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May 29, 2026

हिमाचल : हाद.से ने खोली स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल, ढाई घंटे तक तड़पते रहे घायल- 3 महिलाओं ने तोड़ा दम

एक ही परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़, पूरे इलाके में मातम

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कुल्लू। हिमाचल प्रदेश के जिला कुल्लू की लगघाटी में हुए दर्दनाक सड़क हादसे ने जहां तीन परिवारों की खुशियां छीन लीं। वहीं, हादसे के बाद अस्पताल में सामने आई अव्यवस्थाओं ने लोगों के जख्म और गहरे कर दिए।

दर्द से कराहते रहे मरीज

काहिका मेले में शामिल होने निकले लोग जब दुर्घटना का शिकार हुए तो उन्हें उम्मीद थी कि अस्पताल पहुंचते ही राहत मिलेगी। मगर क्षेत्रीय अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में घायल करीब ढाई घंटे तक दर्द से कराहते रहे।

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हादसे में 3 महिलाओं की मौत

बता दें कि हादसे में तीन महिलाओं की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए। परिजनों का आरोप है कि समय पर पर्याप्त चिकित्सा सुविधा नहीं मिलने से घायलों की पीड़ा और बढ़ गई।

मेला देखने जा रहे थे, रास्ते में छा गया मातम

वीरवार दोपहर करीब एक बजे बेधार क्षेत्र के लोग ऊझी घाटी के शिरढ़ गांव में आयोजित काहिका मेले में शामिल होने के लिए टाटा सूमो में रवाना हुए थे। मतदान करने के बाद सभी खुशी-खुशी मेले के लिए निकले थे। मगर घर से कुछ ही किलोमीटर दूर जोखू नाला के पास वाहन दुर्घटनाग्रस्त होकर खाई में जा गिरा।

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ट्रॉमा सेंटर में इलाज के लिए करना पड़ा इंतजार

हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। स्थानीय लोगों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया और घायलों को क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू पहुंचाया। अस्पताल पहुंचने के बाद भी घायलों की मुश्किलें खत्म नहीं हुईं। बताया जा रहा है कि ट्रॉमा सेंटर में उस समय केवल एक चिकित्सक मौजूद था। एक साथ कई गंभीर घायलों के पहुंचने से उपचार व्यवस्था चरमरा गई।

दर्द से तड़पते रहे मरीज

इसी बीच एक घायल महिला ने दम तोड़ दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कई घायल स्ट्रेचर और चिकित्सा सहायता का इंतजार करते रहे। डॉक्टरों की अतिरिक्त टीम भी काफी देर बाद मौके पर पहुंची, जिससे लोगों में नाराजगी देखने को मिली।'

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स्वयंसेवक बने सहारा

जब अस्पताल की व्यवस्था लड़खड़ाती नजर आई तो कार सेवा दल, मल्ला साथी ट्रस्ट और अन्नपूर्णा संस्था के स्वयंसेवकों ने मोर्चा संभाला। उन्होंने घायलों को एंबुलेंस से ट्रॉमा सेंटर, एक्स-रे कक्ष और सीटी स्कैन यूनिट तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

एक ही परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

हादसे में एक ही परिवार की सास कली देवी और छोटी बहू मैना देवी की मौत हो गई। वहीं बड़ी बहू प्रोमिला अस्पताल में उपचाराधीन है। दूसरी ओर एक अन्य परिवार के चार सदस्य भी हादसे की चपेट में आए। इनमें तारा और उसका बेटा आयांश गंभीर रूप से घायल हैं और उन्हें एम्स बिलासपुर रेफर किया गया है।

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प्रशासन ने दी राहत राशि

हादसे के बाद उपायुक्त कुल्लू अनुराग चंद्र शर्मा और पुलिस अधिकारियों ने अस्पताल पहुंचकर घायलों का हालचाल जाना। जिला प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को 20-20 हजार रुपये, अन्य घायलों के परिजनों को 5-5 हजार रुपये तथा एम्स बिलासपुर रेफर किए गए घायलों को 10-10 हजार रुपये की फौरी राहत देने की घोषणा की है।

उठ रहे बड़े सवाल

इस हादसे ने एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब एक साथ कई घायल अस्पताल पहुंचते हैं तो क्या ट्रॉमा सेंटर ऐसी आपात स्थितियों से निपटने के लिए तैयार हैं? कुल्लू की यह घटना अब सिर्फ सड़क हादसा नहीं, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की तैयारी की भी परीक्षा बन गई है।

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