#यूटिलिटी
September 6, 2026
हिमाचल में गलत चालान कटने पर कोर्ट के चक्कर खत्म, फोन से कर सकेंगे शिकायत- जानें नया सिस्टम
फैसले से वाहन चालकों को मिली राहत
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मंडी। हिमाचल प्रदेश की जनता के लिए रहता भरी खबर है। अगर आपकी गाड़ी का ट्रैफिक चालान कट गया है- तो अब उसे भरने के लिए कोर्ट या सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने और लंबी कतारों में खड़े होने की जरूरत नहीं होगी।
परिवहन विभाग और यातायात पुलिस ने चालान प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक और पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटल व्यवस्था को बढ़ावा दिया है। इसके तहत वाहन चालक अब घर बैठे अपने मोबाइल फोन से नेक्स्ट जेन एम परिवहन एप के माध्यम से चालान की राशि जमा कर सकेंगे।
इस व्यवस्था का एक अहम पहलू यह भी है कि अगर किसी वाहन चालक को लगता है कि उसका चालान गलत तरीके से काटा गया है- तो उसके पास अपनी आपत्ति दर्ज कराने का विकल्प रहेगा। इसके लिए तय समय सीमा के भीतर एप के माध्यम से शिकायत दर्ज की जा सकेगी।
नई व्यवस्था में वाहन मालिकों को गलत चालान के खिलाफ शिकायत करने के लिए 45 दिन का समय दिया गया है। अगर किसी चालक को लगता है कि तकनीकी गड़बड़ी, गलत जानकारी या किसी अन्य वजह से उसका चालान गलत काटा गया है- तो वह चालान कटने की तारीख से 45 दिनों के भीतर नेक्स्ट जेन एम परिवहन एप के जरिए अपनी शिकायत दर्ज कर सकता है।
इससे वाहन चालकों को अपनी आपत्ति दर्ज कराने के लिए बार-बार संबंधित कार्यालयों में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। डिजिटल माध्यम से शिकायत दर्ज होने के बाद मामला आगे जांच के लिए भेजा जाएगा।
वाहन चालक की ओर से शिकायत दर्ज किए जाने के बाद पुलिस विभाग की एक विशेष कमेटी मामले की जांच करेगी। कमेटी शिकायत में दिए गए तथ्यों और चालान से संबंधित रिकॉर्ड की जांच करने के बाद यह तय करेगी कि चालान सही तरीके से काटा गया था या नहीं।
अगर जांच में वाहन चालक की शिकायत सही पाई जाती है और यह सामने आता है कि चालान गलत तरीके से जारी हुआ था, तो उसे रद्द कर दिया जाएगा। इससे उन वाहन मालिकों को राहत मिलेगी, जिन्हें किसी गलती या तकनीकी समस्या के कारण अनावश्यक रूप से चालान का सामना करना पड़ा हो।
वहीं, अगर पुलिस की विशेष कमेटी जांच के बाद वाहन चालक की शिकायत को सही नहीं मानती और चालान को वैध पाती है, तो चालक को जुर्माने की राशि जमा करनी होगी। कमेटी के फैसले के बाद वाहन चालक को 30 दिनों के अंदर चालान की जुर्माना राशि जमा करना अनिवार्य होगा। यानी शिकायत दर्ज करने का मतलब यह नहीं होगा कि चालान अपने आप खत्म हो जाएगा। जांच में चालान सही पाए जाने पर निर्धारित समय के भीतर जुर्माना भरना ही होगा।
अगर वाहन चालक पुलिस की विशेष कमेटी के फैसले से संतुष्ट नहीं है और उसे लगता है कि उसके मामले में सही निर्णय नहीं लिया गया, तो वह न्यायालय का दरवाजा भी खटखटा सकता है। हालांकि, अदालत में मामला ले जाने से पहले नई व्यवस्था के तहत एक महत्वपूर्ण शर्त रखी गई है। वाहन चालक को कुल जुर्माना राशि का 50 प्रतिशत हिस्सा अग्रिम रूप से जमा करना होगा।
निर्धारित 50 प्रतिशत राशि जमा होने के बाद ही वाहन चालक के मामले को अदालत के समक्ष सुनवाई के लिए ले जाया जाएगा। इस प्रावधान का उद्देश्य चालान विवादों को पहले विभागीय स्तर पर निपटाने और केवल गंभीर या विवादित मामलों को न्यायालय तक पहुंचाना है। इस पूरी प्रक्रिया से वाहन चालकों को एक तरफ ऑनलाइन सुविधा मिलेगी, वहीं गलत चालान के खिलाफ अपनी बात रखने के लिए एक औपचारिक प्रक्रिया भी उपलब्ध होगी।
चालान प्रक्रिया के डिजिटल होने से वाहन चालकों के लिए सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि उन्हें सामान्य चालान भुगतान के लिए कार्यालयों या कोर्ट में जाकर समय खर्च नहीं करना पड़ेगा। मोबाइल के माध्यम से भुगतान और शिकायत की सुविधा मिलने से प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक आसान हो सकती है।
वहीं, गलत चालान के मामलों में 45 दिन की शिकायत अवधि और उसके बाद जांच के लिए विशेष कमेटी की व्यवस्था वाहन मालिकों को अपनी बात रखने का अवसर देती है। हालांकि, चालान को चुनौती देने वाले वाहन चालकों को तय समयसीमा का विशेष ध्यान रखना होगा।