शिमला। सोशल मीडिया की चमकती दुनिया में एक परफेक्ट वीडियो, एक आकर्षक रील और कुछ सेकंड की लाइमलाइट के लिए युवा पीढ़ी जान तक जोखिम में डाल देती है। शनिवार दोपहर रामपुर-निरमंड को जोड़ने वाले वजीर बावड़ी पुल पर ऐसा ही एक दृश्य सामने आया, जो पल भर में रोमांच से भय में बदल गया।
रील बनाने के चक्कर में हादसा
निरमंड क्षेत्र की एक युवती अपनी सहेली के साथ पुल के किनारे खड़ी होकर वीडियो बनाने में मशगूल थी। सतलुज नीचे उफान पर थी, धारा तेज थी, और हवा में सर्दी का भारीपन था। कैमरा रिकॉर्ड कर रहा था, पोज बदलते कदम हल्के हुए, और अचानक युवती का पैर फिसल गया।
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नदी में गिरी युवती
जैसे ही वह पुल से नीचे गिरी, उसका शरीर सीधे सतलुज की बेरहम धारा में समा गया। कुछ सेकंड पहले मुस्कुराती हुई चेहरा, अब डर, पानी और संघर्ष में डूब चुका था। सहेली की आवाज ने सन्नाटे को चीर दिया।
सहेली ने मचाया शोर
जबकि आमतौर पर हादसे के बाद भीड़ केवल तमाशबीन बन जाती है, यहां कहानी अलग थी। पास ही डेरा डालकर बैठे गुज्जर समुदाय के कुछ युवक थे। आवाज़ सुनते ही वे बिना किसी सवाल, बिना किसी डर, बिना सोच-समझ के नदी किनारे की ओर भागे।
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युवकों ने लगाई नदी में छलांग
सतलुज की तेजधार से हर कोई वाकिफ है; यह नदी किसी को आसानी से लौटने नहीं देती। लेकिन उन युवकों के लिए उस समय गणित सिर्फ इतना था कि एक जान बचानी है। उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना पानी में छलांग लगा दी। नदी की लहरें उनके खिलाफ थीं, लेकिन हौसला उनके साथ था।
सही-सलामत युवती को बाहर निकाला
कुछ ही मिनटों की कड़ी जद्दोजहद के बाद वे युवती तक पहुंचे। बहाव उसे आगे खींच रहा था, लेकिन उनके साहस ने उसे वापस किनारे की ओर खींच लिया। आखिरकार, सबकी धड़कनें थाम देने वाले संघर्ष के बाद युवती को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
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हादसे के बाद सहमी युवती
इस बीच ब्रो पुलिस चौकी को भी सूचना दी जा चुकी थी। पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची और बिना देर किए घायल व डरी हुई युवती को अपनी गाड़ी में बिठाकर खनेरी स्थित महात्मा गांधी चिकित्सा सेवा परिसर ले गई। वहां डॉक्टरों ने उसका प्राथमिक उपचार किया।
बेटी को देख रोने लगे परिजन
हालत स्थिर होते ही उसे परिजनों को सौंप दिया गया। बेटी को सही-सलामत देख परिजनों के खुशी के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। गुज्जर समुदाय के युवकों ने जो साहस दिखाया, उसे शब्दों में बांधना मुश्किल है। उनकी यह बहादुरी बताती है कि वीरता के लिए न वर्दी चाहिए, न पद, सिर्फ दिल में इंसान के लिए जगह चाहिए।
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जान जोखिम में डाल रहे लोग
उधर यह हादसा एक कड़वा, मगर जरूरी संदेश भी छोड़ गया है। सोशल मीडिया के लिए रोमांचक शॉट जिंदगी से बड़ा नहीं होता। एक रील बनाते समय मोबाइल कैमरा जितना हल्का लगता है, उतना ही भारी उसके नतीजे हो सकते हैं। स्थानीय लोग अब ऐसे स्थानों पर सुरक्षा इंतजाम बढ़ाने की मांग उठा रहे हैं। वहीं युवकों को गांव-क्षेत्र में सम्मानित करने की बात भी चल रही है।
