शिमला। नए साल की दस्तक जहां खुशियों और उम्मीदों के साथ होनी चाहिए थी, वहीं हिमाचल प्रदेश में जनवरी 2026 की शुरुआत मातम बनकर सामने आई है। बीते महज 11 दिनों में प्रदेश की सड़कों पर ऐसा कहर टूटा कि दर्जनों दर्दनाक हादसों ने कई जिंदगियां छीन लीं और न जाने कितने घरों के चिराग बुझा दिए। सड़क हादसों के ये डरावने आंकड़े न सिर्फ चिंताजनक हैं, बल्कि प्रदेश की यातायात व्यवस्था और सड़क सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।

हिमाचल में 11 दिनों में 25 सड़क हादसे 

प्राप्त जानकारी के अनुसार,  हिमाचल के अलग-अलग जिलों में 11 दिनों में कुल पेश आ चुकें है, इन सड़क हादसों में जान गवाने वाले लोगों की संख्या 49 है। यह सड़क हादसे जिला सिरमौर, चंबा, ऊना, कुल्लू, शिमला, सोलन, कांगड़ा, हमीरपुर, बिलासपुर और मंडी जैसे जिलों से लगातार हादसों की खबरें सामने आई हैं। सबसे ज्यादा घटनाएं सिरमौर जिले से रिपोर्ट हुईं, जहां बस, पिकअप और बाइक  हादसों में कई लोगों की मौत हुई। 

 

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सिरमौर में सबसे ज्यादा घटनाएं हुई रिपोर्ट 

हरिपुरधार बस हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया, जहां पति-पत्नी की एक साथ चिताएं जलीं और तीन साल के मासूम ने माता-पिता को मुखाग्नि दी। वहीं एक अन्य मामले में बस चालक ने आखिरी दम तक बस संभालने की कोशिश की, लेकिन खुद अपनी जान नहीं बचा सका।

परिवार अपनों के लौटने का इंतजार करता रहा और घर पहुंचीं लाशें

चंबा जिला भी हादसों के लिहाज से सबसे ज्यादा प्रभावित रहा। यहां कार और पिकअप के खाई में गिरने से एक ही परिवार के कई सदस्यों की मौत हुई। कहीं पति-पत्नी की एक साथ अर्थियां उठीं तो कहीं परिवार अपनों के लौटने का इंतजार करता रह गया और घर लाशें पहुंचीं।

 

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नए साल की खुशियां मनाने जा रहे थे दोस्त

ऊना जिले में तेज रफ्तार का कहर देखने को मिला। बस-कार टक्कर में चार युवकों की मौत हुई, जबकि अलग-अलग हादसों में बाइक सवार युवाओं को ट्रकों ने कुचल दिया। नए साल की खुशियां मातम में बदल गईं। कुल्लू और मंडी में न्यू ईयर और बर्थडे पार्टी मनाकर लौट रहे युवाओं के हादसों ने सबको स्तब्ध कर दिया। कुल्लू में एक ही हादसे में चार दोस्तों की मौत हो गई, जिनमें तीन युवतियां शामिल थीं।

शासन और PWD की लापरवाही पर उठाए सवाल 

सोलन, शिमला, कांगड़ा, हमीरपुर और बिलासपुर में भी स्कूटी, बाइक, कार और भारी वाहनों की टक्कर से मासूम बच्चों, युवाओं और मजदूरों की जान गई। कहीं 12 वर्षीय बच्चे को हाइड्रा क्रेन ने कुचल दिया, तो कहीं 10 साल का बच्चा अंतिम संस्कार के लिए जाते वक्त हादसे का शिकार हो गया।

 

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इन सभी हादसों के पीछे तेज रफ्तार, खराब सड़कें, पैरापिट की कमी, लापरवाही और नियमों की अनदेखी बड़ी वजह बनकर सामने आई है। कई जगहों पर स्थानीय लोगों ने प्रशासन और PWD की लापरवाही पर भी सवाल उठाए हैं।

सड़क हादसों में जान गवाने वालों के डरा देने वाले आंकड़े 

⦁    सिरमौर: 16 लोगों की मौत 
⦁    कुल्लू: 11 लोगों की मौत
⦁    चंबा: 8 लोगों की मौत
⦁    ऊना: 6 लोगों की मौत
⦁    सोलन: 2 लोगों की मौत
⦁    शिमला: 2 लोगों की मौत
⦁    कांगड़ा: 2 लोगों की मौत
⦁    बिलासपुर: 1  की मौत
⦁    हमीरपुर: 1 की मौत

सड़क सुरक्षा पर सवाल 

लगातार हो रहे इन हादसों ने एक बार फिर प्रदेश में सड़क सुरक्षा, स्पीड कंट्रोल, ब्लैक स्पॉट सुधार और सख्त निगरानी की जरूरत को उजागर कर दिया है। अधिकतर हादसों के पीछे तेज रफ्तार, लापरवाही, खराब सड़कें और पैरापिट की कमी मुख्य कारण बताए जा रहे हैं। अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह सिलसिला और भी कई घरों को उजाड़ सकता है।

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