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July 8, 2026
हिमाचल में फटा बादल, अलर्ट मोड पर प्रशासन और रेस्क्यू टीमें- जानें क्या कुछ बहा
प्रशासन की लोगों से सतर्क रहने की अपील
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कुल्लू। हिमाचल प्रदेश में मानसून ने अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। कुल्लू जिले के शिलानाला की ऊंची पहाड़ियों में मंगलवार को बादल फटने की घटना हुई, जिसके बाद गड़सा खड्ड का जलस्तर अचानक कई गुना बढ़ गया। तेज बहाव की चपेट में आने से खड्ड पर बनी कई पुलियां बह गईं। जिसके बाज आसपास के लोगों में दहशत का माहौल बना हुआ है।
बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से नदी-नालों और खड्डों के आसपास नहीं जाने की अपील की है। प्रशासन की ओर से जारी एडवाइजरी में कहा गया है कि पतलीकूहल के पास कशेरी नाला उफान पर है। ऐसे में कोई भी व्यक्ति नाले को पार करने की कोशिश न करे और सुरक्षा नियमों का पालन करे। साथ ही लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की भी अपील की गई है।
भारी बारिश के कारण कुल्लू हुरला नाले का जलस्तर तेजी से बढ़ गया। तेज बहाव के चलते राउली पुल बाढ़ की चपेट में आकर बह गया। बताया जा रहा है कि यह नाला मनिहार क्षेत्र से होकर गुजरता है। पानी का बहाव इतना तेज था कि पुल कुछ ही देर में बह गया और आसपास के इलाके में नुकसान हुआ।
ग्राम पंचायत पारली के पूर्व प्रधान किशन चंद ठाकुर और स्थानीय निवासी लीलाधर ने बताया कि पुल बह जाने के कारण राउली और बूगा गांवों का संपर्क पूरी तरह कट गया है। अब दोनों गांवों के लोगों को आने-जाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
शिलानाल और मनिहार इलाके में हुई इस घटना के बाद गड़सा नाले में तेज बाढ़ आ गई। देखते ही देखते नाले का जलस्तर इतना बढ़ गया कि लोगों में अफरा-तफरी मच गई। हालांकि लोगों ने समय रहते एक-दूसरे को सूचना दे दी, जिससे नाले के किनारे रहने वाले परिवार तुरंत अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंच गए।
बाढ़ का पानी अपने साथ भारी मात्रा में मलबा, पत्थर और बड़े-बड़े पेड़ भी बहाकर लाया। तेज बहाव के कारण नाले के ऊपर बनी करीब 10 छोटी पुलियां बह गईं। कई जगह रास्ते पूरी तरह टूट गए, जिससे लोगों का एक गांव से दूसरे गांव जाना मुश्किल हो गया है।
इस घटना में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन पुलियां बह जाने से सबसे ज्यादा दिक्कत स्कूली बच्चों और मरीजों को होगी। बच्चों के लिए स्कूल पहुंचना मुश्किल हो गया है, वहीं बीमार लोगों को अस्पताल ले जाने में भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द राहत कार्य शुरू कर टूटे संपर्क को बहाल करने की मांग की है।
मानसून के खतरे को देखते हुए लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) भी पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। शिमला में विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान तैयारियों का जायजा लिया गया। विभाग ने बताया कि प्रदेशभर में सड़कों को जल्द बहाल करने और आपात स्थिति से निपटने के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं।
पीडब्ल्यूडी ने मानसून सीजन के लिए 15,365 कर्मचारियों की तैनाती की है। इसके अलावा 1,156 मशीनें और 6 बेली ब्रिज भी आपात स्थिति में इस्तेमाल के लिए तैयार रखे गए हैं। चंबा, कुल्लू, रामपुर और सिरमौर के संवेदनशील इलाकों पर विशेष नजर रखी जा रही है। विभाग ने अस्पतालों, पुलिस थानों, स्कूलों, फायर स्टेशनों और बिजली केंद्रों तक सड़क संपर्क हर हाल में बनाए रखने के निर्देश दिए हैं।
प्रदेश की संवेदनशील सड़कों और पुलों की सूची तैयार कर ली गई है। सभी मंडलों में 24×7 कंट्रोल रूम स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि भूस्खलन, बाढ़ या बादल फटने जैसी घटनाओं के बाद तुरंत राहत और सड़क बहाली का काम शुरू किया जा सके। सेब सीजन को देखते हुए बागवानों की आवाजाही और फसल ढुलाई को भी प्राथमिकता दी जा रही है।
भारी बारिश के कारण प्रदेशभर में 104 सड़कें बंद हो गई हैं। इन्हें जल्द से जल्द खोलने के लिए पीडब्ल्यूडी की टीमें युद्ध स्तर पर काम कर रही हैं। विभाग का कहना है कि बारिश के दौरान हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त संसाधन भी लगाए जाएंगे।