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August 3, 2026
हिमाचल के बेटे का अमेरिका में डंका, स्टैनफोर्ड में कर रहे PHD; अब बिल गेट्स संग परिषद में करेंगे काम
स्टैनफोर्ड से मिलीं दो बड़ी उपलब्धियां
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सिरमौर। देहिमाचल के सिरमौर जिले के ऋषुध ठाकुर ने अमेरिका में देवभूमि का नाम रोशन किया है। वह स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में PhD कर रहे हैं और अब बिल गेट्स समेत दिग्गजों वाली परिषद में छात्र प्रतिनिधि के तौर पर काम करेंगे।
ऋषुध ठाकुर को हाल ही में स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से दो बड़ी उपलब्धियां मिली हैं। उन्हें बेहतर शिक्षण के लिए Centennial Teaching Award से सम्मानित किया गया है। इसके अलावा उन्हें Doerr School of Sustainability Advisory Council में छात्र प्रतिनिधि बनाया गया है। 200 से ज्यादा पीएचडी शोधार्थियों में से सिर्फ दो छात्रों को इस जिम्मेदारी के लिए चुना गया है।
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22 सदस्यों वाली इस प्रतिष्ठित परिषद में दुनिया के कई बड़े नाम शामिल हैं। इनमें अमेरिकी समाजसेवी और अरबपति बिल गेट्स, टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन, उद्योगपति जमशेद गोदरेज और नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक समेत कई विशेषज्ञ शामिल हैं। ऋषुध दो साल तक परिषद में छात्रों की आवाज बनेंगे और उनके विचार व सुझाव यूनिवर्सिटी के बड़े अधिकारियों तक पहुंचाएंगे।
ऋषुध ठाकुर का बचपन सिरमौर के खोदरी माजरी गांव में बीता है। यह गांव हिमाचल-उत्तराखंड सीमा पर टोंस और यमुना नदियों के संगम के पास बसा है। बचपन से ही वह पहाड़ों, नदियों और जंगलों के बीच रहे।
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उनके पूर्वज करीब तीन पीढ़ी पहले उत्तराखंड के जौनसार-बावर इलाके से यहां आकर बसे थे। प्रकृति के इसी माहौल ने आगे चलकर ऋषुध के शोध की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाई।
ऋषुध ने वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी यानी VIT से बीटेक की पढ़ाई की। साल 2018 में केरल और कर्नाटक में आई भीषण बाढ़ ने उन्हें काफी सोचने पर मजबूर किया।
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उनके मन में सवाल आया कि क्या सैटेलाइट तस्वीरों की मदद से पहले ही यह पता लगाया जा सकता है कि कौन से इलाके बाढ़ की चपेट में आ सकते हैं। यही सवाल आगे चलकर उनके शोध का आधार बना और उन्होंने रिमोट सेंसिंग व हाइड्रोलॉजी के क्षेत्र में काम शुरू किया।
ऋषुध ने सैटेलाइट इमेजरी और हाइड्रोलॉजी तकनीक की मदद से कर्नाटक के कूर्ग इलाके में बाढ़ की आशंका वाले क्षेत्रों का नक्शा तैयार किया। इसके बाद आईआईटी रुड़की में रिसर्च इंटर्नशिप के दौरान उन्होंने जंगलों पर भी काम किया। उन्होंने देवदार, बांज और चीड़ जैसी पेड़ों की प्रजातियों और जंगलों में मौजूद कार्बन का सैटेलाइट डेटा से आकलन करने पर शोध किया।
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साल 2021 से 2023 के बीच ऋषुध ने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग में मास्टर्स की डिग्री हासिल की। इसी दौरान उन्हें दुनिया की मशहूर अंतरिक्ष एजेंसी NASA में तीन महीने तक रिसर्च करने का मौका मिला। NASA में उन्होंने सैटेलाइट डेटा की मदद से यह पता लगाने पर काम किया कि अलग-अलग कृषि फसलों को सिंचाई के लिए कितने पानी की जरूरत होती है।
फिलहाल ऋषुध स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में PHD कर रहे हैं। उनके मौजूदा शोध का मुख्य फोकस सैटेलाइट डेटा के जरिए जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को समझना है। इसके साथ ही वह जंगलों, जल-स्रोतों और जैव-विविधता को बचाने के लिए नए वैज्ञानिक समाधान खोजने पर भी काम कर रहे हैं।
ऋषुध का मानना है कि भारत जैसे बड़े देश में सैटेलाइट डेटा की मदद से कम खर्च में बहुत बड़े इलाकों पर नजर रखी जा सकती है। उनका कहना है कि जलवायु परिवर्तन का सीधा असर जंगलों, जल-स्रोतों और वन्यजीवों पर पड़ रहा है। ऐसे में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर इनके संरक्षण पर तेजी से काम करने की जरूरत है।
ऋषुध ने बताया कि पीएचडी पूरी करने के बाद वह भारत लौटना चाहते हैं। उनका लक्ष्य खास तौर पर हिमाचल प्रदेश में शोध कार्य करना और प्रदेश के युवाओं को आधुनिक वैज्ञानिक रिसर्च से जोड़ना है।
ऋषुध ठाकुर ने हिमाचल के लोगों से भी प्राकृतिक संसाधनों को बचाने की अपील की है। उनका कहना है कि जंगल, पहाड़ और जल-स्रोत हमारी सबसे बड़ी प्राकृतिक धरोहर हैं और इन्हें बचाना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि इन प्राकृतिक संसाधनों के लिए सबसे बड़ा खतरा इंसानी गतिविधियों से है। इसलिए जंगलों और जल-स्रोतों को प्रदूषण और जरूरत से ज्यादा दोहन से बचाना बेहद जरूरी है।
ऋषुध ठाकुर अपनी सफलता का श्रेय अपनी माता शांति ठाकुर, पिता डी.एस. ठाकुर और अपने सभी शिक्षकों को देते हैं। उनका कहना है कि परिवार ने बचपन से ही उन्हें प्रकृति, समाज और पढ़ाई के प्रति संवेदनशील बनाया। वहीं, शिक्षकों ने भी रिसर्च के सफर में हर कदम पर उनका मार्गदर्शन किया।