#विविध
September 14, 2026
सीएम सुक्खू किशाऊ बांध पर कल करेंगे MOU साइन, हिमाचल को होगी सालाना 600 करोड़ की कमाई
सीएम सुक्खू आज जाएंगे दिल्ली, कल किशाऊ बांध पर साइन होगा एमओयू
शेयर करें:

शिमला। हिमाचल प्रदेश सहित कई राज्यों के लिए मंगलवार का दिन बेहद महत्वपूर्ण होने जा रहा है। लंबे समय से अटकी किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए छह राज्यों के बीच मंगलवार को नई दिल्ली में अहम समझौता ज्ञापन यानी MoU पर हस्ताक्षर होंगे। इस बड़े घटनाक्रम में हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू भी शामिल होंगे। मुख्यमंत्री सोमवार दोपहर बाद दिल्ली के लिए रवाना हो रहे हैं।
किशाऊ परियोजना को लेकर होने वाले MoU पर हिमाचल प्रदेश के अलावा उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान के प्रतिनिधि हस्ताक्षर करेंगे। केंद्रीय स्तर पर इस समझौते को आगे बढ़ाने में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। जून में उनकी अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद राज्यों के बीच लंबे समय से चले आ रहे प्रमुख मतभेदों को दूर करने का रास्ता साफ हुआ था।
यह भी पढ़ें : हिमाचल: दो मासूमों की जा*न लेने वाला सांप फिर लौटा...उसी कमरे में घुस रहा था, लोगों ने डंडों से मा....
इस समझौते का हिमाचल के लिए सबसे बड़ा फायदा आर्थिक माना जा रहा है। राज्य सरकार का दावा है कि परियोजना में हिमाचल के हितों को मजबूती से रखने के बाद राज्य को हर साल करीब 600 करोड़ रुपये के बराबर आर्थिक लाभ मिल सकेगा। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत हिमाचल को अपने हिस्से के पानी के बदले परियोजना के बिजली घटक में लाभ मिलेगा।
यानी एक तरफ किशाऊ बांध से दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों की पानी की जरूरत पूरी करने में मदद मिलेगी, वहीं हिमाचल के लिए यह परियोजना राजस्व और ऊर्जा लाभ का नया रास्ता खोल सकती है।
किशाऊ परियोजना में हिमाचल के सामने सबसे बड़ी चिंता बिजली घटक की लागत को लेकर थी। राज्य सरकार ने केंद्र के समक्ष यह तर्क रखा कि जब परियोजना के पानी से दूसरे राज्यों को बड़ा लाभ मिलने वाला है, तो हिमाचल पर बिजली घटक की लागत का अतिरिक्त बोझ क्यों डाला जाए। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस मुद्दे को केंद्र के समक्ष प्रमुखता से उठाया। जून में हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद इस मामले में सैद्धांतिक सहमति बनने से हिमाचल के लिए परियोजना का आर्थिक समीकरण काफी बेहतर हुआ।
यह भी पढ़ें : हिमाचल : PG की छात्राओं को गंदे इशारे करता था बुजुर्ग- कैमरे में हुआ कैद, थाने पहुंचीं लड़कियां
किशाऊ परियोजना की प्रस्तावित व्यवस्था अपने आप में खास है। हिमाचल के हिस्से में आने वाले जल का उपयोग दिल्ली और राजस्थान सहित अन्य लाभार्थी राज्यों को उपलब्ध कराया जाएगा। इसके बदले इन राज्यों की ओर से परियोजना के बिजली घटक में योगदान किया जाएगा। सरल शब्दों में कहें तो हिमाचल अपनी जल हिस्सेदारी का लाभ दूसरे राज्यों को देगा और बदले में बिजली परियोजना में आर्थिक लाभ प्राप्त करेगा। यही व्यवस्था राज्य के लिए इस समझौते को महत्वपूर्ण बनाती है।
किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा पर टौंस नदी पर प्रस्तावित है। टौंस यमुना नदी की प्रमुख सहायक नदी है। परियोजना के तहत करीब 236 मीटर ऊंचे कंक्रीट ग्रेविटी बांध के निर्माण की योजना है। विशाल जलाशय में करीब 1324 मिलियन क्यूबिक मीटर लाइव जल भंडारण की क्षमता विकसित होने का अनुमान है।
किशाऊ परियोजना का मकसद केवल बिजली पैदा करना नहीं है। इसके जरिए ऊपरी यमुना बेसिन में बड़े पैमाने पर जल भंडारण, सिंचाई और पेयजल आपूर्ति को बढ़ावा देने की योजना है। परियोजना से करीब 97 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। इसके साथ ही दिल्ली समेत कई राज्यों को पेयजल और औद्योगिक उपयोग के लिए पानी उपलब्ध होगा। परियोजना को यमुना बेसिन में जल उपलब्धता बढ़ाने और यमुना के पुनर्जीवन की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
किशाऊ बांध के फायदे जितने बड़े हैं, परियोजना का प्रभाव भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उपलब्ध परियोजना विवरण के अनुसार हिमाचल में करीब 1,498 हेक्टेयर और उत्तराखंड में करीब 1,452 हेक्टेयर क्षेत्र डूब क्षेत्र में आने का अनुमान है। दोनों राज्यों में करीब 17 गांव प्रभावित होने और लगभग 5,500 लोगों के पुनर्वास की आवश्यकता का अनुमान लगाया गया है। हिमाचल में करीब आठ गांव और लगभग 2,092 लोगों के प्रभावित होने की बात परियोजना दस्तावेजों में सामने आती है। ऐसे में पुनर्वास और प्रभावित परिवारों के हित भी परियोजना के महत्वपूर्ण पहलुओं में शामिल होंगे।
किशाऊ बांध परियोजना का अनुमानित आकार करीब 15 हजार करोड़ रुपये बताया जा रहा है। परियोजना पूरी होने के बाद ऊपरी यमुना बेसिन के कई राज्यों की पानी संबंधी जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलने की उम्मीद है। हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान और अन्य संबंधित क्षेत्रों को परियोजना से जल लाभ मिलेगा। वहीं हिमाचल और उत्तराखंड के लिए बिजली घटक महत्वपूर्ण रहेगा।
किशाऊ परियोजना की विशालता का अंदाजा इसकी प्रस्तावित ऊंचाई से लगाया जा सकता है। करीब 236 मीटर ऊंचा बांध हिमाचल और उत्तराखंड की सीमा पर एक बड़ी जल संरचना के रूप में विकसित होगा। परियोजना से सालाना बड़ी मात्रा में बिजली उत्पादन का अनुमान है और जल भंडारण के जरिए कई राज्यों की दीर्घकालिक जल जरूरतों को सहारा देने की योजना है।
किशाऊ परियोजना हिमाचल के लिए इसलिए खास है क्योंकि यह केवल एक बहुउद्देशीय बांध या जलविद्युत परियोजना नहीं रह गई है। राज्य सरकार इसे अपने आर्थिक हितों को सुरक्षित करने के अवसर के तौर पर भी देख रही है। यदि तय व्यवस्था प्रभावी रूप से लागू होती है तो हिमाचल को परियोजना से हर साल करीब 600 करोड़ रुपये के बराबर लाभ मिलने की उम्मीद है। ऐसे में आर्थिक संकट और सीमित संसाधनों से जूझ रहे राज्य के लिए यह समझौता आने वाले वर्षों में अतिरिक्त वित्तीय लाभ का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है।