हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश के राशनकार्डधारकों को सुक्खू सरकार ने बड़ा झटका दिया है। सुक्खू सरकार ने हिमाचल के राशन डिपो पर मिलने वाले आटे के कोटे में कटौती कर दी है। इस कटौती का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा।

राशनकार्ड धारकों को झटका

सुक्खू सरकार ने ये फैसला APL राशानकार्ड धारकों के लिए लिया है। इस कटौती से राज्य के लाखों राशनकार्ड धारकों में नाराजगी देखी जा रही है। खासकर तब जब महंगाई पहले से ही आमजन की जेब पर बोझ बन रही है।

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आटे के कोटे में कटौती

आपको बता दें कि सुक्खू सरकार ने ये फैसला APL राशनकार्ड धारकों के लिए लिया है। APL उपभोक्ताओं को पहले राशन डिपो से 14 किलो आटा मिलता था, लेकिन अब इस एक किलो घटा दिया गया है। यानी अब सिर्फ 13 किलो आटा ही दिया जाएगा।

बजट पर पड़ेगा असर

उपभोक्ताओं का कहना है कि एक किलो आटे की कटौती मामूली लग सकती है, लेकिन जब पहले से ही घरेलू बजट पर दबाव हो, तब यह भी एक बड़ी मार है। उनका कहना है कि इस माह डिपुओं में सरसों के तेल और चने की दाल को लेकर भी स्थिति साफ नहीं है। वो असमंजस में हैं कि पिछले महीने की तरह इस बार भी उन्हें ये जरूरी वस्तुएं उपलब्ध होंगी या नहीं।

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नहीं मिला था सरसों तेल

पिछले महीने सरसों का तेल अधिकांश डिपुओं में नहीं पहुंच पाया था, जिससे उपभोक्ताओं को बाजार से ऊंची दरों पर तेल खरीदना पड़ा। यही स्थिति चने की दाल को लेकर भी रही। डिपुओं में दाल उपलब्ध न होने के चलते मध्यमवर्गीय और सीमित आमदनी वाले परिवारों को खासी परेशानी उठानी पड़ी।

चावल की आपूर्ति यथावत

हालांकि, आटे के कोटे में कटौती की गई है, लेकिन चावल की आपूर्ति में किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया गया है। पहले की तरह हर एक राशनकार्ड धारक को छह किलो चावल मिलेगा।

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सस्ती दरों पर राशन मिलना राहत

विदित रहे कि, डिपो से सस्ती दरों पर आटा, चावल, दालें, सरसों का तेल और अन्य खाद्य सामग्री मिलना मध्यम वर्ग और सीमित आय वाले परिवारों के लिए बड़ी राहत होती है। लेकिन जब इन जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति में कटौती या अनिश्चितता आती है, तो यह इन परिवारों की रोजमर्रा की जरूरतों को सीधे तौर पर प्रभावित करती है।

कमी झेलनी पड़ सकती है

हमीरपुर के जिला नियंत्रक, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के अधिकारी शिव राम राही ने जानकारी दी कि APL राशनकार्ड धारकों को इस माह प्रति कार्ड 13 किलो आटा मिलेगा। चावल के कोटे में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

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डिपुओं के माध्यम से उपभोक्ताओं को बाजार से सस्ती दरों पर राशन उपलब्ध कराया जाता है। हालांकि, सरसों का तेल और चने की दाल को लेकर अब तक कोई स्पष्ट निर्देश नहीं मिले हैं। ऐसे में उपभोक्ताओं को इस माह भी जरूरी वस्तुओं की कमी झेलनी पड़ सकती है।

राशन में गड़बड़ी

स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार को कम से कम तय मानकों के अनुरूप राशन उपलब्ध कराना सुनिश्चित करना चाहिए। राशन की नियमितता में गड़बड़ी न केवल उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ाती है, बल्कि डिपो प्रबंधन को भी सवालों के घेरे में लाती है।

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