शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला की दो होनहार जुड़वां बहनों ने बोर्ड परीक्षा में शानदार प्रदर्शन कर प्रदेश का नाम रोशन किया है। अविशा स्याल और सिरिशा स्याल ने ICSE कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करते हुए क्रमशः 99.4 प्रतिशत और 99.2 प्रतिशत अंक हासिल कर टॉप किया है। उनकी इस उपलब्धि से न सिर्फ परिवार, बल्कि पूरे प्रदेश में खुशी और गर्व का माहौल है।

एक साथ पाई बड़ी सफलता

अविशा और सिरिशा स्याल शिमला के प्रतिष्ठित ऑकलैंड हाउस स्कूल फॉर गर्ल्स की छात्राएं हैं। दोनों बहनों ने एक साथ बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए यह साबित कर दिया कि अगर लक्ष्य साफ हो और मेहनत लगातार की जाए, तो सफलता जरूर मिलती है।

 

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सफलता का राज क्या है?

दोनों बहनों का कहना है कि उनकी इस सफलता के पीछे माता-पिता, शिक्षकों और स्कूल का बड़ा योगदान है। उन्होंने बताया कि उन्हें हमेशा सही दिशा और प्रोत्साहन मिला, जिससे वे अपने लक्ष्य पर फोकस बनाए रख सकीं। उन्होंने यह भी कहा कि जिज्ञासु बने रहना, हर चीज को समझने की कोशिश करना और पढ़ाई में निरंतरता बनाए रखना उनकी सबसे बड़ी ताकत रही।

बिना दबाव के की पढ़ाई

अविशा और सिरिशा ने बताया कि उन्होंने पढ़ाई के लिए कोई बहुत सख्त टाइम टेबल नहीं बनाया। उन्होंने बस इतना ध्यान रखा कि रोजाना अपना होमवर्क पूरा करें और जो पढ़ा है उसे नियमित रूप से दोहराते रहें। उनका मानना है कि लगातार अभ्यास और समझ के साथ पढ़ाई करना ही अच्छे नंबर लाने का सबसे सही तरीका है।

 

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पढ़ाई के साथ एक्टिव लाइफ

दोनों बहनें सिर्फ पढ़ाई में ही नहीं, बल्कि खेल और अन्य गतिविधियों में भी आगे हैं। वे स्कूल की बास्केटबॉल और टेबल टेनिस टीम की सदस्य हैं। इसके अलावा उन्हें गिटार बजाना भी पसंद है। इससे साफ होता है कि उन्होंने पढ़ाई के साथ-साथ अपने शौक और खेलों को भी बराबर समय दिया, जो उनकी ओवरऑल पर्सनैलिटी को बेहतर बनाने में मददगार रहा।

परिवार का मिला पूरा साथ

अविशा और सिरिशा डॉक्टर कार्तिक स्याल और डॉक्टर गीतिका स्याल की बेटियां हैं। दोनों ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने माता-पिता को दिया, जिन्होंने हर कदम पर उनका साथ दिया और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

 

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छात्रों को दी खास सलाह

दोनों बहनों ने बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों को सलाह दी कि वे कड़ी मेहनत करें और पढ़ाई को समझकर करें, न कि सिर्फ रटने पर ध्यान दें। उन्होंने कहा कि पढ़ाई के साथ-साथ खुद को तनावमुक्त रखना भी जरूरी है और समय-समय पर ब्रेक लेकर दिमाग को फ्रेश रखना चाहिए।

दोनों बहने बनना चाहती है इंजीनियर 

दोनों बहनों का सपना आगे चलकर इंजीनियर बनना है। वे आगे भी इसी तरह मेहनत कर अपने लक्ष्य को हासिल करना चाहती हैं। अविशा और सिरिशा की यह सफलता सिर्फ उनके लिए ही नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए एक प्रेरणा है। खासकर उन छात्रों के लिए, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। उनकी यह उपलब्धि यह संदेश देती है कि अगर मेहनत सच्ची हो और इरादे मजबूत हों, तो कोई भी लक्ष्य दूर नहीं होता।

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