शिमला। हिमाचल प्रदेश में लगातार जारी बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। राज्य के कई हिस्सों में भूस्खलन और बाढ़ जैसी आपदाओं ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं। शनिवार शाम तक प्रदेश में दो नेशनल हाईवे सहित कुल 313 सड़कें पूरी तरह बंद रहीं। बिजली और पानी की आपूर्ति पर भी बड़ा असर पड़ा है, जिससे कई क्षेत्रों में अंधेरा और पेयजल संकट गहरा गया है।

मंडी जिला सबसे ज्यादा प्रभावित

प्रदेश में सबसे अधिक नुकसान मंडी जिले को हुआ है। यहां 175 सड़कें बंद हैं] 322 बिजली ट्रांसफार्मर ठप हैं और 44 पेयजल योजनाएं प्रभावित हैं। अकेले मंडी में हालात इतने खराब हैं कि लोगों को बुनियादी सुविधाओं के लिए भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

 

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मौसम विभाग का नया अलर्ट

मौसम विज्ञान केंद्र ने 19 अगस्त तक राज्य में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। 17 अगस्त को चंबा, कांगड़ा, मंडी, शिमला और सिरमौर में भारी बारिश की संभावना जताई गई है। 18 अगस्त को कांगड़ा और 19 अगस्त को कांगड़ा व मंडी में अलर्ट जारी है। वहीं 20 से 22 अगस्त तक मौसम खराब रहने की आशंका है, लेकिन इन दिनों के लिए कोई अलर्ट घोषित नहीं किया गया है।

शिमला में भूस्खलन और सतलुज का खतरा

राजधानी शिमला में शनिवार को बारिश से राहत मिली, लेकिन विकास नगर–पंथाघाटी मार्ग पर भारी भूस्खलन ने संकट खड़ा कर दिया। पहाड़ी से गिरे मलबे ने सड़क को कई घंटों तक बंद रखा। प्रशासन ने आशंका जताई है कि सड़क किनारे खड़ी गाड़ियां मलबे में दब सकती हैं। दूसरी ओर, सुन्नी क्षेत्र में सतलुज नदी के उफान से बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। नदी का पानी आईटीआई, फॉरेस्ट रेस्ट हाउस और सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंच गया, जिससे सुन्नी पुल पर आवाजाही रोक दी गई है।

 

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पौंग बांध से बिगड़े हालात

कांगड़ा जिले में पौंग बांध से छोड़े गए अतिरिक्त पानी ने स्थिति और बिगाड़ दी। व्यास नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से मंड भोग्रवां गांव में एक बहुमंजिला मकान का हिस्सा बह गया। गनीमत रही कि समय रहते मकान खाली करा लिया गया, वरना बड़ा हादसा हो सकता था।

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मौतों और तबाही का आंकड़ा

अब तक मानसून सीजन में प्रदेशभर में 261 लोगों की जान जा चुकी है। 37 लोग लापता और 332 घायल हुए हैं। मृतकों में सबसे ज्यादा 47 लोग मंडी जिले से हैं। इसके अलावा कांगड़ा में 40, चंबा में 30, शिमला में 26 और किन्नौर में 24 लोगों की जान गई है। बारिश और भूस्खलन ने हजारों मकानों, दुकानों और पशुशालाओं को भी नुकसान पहुंचाया है।

मकानों और पशुओं की बड़ी हानि

सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक 2,385 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिनमें 566 पूरी तरह ढह गए। 360 दुकानों और 2,174 पशुशालाओं को नुकसान पहुंचा है। मंडी जिले में सबसे ज्यादा 1,255 मकान टूटे हैं, जबकि 430 पूरी तरह गिर गए। इसी जिले में 287 दुकानें और 1,208 पशुशालाएं नष्ट हुई हैं। अब तक 1,626 पशुओं और 25,755 पोल्ट्री पक्षियों की मौत हो चुकी है।

 

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2,144 करोड़ का आर्थिक नुकसान

हिमाचल को इस मानसून सीजन में अब तक 2,144 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। इसमें सबसे बड़ा नुकसान लोक निर्माण विभाग को हुआ है, जिसकी राशि 1,188 करोड़ रुपये आंकी गई है। जल शक्ति विभाग को भी 697 करोड़ रुपये की क्षति हुई है। इस दौरान 63 भूस्खलन, 74 बाढ़ और 34 बादल फटने की घटनाएं दर्ज की गई हैं।

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