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May 30, 2026

हिमाचल: दोस्त को बचाया, खुद पानी के बहाव में बह गया- सच्ची दोस्ती की मिसाल बना निखिल

बुझ गया घर का चिराग, रो पड़ा पूरा गांव

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Himachal News

कुल्लू। कहते हैं कि कलयुग में सच्ची दोस्ती सिर्फ किताबों में मिलती है लेकिन कुल्लू की लगवैली घाटी में 25 साल के एक नौजवान ने दोस्ती की जो इबारत लिखी है, उसे सुनकर किसी की भी आंखें भर आएं। ये कहानी एक ऐसे जांबाज दोस्त की है जिसने अपने साथी की सांसों की डोर को टूटने से तो बचा लिया लेकिन बदले में अपनी ही जिंदगी खो बैठा।

एक पल में मातम में बदला सफर

शुक्रवार का वो दिन रोज की तरह ही सामान्य था। निखिल कुमार (25) अपने दोस्तों के साथ शिरढ़ मेले की रौनक देखकर वापस लौट रहा था। चिलचिलाती धूप और गर्मी से राहत पाने के लिए युवाओं की इस टोली ने खलाड़ानाला के पास लगवैली नदी के ठंडे पानी में नहाने का मन बनाया। खिलखिलाते चेहरे, दोस्तों का हंसी-मजाक और पानी की ठंडी फुहारें- लेकिन किसे पता था कि चंद लम्हों बाद ही मौत वहां अपना जाल बिछाने वाली है।

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मौत से सीधे टकरा गया निखिल

नहाते-नहाते अचानक निखिल का एक दोस्त गहरे पानी के भंवर में फंस गया और जिंदगी के लिए छटपटाने लगा। उस खौफनाक मंजर को देखकर जहां बाकी लोग सहम गए, वहीं निखिल ने एक पल भी नहीं गंवाया। उसने अपनी जान की परवाह नहीं की, अपनी मां के आंचल की फिक्र नहीं की और कूद गया मौत की उस उफनती नदी में।

दोस्ती की इससे बड़ी मिसाल और क्या होगी ? 

निखिल ने अपनी पूरी ताकत झोंक कर मौत के मुंह से अपने दोस्त को सुरक्षित बाहर खींच लिया। दोस्त को तो नई जिंदगी मिल गई लेकिन वो खुद नदी के उस बेरहम और तेज बहाव का मुकाबला नहीं कर पाया। पानी निखिल को अपने साथ बहा ले गया और किनारे खड़े दोस्तों की चीखें नदी के शोर में दफन हो गईं।

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बुझ गया घर का चिराग, रो पड़ा पूरा गांव

चीख-पुकार सुनकर स्थानीय लोग और पास की परियोजना के कर्मचारी दौड़े। भारी मशक्कत के बाद निखिल को पानी से बाहर निकाला गया। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था। डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

 

निखिल अब इस दुनिया में नहीं है। भुंतर के हवाई (शियाह) गांव में आज हर आंख नम है, हर दिल भारी है। एक मां का कलेजा फट गया है जो सुबह अपने जवान बेटे को हंसते हुए विदा कर चुकी थी और शाम को उसका बेजान शरीर सामने था।

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कुल्लू SP मदन लाल ने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है। निखिल का अंतिम संस्कार हो जाएगा, वो पंचतत्व में विलीन हो जाएगा लेकिन जब-जब दोस्ती की कसमें खाई जाएंगी, लगवैली नदी की लहरों पर निखिल का नाम सुनहरे अक्षरों में चमकेगा। वो दोस्त तो बच गया, पर ताउम्र उसकी आंखें अपने इस रक्षक दोस्त को ढूंढती रहेंगी।

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