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August 8, 2026

हिमाचल पुलिस इंस्पेक्टर का बेटा बना असिस्टेंट कमांडेंट, 3 सरकारी नौकरियां छोड़ हासिल किया ये मुकाम

रवि ने UPSC-CAPF परीक्षा में हासिल किया ऑल इंडिया रैंक 82

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sirmaur ravi kumar

नाहन। हिमाचल के सिरमौर जिला के बेटे रवि ने कड़ी मेहनत से उस मुकाम को हासिल किया है, जहां तक पहुंचने के लिए लोग सपना तो देखते हैं, लेकिन वहां तक हर कोई नहीं पहुंच पाता। बड़ी बात यह है कि इस मुकाम को हासिल करने के लिए रवि ने तीन-तीन सरकारी नौकरियों को छोड़ दिया और अपने लक्ष्य के प्रति एकाग्र रहे। सिरमौर के रहने वाले रवि कुमार ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC-CAPF) की प्रतिष्ठित परीक्षा में पूरे देश में 82वीं रैंक (AIR-82) हासिल कर असिस्टेंट कमांडेंट का पद अपने नाम किया है। उनकी इस अभूतपूर्व सफलता से पूरे क्षेत्र और हिमाचल प्रदेश में गर्व और खुशी की लहर है।

कांस्टेबल से शिक्षक और अब असिस्टेंट कमांडेंट

रवि कुमार का यह सफर आसान नहीं रहा, बल्कि यह उनके कभी न थकने वाले जज्बे की बानगी है। वर्ष 2019 में उनका पहली बार हिमाचल प्रदेश पुलिस में बतौर कांस्टेबल चयन हुआ था, लेकिन बड़े सपनों की तलाश में उन्होंने इसे ज्वाइन नहीं किया। वर्ष 2024 में एक बार फिर उनका चयन पुलिस कांस्टेबल के रूप में हुआ और उन्होंने ट्रेनिंग भी शुरू कर दी।

 

इसी दौरान उनका चयन TGT नॉन-मेडिकल शिक्षक के रूप में हो गया। शिक्षक पद पर नियुक्ति मिलने के महज 15 से 20 दिनों के भीतर ही उन्होंने UPSC-CAPF परीक्षा पास कर ली। बेहतर लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए लगातार पदों को छोड़ना उनकी अदम्य इच्छाशक्ति को दर्शाता है।

 

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पुलिस अफसर पिता व अध्यापिका मां का मार्गदर्शन

रवि के व्यक्तित्व और सफलता के पीछे उनके पारिवारिक संस्कारों का बड़ा योगदान है। उनके पिता नरेंद्र सिंह हिमाचल प्रदेश पुलिस में इंस्पेक्टर पद से सेवानिवृत्त हुए हैं, जबकि माता भावना राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय मिश्रवाला में अध्यापिका हैं। अनुशासित माहौल में पले-बढ़े रवि ने अपनी प्राथमिक शिक्षा गुरुनानक स्कूल से नॉन-मेडिकल स्ट्रीम में पूरी की। इसके बाद उन्होंने नाहन कॉलेज से बी.एससी. और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से बी.एड. की डिग्री हासिल की।

 

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परिवार और गुरूजनों के मार्गदर्शन से पाया मुकाम

असिस्टेंट कमांडेंट जैसे प्रतिष्ठित पद पर चयन होने के बावजूद रवि कुमार का सपना यहीं खत्म नहीं होता। रवि ने बताया कि उनकी इस सफलता में परिवार का अटूट सहयोग, गुरुजनों का मार्गदर्शन और निरंतर प्रयास ही सबसे मुख्य स्तंभ रहे हैं। उनका अंतिम सपना भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS/UPSC Civil Services) में जाने का है, जिसके लिए वह अपनी तैयारी लगातार जारी रखेंगे।

 

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युवाओं के लिए सीख: असफलता से निराश न हों

रवि कुमार की यह प्रेरणादायक कहानी देश और प्रदेश के उन हजारों युवाओं के लिए एक मिसाल है, जो पहली सफलता मिलने के बाद या तो संतुष्ट हो जाते हैं या फिर किसी बाधा से हार मान लेते हैं। युवाओं को संदेश देते हुए रवि ने कहा कि एक मुकाम पर रुकने के बजाय हमेशा अपनी क्षमता को पहचानकर आगे बढ़ने का प्रयास करना चाहिए। सही दिशा में किया गया निरंतर परिश्रम एक न एक दिन मंजिल तक जरूर पहुंचाता है।

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