शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में एक बार फिर परिवहन व्यवस्था ठप होने का खतरा मंडरा गया है। दरअसल, शहर में निजी बस सेवा कुछ दिन के लिए ठप्प रहेगी। जिस कारण लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।
थम जाएंगे निजी बसों के पहिए
निजी मिनी बस चालक-परिचालक संघ ने घोषणा की है कि वह 3 नवंबर से शहर में अपनी सभी बसें बंद रखेंगे। यह फैसला उन लंबी दूरी की बसों के खिलाफ लिया गया है, जो रोजाना 40 किलोमीटर से अधिक दूरी तय कर शिमला शहर में प्रवेश कर रही हैं।
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शहर में बढ़ रहा ट्रैफिक जाम
संघ का कहना है कि HRTC और निजी दोनों तरह की लंबी रूट बसें शहर के भीतर ट्रैफिक जाम बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा रही हैं। ऐसे में जब तक प्रशासन इन बसों को शहर के भीतर आने से नहीं रोकता, वे अपनी सेवाएं बंद रखेंगे।
शहर में जाम का जिम्मेदार कौन?
चालक-परिचालक संघ का आरोप है कि हाल के महीनों में शहर में ट्रैफिक जाम की समस्या भयावह रूप ले चुकी है। हर दिन टुटू, शोघी, ढली और आईएसबीटी टुटीकोंडी की ओर से आने वाली 40 किलोमीटर से अधिक दूरी की बसें सीधे शहर के बीचोंबीच- लक्कड़ बाजार, ओल्ड बस स्टैंड, और ढली बाईपास तक पहुंच जाती हैं। इससे ना केवल जाम लगता है बल्कि स्थानीय मिनी बस रूट पूरी तरह फेल हो जाते हैं।
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रूट में दोगुना समय लगता है
हमारी बसें शहर के छोटे रूटों पर चलती हैं, लेकिन जब लंबी दूरी की बसें शहर में दाखिल होती हैं, तो हमारे रूट का समय दोगुना लग जाता है। यात्रियों को देर होती है, और ईंधन का नुकसान भी झेलना पड़ता है।
पहले भी हुआ था समझौता
इससे पहले 13 अक्टूबर को निजी बस चालक-परिचालक संघ ने इसी मुद्दे को लेकर हड़ताल का ऐलान किया था। लेकिन 12 अक्तूबर को परिवहन निदेशालय में हुई बैठक में समझौता हो गया था।
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शहर में दाखिल नहीं होंगी बसें
बैठक में तय हुआ था कि 40 किलोमीटर से अधिक दूरी की बसें शहर में दाखिल नहीं होंगी और उन्हें सीधे ISBT टुटीकोंडी तक ही सीमित रखा जाएगा। इस समझौते पर एचआरटीसी ने भी सहमति जताई थी और RTO शिमला ने आदेश जारी कर दिए थे।
3 नवंबर से नहीं चलेंगी बसें
संघ के अनुसार, अब तक प्रशासन ने इस निर्णय को लागू नहीं किया। आदेश सिर्फ कागजों में रह गया और लंबी दूरी की बसें अब भी शहर में भीड़ बढ़ा रही हैं। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि अबकी बार प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की, तो 3 नवंबर से शिमला की सभी निजी मिनी बसें पूरी तरह बंद रहेंगी।
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इस दौरान चालक और परिचालक अपनी बसें RTO कार्यालय शिमला के बाहर खड़ी करेंगे और वहीं प्रदर्शन करेंगे। संघ ने कहा कि यह हड़ताल अनिश्चितकालीन भी हो सकती है यदि उनकी मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाए गए।
ऑपरेटर यूनियन ने भी दिया समर्थन
शिमला सिटी प्राइवेट बस ऑपरेटर यूनियन ने भी चालक-परिचालक संघ के इस आंदोलन को समर्थन देने का फैसला किया है। यूनियन के महासचिव ने शुक्रवार को आरटीओ शिमला को ज्ञापन सौंपा, जिसमें मांग की गई कि 40 किलोमीटर से अधिक दूरी की बसों को शहर में प्रवेश न दिया जाए। स्कूल बसों में सवारियों को बिठाने की अनुमति दी जाए, ताकि यात्रियों को राहत मिले।
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सरकार और विभाग के सामने चुनौती
इस हड़ताल का सीधा असर हजारों यात्रियों पर पड़ेगा, जो रोजाना निजी बसों से दफ्तर, कॉलेज या बाजार आते-जाते हैं। अगर हड़ताल लंबी खिंचती है, तो शहर की परिवहन व्यवस्था चरमरा सकती है।
परिवहन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस मुद्दे पर एक बार फिर बातचीत की जाएगी ताकि जनता को असुविधा न हो। हालांकि, विभाग ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।
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स्थानीय लोगों की चिंता
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सरकार ने इस बार भी समस्या का समाधान नहीं किया, तो शिमला में जाम और यातायात की स्थिति और बिगड़ जाएगी। एक स्थानीय व्यापारी ने कहा कि हर दिन बसें शहर के बीचोंबीच तक आती हैं, सड़कें ब्लॉक रहती हैं। लेकिन अगर निजी बसें भी बंद हो गईं तो आम जनता के लिए मुश्किलें और बढ़ जाएंगी।
