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April 15, 2026
हिमाचल में इस बार 'तबाही' लेकर आए मानसून...किसान-बागवान रहें सतर्क, बढ़ेंगी मुश्किलें
2026 में मानसून को लेकर लोगों की चिंता
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में मानसून हर साल अपने साथ राहत के साथ-साथ चुनौतियां भी लेकर आता है। एक तरफ जहां लोग भीषण गर्मी से राहत पाने के लिए बारिश का इंतजार करते हैं, वहीं दूसरी ओर यही मानसून कई बार तबाही का कारण भी बन जाता है।
पिछले कुछ वर्षों में राज्य ने मानसून के दौरान कई दर्दनाक हालात देखे हैं, कहीं बादल फटने की घटनाएं हुईं, तो कहीं लगातार बारिश के चलते भूस्खलन और बाढ़ ने लोगों की जिंदगी को पूरी तरह प्रभावित कर दिया। खासकर साल 2025 का मानसून लोगों के लिए कभी न भूलने वाला रहा, जब सामान्य से ज्यादा बारिश ने प्रदेश के कई इलाकों में भारी नुकसान पहुंचाया और लोगों को गहरे जख्म दिए।
इसी वजह से इस साल यानी 2026 के मानसून को लेकर लोगों में चिंता बनी हुई है। हर कोई यह जानना चाहता है कि इस बार बारिश कैसी रहेगी और क्या पिछले साल जैसी स्थिति फिर से बन सकती है। इसी बीच मौसम विभाग ने दक्षिण-पश्चिम मानसून 2026 को लेकर अपना पूर्वानुमान जारी कर दिया है, जिसमें राहत और चिंता दोनों तरह के संकेत दिए गए हैं।
मौसम विभाग के अनुसार, इस बार हिमाचल प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में मानसून के दौरान सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। यानी जून से सितंबर तक चलने वाले इस सीजन में बारिश औसत से नीचे रह सकती है। हालांकि कुछ क्षेत्रों में स्थिति अलग हो सकती है। जैसे लाहौल-स्पीति जिले में सामान्य से ज्यादा बारिश होने के आसार जताए गए हैं। वहीं चंबा, किन्नौर और हमीरपुर के कुछ इलाकों में बारिश सामान्य के आसपास रह सकती है।
अगर पूरे देश की बात करें तो 2026 में दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान होने वाली बारिश औसत का करीब 92 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इसमें करीब 5 प्रतिशत तक ऊपर-नीचे का फर्क हो सकता है। मौसम विभाग के मुताबिक, 1971 से 2020 के आंकड़ों के आधार पर मानसून की दीर्घावधि औसत वर्षा तय की जाती है, और इस बार के अनुमान के अनुसार देशभर में बारिश सामान्य से थोड़ी कम रह सकती है। इसी ट्रेंड का असर हिमाचल प्रदेश में भी देखने को मिल सकता है।
हिमाचल में जून से सितंबर तक का समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान न सिर्फ खेती-किसानी पूरी तरह बारिश पर निर्भर रहती है, बल्कि पेयजल और अन्य प्राकृतिक संसाधनों की स्थिति भी इसी से तय होती है। गांवों से लेकर शहरों तक लोगों की दिनचर्या मानसून से प्रभावित होती है। लेकिन इसके साथ ही यह समय जोखिम भरा भी होता है, क्योंकि भारी बारिश के चलते भूस्खलन, सड़क बंद होने और बाढ़ जैसी समस्याएं भी सामने आती हैं।
अगर सामान्य बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो पूरे हिमाचल प्रदेश में मानसून के दौरान औसतन 734.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की जाती है। हालांकि यह एक औसत आंकड़ा है, जबकि हर जिले में सामान्य वर्षा का स्तर अलग-अलग है। जैसे कांगड़ा जिले में सबसे ज्यादा करीब 1622.4 मिमी बारिश होती है, जो इसे सबसे ज्यादा वर्षा वाला इलाका बनाता है। वहीं मंडी में करीब 1097.5 मिमी और सिरमौर में करीब 1183.8 मिमी बारिश सामान्य मानी जाती है।
इसी तरह बिलासपुर में करीब 819.1 मिमी, सोलन में 874.3 मिमी, ऊना में करीब 953 मिमी और हमीरपुर में 973.2 मिमी बारिश सामान्य मानी जाती है। शिमला में यह आंकड़ा करीब 627.5 मिमी है, जबकि कुल्लू में 548 मिमी के आसपास रहता है। दूसरी ओर किन्नौर और लाहौल-स्पीति जैसे जनजातीय इलाकों में यह आंकड़ा काफी कम है, जहां क्रमशः करीब 274.8 मिमी और 382.9 मिमी बारिश सामान्य मानी जाती है।