#उपलब्धि
July 30, 2026
हिमाचल की बेटी ने बढ़ाया तिरंगे का मान- वेटलिफ्टिंग में जीता गोल्ड, पिता का सपना किया साकार
रक्षा देवी ने मां को दिया सफलता का श्रेय
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कांगड़ा। पहाड़ों के छोटे-छोटे गांव अक्सर बड़े सपनों को जन्म देते हैं। सीमित संसाधन, आर्थिक चुनौतियों और कठिन जीवन परिस्थितियांं यहां के युवाओं का हौसलों को रोक नहीं पातीं। इसका ताजा उदाहरण कांगड़ा जिले की बेटी रक्षा देवी हैं- जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्वर्ण पदक जीतकर न सिर्फ अपने परिवार, बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश और देश का नाम रोशन कर दिया।
कांगड़ा दिले के ज्वालामुखी विधानसभा क्षेत्र की खुंडियां तहसील के दूरस्थ गांव कुआली की रहने वाली रक्षा देवी ने नेपाल के पोखरा स्थित रंगशाला स्टेडियम में आयोजित संयुक्त भारतीय खेल फाउंडेशन की अंतराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करते हुए 86 किलोग्राम भारोत्तोलन (Weightlifting) स्पर्धा का स्वर्ण पदक अपने नाम किया है।
23 से 27 जुलाई तक आयोजित इस प्रतियोगिता में विभिन्न देशों के खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। मगर रक्षा देवी ने अपने दमदार प्रदर्शन से शीर्ष स्थान हासिल कर तिरंगा शान से लहराया।
रक्षा देवी का सफर किसी प्रेरणादायक कहानी से कम नहीं है। वह एक साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखती हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने सपनों से कभी समझौता नहीं किया।
पिछले चार वर्षों से वह चंडीगढ़ में नौकरी करते हुए नियमित रूप से भारोत्तोलन का अभ्यास कर रही हैं। नौकरी और खेल के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने कठिन परिस्थितियों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया।
रक्षा देवी ने जून महीने में धर्मशाला में आयोजित एसबीकेएफ राष्ट्रीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया था। उसी प्रदर्शन के दम पर उन्हें अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में देश का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला। नेपाल में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीत लिया और साबित कर दिया कि मेहनत और लगन का कोई विकल्प नहीं होता।
अपनी इस उपलब्धि के बाद रक्षा देवी ने सबसे पहले अपनी माता का आभार जताया। उन्होंने कहा कि हर कठिन दौर में उनकी मां ने उनका हौसला बढ़ाया और कभी हार नहीं मानने की सीख दी। रक्षा ने अपने दिवंगत पिता को भी अपनी सबसे बड़ी प्रेरणा बताया। उन्होंने कहा कि आज जो भी मुकाम हासिल हुआ है, उसमें उनके माता-पिता के संस्कार और विश्वास की सबसे बड़ी भूमिका है।
रक्षा देवी ने अपने प्रशिक्षकों, परिवार, शुभचिंतकों और उन सभी लोगों का धन्यवाद किया, जिन्होंने उनके खेल सफर में किसी न किसी रूप में सहयोग किया। उनका कहना है कि यह स्वर्ण पदक केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि उन सभी लोगों की मेहनत और विश्वास का परिणाम है, जिन्होंने हर कदम पर उनका साथ दिया।
रक्षा देवी की सफलता उन युवाओं, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों की बेटियों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के कारण अपने सपनों को छोटा मान लेती हैं। उन्होंने यह साबित कर दिया कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो, मेहनत ईमानदारी से की जाए और आत्मविश्वास ना रहे, तो दुनिया का कोई भी मंच दूर नहीं होता।