्राव, पेल्विक (पेड़ू) में दर्द और पेट के निचले हिस्से में परेशानी इसके प्रमुख संकेत हैं। उन्नत अवस्था में कमर दर्द, पैरों में सूजन और अत्यधिक थकावट भी देखी जा सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अगर-
IGMC के रेडियोथेरेपी विभाग के प्रमुख डॉ. मनीष गुप्ता का कहना है कि HPV टीकाकरण से सर्वाइकल कैंसर के खतरे को लगभग 85 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है। अगर किशोरावस्था में ही बेटियों को यह टीका लगा दिया जाए तो वायरस के संपर्क में आने से पहले ही प्रभावी सुरक्षा मिलती है।
HPV टीकाकरण से केवल सर्वाइकल कैंसर ही नहीं, बल्कि गर्भाशय, मलाशय, गुदा नलिका, गुदा मस्से और ओरोफैरिंजियल कैंसर के मामलों में भी कमी लाई जा सकती है। इसके साथ ही नियमित पैप स्मीयर जांच और समय-समय पर स्क्रीनिंग बेहद जरूरी है।
प्रदेश सरकार ने इस बढ़ती समस्या को देखते हुए विशेष कदम उठाने का निर्णय लिया है। मुख्य सचिव संजय गुप्ता ने स्वास्थ्य अधिकारियों की बैठक बुलाई है, जिसमें राज्यव्यापी टीकाकरण अभियान की रूपरेखा तय की जाएगी।
एक मार्च से आशा वर्करों के माध्यम से घर-घर सर्वे किया जाएगा, ताकि पात्र बालिकाओं की पहचान की जा सके। 29 मार्च से पूरे प्रदेश में विशेष टीकाकरण अभियान शुरू करने की योजना है। स्कूलों में छात्राओं को HPV टीका लगाने पर भी जोर दिया जाएगा।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर जांच, जागरूकता और टीकाकरण के माध्यम से इस बीमारी पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को नियमित जांच के लिए प्रेरित करना और सामाजिक संकोच को दूर करना बेहद जरूरी है।
अगर शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न किया जाए और समय रहते चिकित्सकीय सलाह ली जाए, तो सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से भी सफलतापूर्वक मुकाबला किया जा सकता है। हिमाचल में शुरू होने जा रहा विशेष टीकाकरण अभियान इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।