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April 13, 2026
CM सुक्खू ने दिया मछुआरों को बड़ा तोहफा: मछली का MSP तय, घाटा होने पर सरकार देगी पैसा
मछुआरों को नहीं होगा नुकसान
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शिमला। हिमाचल प्रदेश की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार ने मछुआरा समुदाय के लिए एक बड़ा और लंबे समय तक असर डालने वाला फैसला लिया है। इस फैसले को लेकर मछुआरों में काफी खुशी देखी जा रही है, क्योंकि इससे उनकी कमाई और भविष्य दोनों सुरक्षित होने की उम्मीद है।
बता दें कि हिमाचल सरकार अब मछुआरों के लिए एक बड़ा फैसला लागू करने जा रही है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू के बजट 2026-27 के अनुसार, अब पहली बार जलाशयों (डैम आदि) में पकड़ी जाने वाली मछलियों का न्यूनतम दाम तय किया गया है।
अब मछलियों की कीमत कम से कम 100 रुपये प्रति किलो होगी। अगर किसी कारण से नीलामी में मछली 100 रुपये से कम में बिकती है, तो सरकार मछुआरों को नुकसान नहीं होने देगी। ऐसे में सरकार सीधे उनके बैंक खाते में प्रति किलो 20 रुपये तक की राशि DBT (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के जरिए देगी।
सीधे शब्दों में कहें तो अब मछुआरों को उनकी मछली का सही दाम मिलेगा और कम कीमत मिलने पर सरकार उनकी भरपाई करेगी। इससे मछुआरों की आमदनी बढ़ेगी और उन्हें आर्थिक सुरक्षा भी मिलेगी।
इसके अलावा सरकार ने रॉयल्टी को लेकर भी बड़ी राहत दी है। पहले मछली पकड़ने पर 15% तक रॉयल्टी देनी पड़ती थी, जिससे मछुआरों पर काफी आर्थिक बोझ पड़ता था। बाद में इसे 7.5% किया गया, और अब इसे और घटाकर सिर्फ 1% कर दिया गया है। यह बदलाव मछुआरों के लिए बहुत बड़ा राहत भरा कदम माना जा रहा है, क्योंकि अब उनका खर्च काफी कम हो जाएगा और बचत बढ़ेगी।
इस फैसले से हिमाचल प्रदेश के करीब 6000 से ज्यादा मछुआरों को सीधा फायदा मिलने वाला है, खासकर उन लोगों को जो जलाशयों में मछली पकड़कर अपना घर चलाते हैं। प्रदेश में पांच बड़े जलाशय हैं, गोबिंद सागर (बिलासपुर और ऊना), पोंग डैम (कांगड़ा), रंजीत सागर और चमेरा (चंबा), और कोल डैम (बिलासपुर)। इन जगहों पर बड़े स्तर पर मछली पकड़ने और पालन का काम होता है।
सरकार के प्रयासों से पिछले कुछ सालों में मछली उत्पादन में भी अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिली है। जलाशयों से मछली उत्पादन 2022-23 में 549.35 मीट्रिक टन था, जो बढ़कर 2025-26 में 818.02 मीट्रिक टन हो गया है। इससे साफ है कि इस क्षेत्र में लगातार सुधार हो रहा है।
अगर पूरे राज्य की बात करें, तो कुल मछली उत्पादन भी बढ़ा है। 2024-25 में 19,019 मीट्रिक टन उत्पादन हुआ था, जो 2025-26 में बढ़कर 20,005 मीट्रिक टन हो गया है। यह दिखाता है कि मछली पालन अब धीरे-धीरे एक मजबूत रोजगार का साधन बनता जा रहा है।
मुख्यमंत्री का कहना है कि इन फैसलों से न सिर्फ मछुआरों की आमदनी बढ़ेगी, बल्कि मछली पकड़ने के तरीके भी बेहतर होंगे और इस काम में ज्यादा लोगों की भागीदारी बढ़ेगी। सरकार आगे भी मछली पालन से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने, बाजार की व्यवस्था सुधारने और मछुआरों को बेहतर मौके देने पर काम कर रही है।