शिमला। हिमाचल प्रदेश में मानसून की सक्रियता अभी कम नहीं हुई है। राजधानी शिमला से लेकर धर्मशाला, ऊना, नाहन और प्रदेश के कई अन्य हिस्सों में बारिश का दौर जारी है। कहीं तेज बारिश तो कहीं बादलों और बूंदाबांदी ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बीते रोज चले अंधड़ और बारिश ने किसानों की चिंता भी बढ़ा दी। बिलासपुर के स्वारघाट क्षेत्र में तेज हवाओं से कटाई के लिए तैयार मक्की की फसल खेतों में ही जमीन पर बिछ गई।

 

मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ दिन भी प्रदेश में मौसम पूरी तरह साफ रहने वाला नहीं है। 14 से 17 सितंबर तक कई क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं का दौर देखने को मिल सकता है। वहीं 18 से 20 सितंबर के बीच बारिश की गतिविधियों में कुछ कमी आने का अनुमान है। हालांकि इस दौरान भी कुछ स्थानों पर हल्की बारिश जारी रह सकती है।

 

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16 सितंबर को कई जिलों में बारिश के आसार

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक 15 और 16 सितंबर को प्रदेश के अधिकांश जिलों में कुछ स्थानों पर बारिश हो सकती है। खासकर चंबा, कांगड़ा, मंडी, कुल्लू और शिमला के कई हिस्सों में 16 सितंबर को मौसम ज्यादा सक्रिय रहने की संभावना है। 14 सितंबर को ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर, कुल्लू और किन्नौर में कुछ स्थानों पर बारिश के आसार हैं। 17 सितंबर को भी कई इलाकों में बारिश हो सकती है।

 

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18 सितंबर को ज्यादातर क्षेत्रों में हल्की बारिश जबकि 19 और 20 सितंबर को मैदानी, निचले और मध्य पर्वतीय इलाकों में कुछ स्थानों पर बारिश की संभावना जताई गई है। हालांकि राहत की बात यह है कि फिलहाल किसी भी जिले के लिए भारी बारिश का विशेष अलर्ट जारी नहीं किया गया है। इसके बावजूद 14 से 17 सितंबर के बीच कुछ क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ आंधी और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं।

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बारिश से पहले अंधड़ ने मचाई तबाही

रविवार को मौसम ने अचानक करवट ली। शिमला, धर्मशाला, ऊना और नाहन सहित कई क्षेत्रों में बारिश हुई। बिलासपुर के स्वारघाट के कई गांवों में तेज हवाओं के साथ हुई मूसलाधार बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। खेतों में पककर तैयार खड़ी मक्की की फसल तेज हवाओं के कारण जमीन पर बिछ गई। किसानों के मुताबिक फसल कटाई के लिए तैयार थी और ऐसे समय में अंधड़ आने से नुकसान की चिंता बढ़ गई है।

भूस्खलन से सड़कें बंद, वाहन भी मलबे में दबा

बारिश के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन का खतरा भी बना हुआ है। शिमला के भट्ठाकुफर स्थित नेरीधार में पहाड़ी से अचानक मलबा गिरने के कारण आसपास के भवनों को खतरा पैदा हो गया। मलबे की चपेट में एक डस्टर वाहन भी आ गया। वहीं चौपाल-नेरवा-पांवटा साहिब मार्ग पर नकोड़ा पुल के पास भूस्खलन के कारण सड़क करीब तीन घंटे तक बंद रही।

पहाड़ी से बड़ी चट्टानों और मलबे के सड़क पर आने से दोनों तरफ वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई। सिरमौर में भी बारिश का असर देखने को मिला। नाहन मेडिकल कॉलेज के सर्जिकल वार्ड तक बारिश का पानी पहुंच गया। वहीं पांवटा साहिब और राजगढ़ में चल रही खेल गतिविधियां भी बारिश के कारण प्रभावित हुईं।

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मानसून ने अब तक ली 300 लोगों की जान

इस मानसून सीजन में प्रदेश को बारिश, बाढ़ और भूस्खलन की बड़ी कीमत चुकानी पड़ी है। 1 जून से 13 सितंबर तक 300 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें 180 मौतें सड़क हादसों में हुईं, जबकि भूस्खलन से 18 और पानी में डूबने से 13 लोगों की जान गई। फ्लैश फ्लड में भी एक व्यक्ति की मौत दर्ज की गई है। बारिश और प्राकृतिक आपदाओं से सरकारी और निजी संपत्ति को करीब 1683 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। अकेले लोक निर्माण विभाग को लगभग 1231 करोड़ रुपये की क्षति का अनुमान है। इस दौरान 129 मकान पूरी तरह ढह गए, जबकि 502 मकानों को आंशिक नुकसान पहुंचा है।

71 सड़कें और 24 पेयजल योजनाएं प्रभावित

बीते दिनों हुई बारिश के कारण प्रदेश में 71 सड़कें और 24 पेयजल योजनाएं बंद हुई हैं। लगातार बारिश और भूस्खलन से पहाड़ी क्षेत्रों में यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है। इस मानसून सीजन में हिमाचल में अब तक सामान्य से करीब 11 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। इसके बावजूद अलग-अलग दिनों में बारिश का दौर बना हुआ है।

 

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तापमान में भी आएगी गिरावट

बारिश और बादलों के कारण अगले चार से पांच दिनों में प्रदेश के अधिकतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आने का अनुमान है। फिलहाल कई क्षेत्रों में तापमान सामान्य से ऊपर चल रहा है। मौसम विभाग का पूर्वानुमान साफ है—पहाड़ों में अभी मौसम पूरी तरह खुलने वाला नहीं है। 19 सितंबर तक बारिश का दौर अलग-अलग क्षेत्रों में जारी रह सकता है। ऐसे में पहाड़ी सड़कों पर सफर करने वालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत है।

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