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September 12, 2026
हिमाचल में फिर बिगड़ेगा मौसम! अगले छह दिन मानसून दिखा सकता है रौद्र रूप, अलर्ट पर कई जिला
18 सितंबर तक प्रदेश में भारी बारिश का अलर्ट
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में मानसून एक बार फिर तेवर बदलता नजर आ रहा है। शनिवार को राजधानी शिमला में सुबह मौसम साफ रहा और धूप खिली, लेकिन दोपहर होते-होते बारिश ने दस्तक दे दी। ऊना समेत प्रदेश के कई हिस्सों में तेज हवाओं के साथ हुई बारिश ने लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत दी। इसी बीच मौसम विभाग ने अगले कई दिनों तक प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान जताया है।
12 से 17 सितंबर तक प्रदेश के कई भागों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। 18 सितंबर को भी कुछ स्थानों पर बारिश हो सकती है। ऐसे में पहले से प्राकृतिक आपदाओं का सामना कर रहे हिमाचल में मौसम के एक बार फिर करवट लेने से लोगों की चिंता बढ़ गई है।
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लगातार बारिश के बीच पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और अचानक मलबा आने का खतरा बना हुआ है। पिछले कुछ दिनों में कई स्थानों पर सड़कें बाधित हुई हैं। नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने और पहाड़ी ढलानों के कमजोर होने के कारण संवेदनशील क्षेत्रों में लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के बीच मंडी, कुल्लू, कांगड़ा समेत कई जिलों में बारिश का असर देखने को मिल सकता है। खासकर उन क्षेत्रों में खतरा अधिक है, जहां पहले से भूस्खलन और सड़क धंसने की घटनाएं हो चुकी हैं।
रामपुर बुशहर उपमंडल की फांचा पंचायत में भारी भूस्खलन ने वन क्षेत्र को भी अपनी चपेट में ले लिया। नंती और फांचा कंडे के बीच वन विभाग की जमीन पर हुए भूस्खलन से करीब 50 पेड़ भरभराकर नीचे गिर गए। स्थानीय लोगों के अनुसार यह घटना करीब तीन दिन पहले हुई थी, लेकिन इसका वीडियो अब सामने आया है।
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बताया जा रहा है कि इस क्षेत्र में पिछले कई वर्षों से बरसात के दौरान धीरे-धीरे भूस्खलन होता रहा है। इस बार भूस्खलन का दायरा काफी बढ़ गया और जंगल का एक बड़ा हिस्सा इसकी चपेट में आ गया। फांचा पंचायत के उपप्रधान सुभाष नेगी ने वन विभाग से इस संवेदनशील स्थान पर सुरक्षा और रोकथाम के पुख्ता इंतजाम करने की मांग की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में वन क्षेत्र को और नुकसान हो सकता है।
कुल्लू जिले में लारजी-सैंज संपर्क मार्ग पर स्थित पागल नाला भी शुक्रवार रात हुई भारी बारिश के बाद उफान पर आ गया। तेज बारिश के बाद नाले का बहाव अचानक बढ़ा और पानी के साथ भारी मात्रा में मलबा सड़क पर आ गया। मलबा आने से मार्ग करीब छह घंटे तक पूरी तरह बंद रहा। सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और सैकड़ों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
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इस मानसून सीजन में हिमाचल प्रदेश को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। 30 जून से 12 सितंबर तक आपदा से जुड़ी घटनाओं में 298 लोगों की मौत हुई है, जबकि 521 लोग घायल हुए हैं। मृतकों में बड़ी संख्या सड़क हादसों में जान गंवाने वालों की है।
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इस अवधि में 40 पक्के और 89 कच्चे मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं, जबकि 502 मकानों को आंशिक नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा 17 दुकानों और 470 गोशालाओं को भी नुकसान हुआ है। प्रदेश में मानसून के दौरान अब तक हुए नुकसान का आंकड़ा 1,68,373.87 लाख रुपये तक पहुंच चुका है।
बारिश और भूस्खलन के चलते प्रदेश में सड़क संपर्क भी प्रभावित है। राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र के अनुसार शनिवार शाम तक प्रदेश में 63 सड़कें बंद थीं, जबकि 21 बिजली ट्रांसफार्मर भी प्रभावित हुए। सबसे अधिक सड़कें मंडी, कुल्लू और कांगड़ा जिलों में प्रभावित बताई गई हैं। ऐसे में आगामी दिनों में बारिश का दौर बढ़ने पर सड़क और बिजली व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका है।