धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड की 10वीं कक्षा के परीक्षा परिणाम में इस बार कांगड़ा की बेटी अनमोल ने पूरे प्रदेश में पहला स्थान हासिल कर नया इतिहास रच दिया। आज के दौर में जहां ज्यादातर बच्चे मोबाइल और सोशल मीडिया में व्यस्त रहते हैं, वहीं अनमोल ने सफलता पाने के लिए मोबाइल से दूरी बनाकर सिर्फ पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित किया।
कांगड़ा जिले के पाहड़ा स्थित एवीएम सीनियर सेकेंडरी स्कूल पाहड़ा की छात्रा अनमोल ने 700 में से 699 अंक हासिल कर प्रदेशभर में पहला स्थान प्राप्त किया। उन्होंने 99.86 प्रतिशत अंक लेकर न सिर्फ अपने परिवार बल्कि पूरे हिमाचल का नाम रोशन किया है।
सुबह 5 बजे से शुरू होती थी पढ़ाई
अनमोल ने अपनी सफलता का राज बताते हुए कहा कि उन्होंने नियमित और अनुशासित पढ़ाई को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाया। वह रोज सुबह 5 बजे उठती थीं और 7 बजे तक लगातार पढ़ाई करती थीं। इसके अलावा दिन में भी पढ़ाई के लिए अलग समय तय रहता था। उनका कहना है कि रोजाना करीब पांच घंटे की पढ़ाई ने उन्हें यह मुकाम दिलाया। उन्होंने कभी भी पढ़ाई को बोझ नहीं समझा बल्कि हर विषय को समझने और सीखने की कोशिश की।
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मोबाइल से बना ली थी दूरी
अनमोल ने बताया कि आज के समय में मोबाइल बच्चों का सबसे बड़ा ध्यान भटकाने वाला माध्यम बन चुका है। इसलिए उन्होंने खुद को मोबाइल और सोशल मीडिया से लगभग पूरी तरह दूर रखा। उनके अनुसार अगर छात्र पढ़ाई के समय मोबाइल से दूरी बना लें और नियमित अभ्यास करें तो अच्छे अंक हासिल करना मुश्किल नहीं है।
घर का माहौल भी बना प्रेरणा
अनमोल के पिता रोहित कुमार शिक्षक हैं, जबकि उनकी मां प्रियंका पहले शिक्षिका रह चुकी हैं और वर्तमान में गृहिणी हैं। घर में शुरू से ही पढ़ाई और अनुशासन का माहौल रहा, जिसका असर अनमोल की पढ़ाई पर भी पड़ा। परिवार ने हमेशा उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया और पढ़ाई में पूरा सहयोग दिया।
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कठिन विषयों में शिक्षकों ने किया मार्गदर्शन
अनमोल ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता के साथ-साथ स्कूल के शिक्षकों को भी दिया। उन्होंने कहा कि जब भी किसी विषय में परेशानी आती थी, शिक्षक तुरंत मार्गदर्शन करते थे।
शिक्षकों की मदद से उन्होंने कमजोर विषयों पर भी अच्छी पकड़ बनाई और आत्मविश्वास बढ़ाया।
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भविष्य में बनना चाहती हैं टीचर
प्रदेश में टॉप करने के बाद अनमोल अब शिक्षा के क्षेत्र में ही आगे बढ़ना चाहती हैं। उनका सपना भविष्य में अध्यापक बनकर बच्चों को शिक्षा देना है। उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज को दिशा देने का सबसे बड़ा माध्यम होते हैं और वह भी भविष्य में इसी क्षेत्र में योगदान देना चाहती हैं। अनमोल की इस सफलता ने यह साबित कर दिया है कि मेहनत, अनुशासन और सही लक्ष्य के साथ किसी भी मुकाम तक पहुंचा जा सकता है। हिमाचल की इस बेटी की कहानी अब हजारों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बन गई है।
