मंडी। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में रंगड़ों (जंगली ततैयों) का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। आए दिन सामने आ रही घटनाओं के बीच अब जोगिंद्रनगर की बल्ह जोली पंचायत के एक परिवार और उनके साथ जा रहे लोगों पर रंगड़ों ने हमला कर दिया।
रंगड़ों का हमला
इस अचानक हुए हमले से मौके पर अफरा-तफरी मच गई। मां-बेटे समेत तीन लोग घायल हो गए, जबकि उनके साथ मौजूद अन्य लोगों ने भागकर किसी तरह अपनी जान बचाई। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में भय का माहौल है।
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समारोह में जा रहे थे लोग
जानकारी के अनुसार बल्ह जोली पंचायत की रहने वाली 40 वर्षीय कुसमा देवी अपने 19 वर्षीय बेटे निखिल, 52 वर्षीय शीला देवी तथा अन्य परिजनों और ग्रामीणों के साथ जगेहड़ा गांव में आयोजित एक पारिवारिक समारोह में शामिल होने जा रही थीं। कुल 13 लोगों का यह समूह दोपहर बाद गांव से निकला था और सभी सामान्य रूप से अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे थे।
गांव में हुआ हमला
बताया जा रहा है कि जब समूह डलाणा गलू क्षेत्र के पास पहुंचा तो अचानक आसपास मौजूद रंगड़ों का एक बड़ा झुंड सक्रिय हो गया। किसी को संभलने का मौका भी नहीं मिला और देखते ही देखते रंगड़ों ने लोगों पर हमला बोल दिया।
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अचानक हुए हमले से मची भगदड़
रंगड़ों के हमले से पूरे समूह में चीख-पुकार मच गई। लोग अपनी जान बचाने के लिए अलग-अलग दिशाओं में भागने लगे। कई लोगों ने झाड़ियों और पेड़ों की आड़ लेकर खुद को बचाने का प्रयास किया। इस दौरान कुसमा देवी, उनका बेटा निखिल और शीला देवी रंगड़ों के हमले की चपेट में आ गए।
मां-बेटे समेत 3 गंभीर
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार रंगड़ों ने तीनों को कई स्थानों पर डंक मारे, जिससे उनकी हालत बिगड़ने लगी। परिवार के अन्य सदस्यों और ग्रामीणों ने किसी तरह उन्हें सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया। हालांकि बाकी लोगों को भी हल्की चोटें और डंक लगे, लेकिन वे गंभीर रूप से घायल होने से बच गए।
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अस्पताल में कराया गया भर्ती
घटना के बाद घायलों को तुरंत नागरिक अस्पताल जोगिंद्रनगर पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने उनका उपचार शुरू किया। अस्पताल प्रशासन के अनुसार तीनों घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद निगरानी में रखा गया।
रंगड़ों ने किया बुरा हाल
चिकित्सकों का कहना है कि समय पर अस्पताल पहुंच जाने के कारण स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया। फिलहाल, सभी घायल खतरे से बाहर बताए जा रहे हैं और उनकी हालत में सुधार हो रहा है।
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कई बार हो चुका ऐसा
विदित रहे कि, जोगिंद्रनगर क्षेत्र में यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी रंगड़ों के हमलों के कई मामले सामने आ चुके हैं। कई बार खेतों में काम कर रहे किसानों, जंगलों से गुजर रहे लोगों और पशुपालकों को इन हमलों का सामना करना पड़ा है।
लोगों के लिए बने खतरा
ग्रामीणों का कहना है कि गर्मियों के मौसम में रंगड़ों की गतिविधियां बढ़ जाती हैं और पहाड़ी क्षेत्रों में बने उनके बड़े-बड़े छत्ते लोगों के लिए खतरा बन जाते हैं। कई स्थानों पर लोग शाम के समय बाहर निकलने से भी बचने लगे हैं।
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सावधानी बरतने की अपील
घटना के बाद प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि जिन क्षेत्रों में रंगड़ों के बड़े छत्तों की सूचना मिल रही है, वहां स्थिति का आकलन कर आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
प्रशासन ने लोगों से आग्रह किया है कि अगर किसी क्षेत्र में रंगड़ों का बड़ा झुंड या छत्ता दिखाई दे तो उसकी सूचना तुरंत संबंधित विभाग को दें। साथ ही ऐसे स्थानों के आसपास अनावश्यक आवाजाही से भी बचें।
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ग्रामीणों में बढ़ी चिंता
लगातार सामने आ रही घटनाओं के कारण ग्रामीणों में चिंता बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि कई गांवों के आसपास रंगड़ों के बड़े छत्ते मौजूद हैं, जिससे हर समय खतरा बना रहता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि संभावित खतरनाक स्थानों की पहचान कर वहां जल्द प्रभावी कदम उठाए जाएं, ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे को रोका जा सके।
लोगों में डर का माहौल
फिलहाल डलाणा गलू गांव में हुई इस घटना के बाद क्षेत्र के लोग सहमे हुए हैं और प्रशासन की ओर से आगे की कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि रंगड़ों के बढ़ते खतरे को देखते हुए जल्द ठोस कदम उठाए जाएंगे, जिससे लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
