शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में आज बुधवार को उस समय माहौल तनावपूर्ण हो गया, जब लंबे समय से आंदोलन कर रहे दृष्टिबाधित सड़क पर उतर आए और चक्का जाम कर दिया। इस दौरान दृष्टिबाधितों की ना सिर्फ पुलिस अधिकारियों से तीखी बहसबाजी हुई, बल्कि शिमला के उपमंडलाधिकारी एसडीएम ओशीन शर्मा से भी प्रदर्शन कर रहे दृष्टिबाधितों की तीखी नोकझोक हुई। दृष्टिबाधितों  की नारेबाजी से आहत एसडीएम ओशीन शर्मा प्रदर्शन स्थल से वापस लौट गई।

पुलिस अधिकारी की धमकी से बढ़ा तनाव

दरअसल दृष्टिबाधित बैकलॉग भर्ती और अपनी अन्य मांगों को लेकर पिछले 770 दिन से प्रदर्शन कर रहे हैं। राज्य सचिवालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे इन दृष्टिहीनों ने आज विश्व विकलांग दिवस को काले दिवस के रूप में मनाया और प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान सड़क जाम की कोशिश कर रहे दृष्टिबाधितों को रोकते समय उनकी पुलिस कर्मियों से झड़प हो गई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि एक पुलिस अधिकारी ने दिव्यांग आंदोलनकारियों के साथ धक्का.मुक्की की और ऊंची आवाज करने पर उनकी धड़कनें रुकवा देने जैसी धमकी दी। इससे नाराज़ प्रदर्शनकारियों ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ तीखे नारे लगाए।

 

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एसडीएम ओशीन से भिड़े प्रदर्शनकारी

प्रदर्शनकारियों को समझाने के लिए एसडीएम ओशीन शर्मा भी मौके पर पहुंची, लेकिन जब दृष्टिबाधितों ने एसडीएम ओशीन शर्मा से ग्रांट और सुविधाओं से जुड़े सवाल पूछे तो दोनों पक्षों में तनाव बढ़ गया। बहसबाजी बढ़ने पर एसडीएम ने नाराजगी जताई और कहा कि वे सीएम के खिलाफ बेकार के नारे नहीं सुनेंगी। जिस पर एक दृष्टिबाधित ने जवाब दिया- देखो इनकी दादागिरी... हद है। प्रदर्शनकारियों के विरोध के स्वर तेज होने पर एसडीएम को मौके से लौटना पड़ा। इससे पहले दराट को लेकर भी दोनों पक्षों में तीखी नोकझोक हुई थी। दृष्टिबाधितों ने चुनौती देते हुए कहा कि एसडीएम बताएं कि उन्होंने दराट कहां देखा।

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क्या है इनकी मुख्य मांगे

राज्य दृष्टिहीन संघ के अध्यक्ष राजेश ठाकुर के अनुसार सरकारी विभागों में दृष्टिहीन कोटे के करीब 1200 पद वर्षों से खाली पड़े हैं। उनका कहना है कि पेंशन मात्र 1700 रुपये मासिक है, वह भी 2-3 महीने की देरी से मिलती है। उन्होंने बताया कि सरकार के साथ कई दौर की वार्ता हुई, लेकिन कोई ठोस निर्णय नहीं निकला। हर बार बातचीत का भरोसा दिया जाता है, लेकिन कार्रवाई नहीं होती।

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10 दिसंबर से आंदोलन और तेज होगा

राजेश ठाकुर ने कहा कि अब आंदोलन को नया मोड़ देने की तैयारी की जा रही है। 10 दिसंबर के बाद प्रदेशभर से दृष्टिबाधित और उनके परिवारजन शिमला पहुंचेंगे और सरकार को चेताने के लिए बड़ा प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने बताया कि उन्होंने क्रमिक अनशन शुरू कर दिया है और यदि सरकार ने जल्द सकारात्मक कदम नहीं उठाया, तो यह आमरण अनशन में बदल दिया जाएगा।

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बता दें कि  दृष्टिबाधित संगठन सचिवालय से कुछ ही दूरी पर पिछले 26 दिनों से लगातार धरने पर बैठे हैं, जबकि उनकी लड़ाई पिछले 770 दिनों से जारी है। कड़ाके की ठंड, बारिश, बर्फबारी और गर्मी के बावजूद वे धरना स्थल नहीं छोड़े हुए हैं। इनका यह आंदोलन प्रदेश की इतिहास में दूसरा सबसे लंबा धरना माना जा रहा है।