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November 1, 2025
TET बना अड़ंगा- शिक्षकों की नौकरी बचाने में जुटी हिमाचल सरकार, खटखटाया SC का दरवाजा
सेवा देने वालों को नहीं किया जाएगा बेरोजगार- शिक्षा मंंत्री
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शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य के सरकारी और निजी स्कूलों में कार्यरत बिना TET पास शिक्षकों के लिए बड़ा फैसला लिया है। सुक्खू सरकार ने शिक्षकों की नौकरी बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी शुरू कर दी है।
यह फैसला शिक्षा जगत के लिए बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि राज्य में सैकड़ों ऐसे शिक्षक वर्षों से सेवाएं दे रहे हैं जिन्हें अब अचानक सेवा से बाहर किए जाने का खतरा मंडरा रहा है।
दरअसल, 1 सितंबर 2025 को सर्वोच्च न्यायालय ने एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाया था कि पहली से आठवीं कक्षा तक पढ़ाने वाले सभी शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पास करना अनिवार्य होगा।
कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि जो शिक्षक TET पास नहीं हैं, उन्हें सेवा में बने रहने का अधिकार नहीं होगा। इस निर्णय के बाद पूरे देश में हड़कंप मच गया, खासकर उन राज्यों में जहां 2011 से पहले TET अनिवार्य नहीं था और शिक्षक पुराने नियमों के तहत नियुक्त किए गए थे।
हिमाचल प्रदेश में सरकारी स्कूलों के अलावा कई निजी मान्यता प्राप्त विद्यालयों में भी ऐसे सैकड़ों शिक्षक हैं जिन्होंने TET परीक्षा पास नहीं की है। इनमें से अधिकतर की नियुक्ति 2005 से 2011 के बीच हुई थी।
शिक्षा विभाग के अनुसार, उस समय TET परीक्षा भर्ती की शर्त नहीं थी, इसलिए कई योग्य शिक्षकों को सीधे इंटरव्यू या मेरिट के आधार पर नियुक्त किया गया था। ये शिक्षक तब से लगातार सेवा दे रहे हैं और कई अब वरिष्ठ पदों तक पहुंच चुके हैं।
राज्य के शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने स्पष्ट किया कि सरकार इस मामले में मानवीय दृष्टिकोण अपनाने के पक्ष में है। उनका कहना है कि कई शिक्षक ऐसे हैं जिन्होंने 15–20 वर्षों तक सेवाएं दी हैं। उनकी नियुक्तियां उस समय के नियमों के अनुसार हुई थीं।
ऐसे शिक्षकों को एक झटके में नौकरी से निकालना न तो न्यायसंगत होगा और न ही व्यावहारिक। सरकार चाहती है कि कोर्ट पुराने शिक्षकों को सेवा में बनाए रखने की अनुमति दे और उन्हें एक निश्चित समय में TET पास करने का अवसर दिया जाए।
शिक्षा विभाग ने इस पूरे मामले पर प्रारंभिक कानूनी परामर्श पूरा कर लिया है। अब राज्य भर से ऐसे शिक्षकों का विस्तृत रिकॉर्ड एकत्र किया जा रहा है, ताकि सटीक आंकड़ों के साथ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की जा सके।
सूत्रों के मुताबिक, राज्य सरकार आने वाले दिनों में एक संयुक्त विशेष याचिका (SLP) दायर करेगी, जिसमें यह अनुरोध किया जाएगा कि पुराने नियमों के तहत नियुक्त शिक्षकों को सेवा में बनाए रखने की अनुमति दी जाए। उन्हें एक निश्चित समयसीमा में TET पास करने का अवसर प्रदान किया जाए।
हिमाचल से पहले उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश और झारखंड जैसे राज्यों ने भी सुप्रीम कोर्ट में राहत के लिए याचिकाएं दायर की हैं। इन सभी राज्यों ने तर्क दिया है कि TET परीक्षा 2011 में पहली बार लागू हुई थी और इससे पहले नियुक्त शिक्षकों को उसी समय के नियमों के अनुसार वैध माना जाना चाहिए।
हिमाचल सरकार का मानना है कि इन शिक्षकों ने न केवल वर्षों तक शिक्षा दी, बल्कि छात्रों के परिणाम सुधारने में भी अहम भूमिका निभाई है। ऐसे में सिर्फ एक परीक्षा के आधार पर उन्हें अयोग्य ठहराना न्याय की भावना के विपरीत होगा।
शिक्षा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, “राज्य यह तर्क रखेगा कि TET एक योग्यता परीक्षा है, न कि सेवा समाप्त करने का औजार। जिन शिक्षकों ने अपने अनुभव से शिक्षा स्तर को ऊंचा उठाया है, उन्हें पुनः परीक्षा के माध्यम से योग्यता साबित करने का अवसर दिया जाना चाहिए।”
सुप्रीम कोर्ट में सरकार के जाने की खबर से प्रभावित शिक्षकों में राहत और उम्मीद की लहर दौड़ गई है। कई शिक्षकों ने इसे “जीवन की सबसे बड़ी उम्मीद” बताया। एक सरकारी स्कूल के वरिष्ठ शिक्षक ने कहा कि हम 15–20 साल से बच्चों को पढ़ा रहे हैं। TET उस समय लागू ही नहीं था। अब अचानक यह कहना कि आप अयोग्य हैं- यह हमारे आत्मसम्मान पर प्रहार है। सरकार का यह कदम स्वागतयोग्य है।