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July 4, 2026
हिमाचल में अफसरों की लंबी बैठकों पर ब्रेक: मोदी सरकार का फैसला- नतीजों पर होगा फोकस
हिमाचल में भी लागू होंगे निर्देश
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शिमला। सरकारी दफ्तरों में घंटों चलने वाली बैठकों की कार्यशैली अब बदलने जा रही है। केंद्र सरकार ने नौकरशाही में कार्य संस्कृति सुधारने के लिए आईएएस अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि अब बैठकों की संख्या नहीं, बल्कि उनके नतीजों पर फोकस किया जाए। इसके लिए कैबिनेट सचिव डॉ. टी.वी. सोमनाथन ने प्रभावी बैठक संचालन को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है, जिसे हिमाचल प्रदेश सरकार ने भी सभी आईएएस अधिकारियों तक पहुंचा दिया है।
हिमाचल सरकार के कार्मिक विभाग ने सभी आईएएस अधिकारियों को इन दिशानिर्देशों का अध्ययन कर अपने कामकाज में लागू करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही हिमाचल प्रदेश लोक प्रशासन संस्थान (HIPPA) को भी इन्हें प्रशिक्षण कार्यक्रमों में शामिल करने को कहा गया है, ताकि प्रशासनिक अधिकारियों में बेहतर प्रबंधन कौशल विकसित हो सके।
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नई गाइडलाइन में कहा गया है कि यदि किसी मुद्दे का समाधान ई-मेल, फोन या अन्य माध्यम से हो सकता है तो बैठक बुलाने की जरूरत नहीं है। बैठक से पहले उसका उद्देश्य स्पष्ट होना चाहिए, एजेंडा पहले से साझा किया जाए और संबंधित दस्तावेज प्रतिभागियों को समय रहते उपलब्ध कराए जाएं। सामान्य परिस्थितियों में बैठक 30 से 60 मिनट के भीतर पूरी करने का प्रयास किया जाए।
केंद्र सरकार ने अधिकारियों को यह भी सलाह दी है कि बैठकों में केवल सहमति तलाशने के बजाय अलग राय रखने वालों को भी पूरा अवसर दिया जाए। अधीनस्थ कर्मचारियों और कनिष्ठ अधिकारियों को खुलकर सुझाव देने के लिए प्रोत्साहित करने और उनकी राय को महत्व देने पर भी जोर दिया गया है।
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गाइडलाइन के अनुसार, हर बैठक के दो से तीन दिन के भीतर उसकी कार्यवाही (मिनट्स) जारी करनी होगी। इसमें स्पष्ट रूप से लिखा जाएगा कि कौन-सा फैसला लिया गया, उसे लागू करने की जिम्मेदारी किस अधिकारी की होगी और उसे पूरा करने की समयसीमा क्या रहेगी।