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July 6, 2026

हिमाचल : स्मार्ट मीटर विवाद पर कोर्ट का बड़ा फैसला, बिजली काटने की कार्रवाई पर रोक- जानें

दुकानदार ने अदालत का दरवाजा खटखटाया

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Himachal News

हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश में स्मार्ट मीटर को लेकर चल रही बहस के बीच हमीरपुर की सिविल कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किया है। अदालत ने एक उपभोक्ता की याचिका पर सुनवाई करते हुए हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड को निर्देश दिया है कि उसकी दुकान की बिजली आपूर्ति 10 दिनों के भीतर पुराने मीटर के माध्यम से दोबारा शुरू की जाए।

दुकानदार ने अदालत का दरवाजा खटखटाया

दरअसल, अदालत ने शुरुआती स्तर पर माना कि स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया स्वैच्छिक प्रतीत होती है और किसी उपभोक्ता पर इसे जबरन लागू नहीं किया जा सकता। यह मामला लंबलू क्षेत्र के एक दुकानदार द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है।

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याचिकाकर्ता का कहना था कि बिजली बोर्ड ने उसे स्मार्ट मीटर लगाने के लिए नोटिस दिया था और ऐसा न करने पर बिजली कनेक्शन काटने की चेतावनी दी थी। बाद में, जब मामला न्यायालय में लंबित था, तब भी उसकी बिजली आपूर्ति बंद कर दी गई, जिसके बाद उसने अदालत से राहत की मांग की।

बिजली बोर्ड ने नीति का दिया हवाला

सुनवाई के दौरान बिजली बोर्ड की ओर से कहा गया कि राज्य सरकार की नीति और बिजली अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार सही और आधुनिक मीटर के माध्यम से ही बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जानी चाहिए। बोर्ड का तर्क था कि स्मार्ट मीटर इसी नीति का हिस्सा हैं और भविष्य की बिजली व्यवस्था के लिए आवश्यक कदम हैं।

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वहीं, याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि स्मार्ट मीटर लगाना अनिवार्य नहीं है। यदि कोई उपभोक्ता इसे स्वीकार नहीं करता, तो केवल इसी आधार पर उसका बिजली कनेक्शन काटना कानून के अनुरूप नहीं माना जा सकता।

अदालत ने अंतरिम राहत दी

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सिविल कोर्ट ने उपलब्ध रिकॉर्ड और सरकारी स्पष्टीकरणों का अवलोकन किया। अदालत ने प्रथम दृष्टया माना कि स्मार्ट मीटर योजना स्वैच्छिक प्रकृति की प्रतीत होती है। इसी आधार पर अदालत ने बिजली बोर्ड को निर्देश दिया कि संबंधित उपभोक्ता की दुकान की बिजली आपूर्ति पुराने मीटर के माध्यम से 10 दिनों के भीतर बहाल की जाए।

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अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह केवल अंतरिम आदेश है और मुख्य मामले का अंतिम निर्णय अभी होना बाकी है। फिलहाल यह व्यवस्था मुकदमे के अंतिम निपटारे तक प्रभावी रहेगी। साथ ही कोर्ट ने कहा कि अंतरिम आदेश में की गई टिप्पणियों को अंतिम निर्णय का आधार नहीं माना जाएगा।

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