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April 19, 2026

हिमाचल की मणिमहेश डल झील जमी, बर्फ में ढका कैलाश क्षेत्र- यात्रा पर लगा पूरी तरह प्रतिबंध

देश-विदेश से मणिमहेश की यात्रा करने आते हैं श्रद्धालु

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चंबा। हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जारी बर्फबारी ने पवित्र मणिमहेश डल झील और कैलाश क्षेत्र को पूरी तरह अपनी चपेट में ले लिया है। हालात ऐसे हैं कि डल झील पूरी तरह जम चुकी है और उसके आसपास मौजूद दुकानें व अस्थायी ढांचे मोटी बर्फ के नीचे दब गए हैं।

बर्फ में ढका कैलाश क्षेत्र

मार्च और अप्रैल में हुई भारी बर्फबारी के चलते इलाके में जोखिम अभी भी बरकरार है। स्थानीय लोगों द्वारा बनाए गए वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि पूरा क्षेत्र सफेद चादर में ढका हुआ है और आवाजाही पूरी तरह ठप पड़ी है।

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यात्रा पर लगा पूरी तरह प्रतिबंध

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने फिलहाल मणिमहेश की ओर जाने वाली यात्रा पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। यात्रा पर प्रतिबंध लगने से श्रद्धालुओं के चेहरों पर मायूसी छाई हुई है।

देश-विदेश से आते हैं श्रद्धालु

मणिमहेश यात्रा को उत्तर भारत की सबसे आस्था से जुड़ी यात्राओं में गिना जाता है। हर साल कृष्ण जन्माष्टमी से राधा अष्टमी के बीच आयोजित होने वाली इस यात्रा में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पवित्र झील में स्नान कर भगवान शिव के दर्शन करने पहुंचते हैं।

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सैकड़ों लोग करते हैं यात्रा

यह यात्रा न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार का बड़ा साधन भी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु, खासकर पंजाब से, मई माह से ही यहां पहुंचने लगते हैं।

अवधि बढ़ाने की मांग

ऐसे में वे यात्रा की अवधि बढ़ाने की मांग भी लंबे समय से करते आ रहे हैं- ताकि अधिक लोगों को सुविधाजनक तरीके से दर्शन का अवसर मिल सके और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिले।

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खराब मौसम बना बाधा

हालांकि, खराब मौसम के कारण इस क्षेत्र में पहले भी हादसे हो चुके हैं। कुछ वर्ष पहले शिवरात्रि के दौरान ग्लेशियर की चपेट में आने से दो युवकों की मौत ने सभी को झकझोर दिया था। ऐसे में इस बार प्रशासन कोई जोखिम नहीं लेना चाहता।

कब शुरू होगी यात्रा?

प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे मौसम पूरी तरह अनुकूल होने तक यात्रा का प्रयास न करें। आमतौर पर जून-जुलाई में धन्छो से मणिमहेश तक दुकानें सजने लगती हैं। मगर इस बार बर्फबारी की तीव्रता को देखते हुए यात्रा शुरू होने में देरी की आशंका जताई जा रही है।

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