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August 8, 2026

हिमाचल पुलिस का जवान भारतीय सेना में बना लेफ्टिनेंट, आयुष शर्मा ने मेहनत के दम पर रचा इतिहास

आयुष ने कड़ी मेहनत से पूरा किया पुलिस की नौकरी से सेना के अधिकारी बनने तक सपना

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Ayush Sharma Lieutenant

नाहन। हिमाचल प्रदेश के युवा अपनी मेहनत, लगन और जुनून के दम पर लगातार नए मुकाम हासिल कर रहे हैं। खास बात यह है कि कई युवा एक बार सफलता हासिल करने के बाद भी रुकने का नाम नहीं लेते और अपने लक्ष्य को और ऊंचा कर देते हैं। सिरमौर जिले के सतौन निवासी आयुष शर्मा ने भी कुछ ऐसा ही कर दिखाया है। हिमाचल प्रदेश पुलिस में सेवाएं दे रहे आयुष ने अब संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की संयुक्त रक्षा सेवा (CDS) परीक्षा उत्तीर्ण कर भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट का पद हासिल किया है।

 

आयुष की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने पहले पुलिस सेवा में कदम रखा और अब सेना में अधिकारी बनकर देशसेवा की नई जिम्मेदारी संभालने जा रहे हैं। उनकी सफलता से सतौन ही नहीं, बल्कि पूरे सिरमौर जिले में गर्व और खुशी का माहौल है।

एक वर्दी से दूसरी वर्दी तक, देशसेवा का जज्बा रहा कायम

आयुष शर्मा के सफर की सबसे प्रेरक बात यह है कि उन्होंने पुलिस सेवा में रहते हुए भी अपने बड़े लक्ष्य को नहीं छोड़ा। एक सरकारी सेवा हासिल करने के बाद अधिकांश युवा उसी मुकाम पर संतुष्ट हो जाते हैं, लेकिन आयुष ने अपनी मंजिल को और ऊंचा किया। पुलिस की वर्दी पहनकर सेवा करने के बाद अब वह सेना की वर्दी में देश की रक्षा की जिम्मेदारी संभालेंगे। उनका यह सफर युवाओं के लिए संदेश है कि सफलता मंजिल नहीं, बल्कि अगली मंजिल की शुरुआत भी हो सकती है।

 

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CDS परीक्षा पास कर हासिल किया लेफ्टिनेंट का मुकाम

आयुष ने UPSC द्वारा आयोजित संयुक्त रक्षा सेवा परीक्षा को सफलतापूर्वक उत्तीर्ण किया। इसके बाद उनका चयन भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में हुआ है। उनकी इस उपलब्धि ने सतौन क्षेत्र के युवाओं के बीच भी नई उम्मीद जगाई है। आयुष अब क्षेत्र से भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनने वाले तीसरे युवा बताए जा रहे हैं।

पिता भी रह चुके हैं फौजी

आयुष शर्मा की सफलता के पीछे परिवार के संस्कारों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उनके पिता गोपाल शर्मा पूर्व सैनिक हैं और भारतीय सेना में रहते हुए देश की सेवा कर चुके हैं।

बचपन से ही सैन्य अनुशासन और राष्ट्रसेवा के माहौल में पले-बढ़े आयुष ने पिता से जिम्मेदारी, अनुशासन और देश के प्रति समर्पण की सीख ली। यही संस्कार आगे चलकर उनके व्यक्तित्व की ताकत बने। अब जब पिता के बाद बेटा भी भारतीय सेना में अधिकारी बनने जा रहा है, तो यह पूरे परिवार के लिए गर्व का बेहद खास पल है।

 

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पढ़ाई के साथ खेलकूद में भी आगे रहे आयुष

आयुष शर्मा की शुरुआती शिक्षा हिम पब्लिक स्कूल सतौन से हुई। इसके बाद उन्होंने राजकीय महाविद्यालय पांवटा साहिब से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। कॉलेज के दिनों में भी आयुष केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं रहे। वह खेलकूद और अन्य गतिविधियों में सक्रिय रहते थे। अनुशासन, सकारात्मक सोच और लगातार मेहनत उनके व्यक्तित्व की खास पहचान रही। इन्हीं खूबियों ने उन्हें एक बेहतर विद्यार्थी के साथ-साथ मजबूत इच्छाशक्ति वाला युवा बनाने में अहम भूमिका निभाई।

 

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सफलता के बाद भी नहीं रुके कदम

आयुष की कहानी की सबसे खास बात यही है कि उन्होंने एक उपलब्धि हासिल करने के बाद अपनी महत्वाकांक्षा को विराम नहीं दिया। हिमाचल जैसे पहाड़ी प्रदेश के युवाओं के लिए उनका सफर इस बात की मिसाल है कि अगर मन में आगे बढ़ने की इच्छा और लक्ष्य हासिल करने का जुनून हो तो परिस्थितियां रास्ता नहीं रोक सकतीं। पुलिस सेवा में रहते हुए CDS की तैयारी करना और फिर परीक्षा में सफलता हासिल कर सेना में अधिकारी बनना आसान नहीं था। लेकिन आयुष ने लगातार मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर यह मुकाम हासिल किया।

 

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युवाओं के लिए प्रेरणा बने आयुष

आयुष की उपलब्धि के बाद सतौन क्षेत्र में खुशी का माहौल है। परिवार, रिश्तेदारों, परिचितों और क्षेत्रवासियों की ओर से उन्हें बधाइयां दी जा रही हैं। आयुष ने अपनी उपलब्धि से न केवल माता-पिता का सिर गर्व से ऊंचा किया है, बल्कि सतौन, सिरमौर और पूरे हिमाचल प्रदेश का नाम भी रोशन किया है। उनकी कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो किसी एक सफलता को अपनी अंतिम मंजिल मान लेते हैं। आयुष ने साबित किया है कि अगर हौसला बड़ा हो तो एक मुकाम हासिल करने के बाद अगली और बड़ी मंजिल की ओर बढ़ा जा सकता है।

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