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September 13, 2026
हिमाचल में अगले 5 दिन तक खराब रहेगा मौसम : गरज-चमक के साथ होगी बारिश, रहें सतर्क
पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा करते समय रहें सतर्क, नदी-नालों से भी रहें दूर
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में मानसून की सक्रियता फिलहाल पूरी तरह खत्म होती नजर नहीं आ रही है। प्रदेश के कई हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक मौसम करवट लेता रहेगा और अलग-अलग क्षेत्रों में बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है।
मौसम विभाग ने 18 सितंबर तक राज्य के मैदानी, निचले और मध्य पहाड़ी क्षेत्रों में कहीं-कहीं बारिश होने का पूर्वानुमान जारी किया है। इस दौरान कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है, जबकि ऊंचाई वाले इलाकों में भी छिटपुट बारिश देखने को मिल सकती है।
मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में बारिश का प्रभाव पूरे प्रदेश में एक जैसा नहीं रहेगा। कुछ क्षेत्रों में मौसम साफ रह सकता है, जबकि आसपास के इलाकों में अचानक बादल घिरने के बाद बारिश हो सकती है।
फिलहाल अगले सात दिनों के दौरान प्रदेश के किसी भी जिले के लिए विशेष मौसम चेतावनी जारी नहीं की गई है। ऐसे में भारी बारिश जैसी स्थिति को लेकर कोई व्यापक अलर्ट नहीं है। मगर स्थानीय स्तर पर होने वाली बारिश और गरज-चमक को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की जरूरत रहेगी।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, 13 से 17 सितंबर तक प्रदेश के मैदानी और निचले पहाड़ी इलाकों में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। मध्यवर्ती पहाड़ी क्षेत्रों में भी मौसम पूरी तरह शुष्क रहने की उम्मीद नहीं है और यहां भी अलग-अलग स्थानों पर बारिश होने के आसार हैं। वहीं, ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों में इस अवधि के दौरान एक-दो स्थानों पर हल्की बारिश दर्ज की जा सकती है।
18 सितंबर को भी मौसम में पूरी तरह बदलाव की उम्मीद नहीं है। इस दिन मैदानी और मध्य पहाड़ी क्षेत्रों में कुछ एक स्थानों पर हल्की बारिश हो सकती है। हालांकि, ऊंचे पहाड़ी इलाकों में मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहने का अनुमान है। इसका मतलब है कि प्रदेश में बारिश की गतिविधियां धीरे-धीरे सीमित हो सकती हैं, लेकिन अभी पूरी तरह थमने की संभावना नहीं है।
बारिश के साथ कुछ इलाकों में मेघ गर्जन और बिजली चमकने की स्थिति भी बन सकती है। मौसम विभाग ने 12 से 17 सितंबर के बीच मैदानी, निचले और मध्य पहाड़ी क्षेत्रों में अलग-अलग स्थानों पर गरज-चमक की संभावना जताई है। पहाड़ी राज्य होने के कारण मौसम में अचानक बदलाव देखने को मिल सकता है।
ऐसे में बारिश या आंधी-गरज के दौरान लोगों को खुले स्थानों पर जाने से बचना चाहिए। खासकर ऊंचे क्षेत्रों, खेतों, नदी-नालों और अन्य खुले इलाकों में रहने वाले लोगों को मौसम बिगड़ने पर अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। बिजली चमकने के दौरान पेड़ों के नीचे खड़े होने से भी बचने की सलाह दी जाती है।
मौसम विभाग की जिला-वार चेतावनी के अनुसार 12 से 16 सितंबर के बीच प्रदेश के किसी भी जिले के लिए विशेष मौसम चेतावनी नहीं दी गई है। ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर, चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, शिमला, सोलन, सिरमौर, किन्नौर और लाहौल-स्पीति सभी जिलों के लिए इस अवधि में कोई विशेष अलर्ट नहीं है।
हालांकि इसका यह अर्थ नहीं है कि पूरे प्रदेश में मौसम पूरी तरह साफ रहेगा। विभाग ने अलग-अलग स्थानों पर बारिश की संभावना पहले ही जताई है। इसलिए स्थानीय स्तर पर अचानक होने वाली बारिश को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। खासकर पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम का मिजाज तेजी से बदलने के कारण लोगों को यात्रा के दौरान मौसम की स्थिति पर नजर रखनी होगी।
प्रदेश में पिछले 24 घंटों के दौरान भी कई जगहों पर बारिश दर्ज की गई। धर्मशाला में सबसे अधिक 9 सेंटीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई। इसके अलावा कांगड़ा एयरपोर्ट और कुफरी में 7-7 सेंटीमीटर बारिश हुई। हरिपुर और जोगिंदरनगर में 5-5 सेंटीमीटर वर्षा दर्ज की गई, जबकि पालमपुर में 4 सेंटीमीटर बारिश रिकॉर्ड हुई।
बारिश के कारण कई इलाकों में मौसम सुहावना होने के साथ तापमान में भी ठंडक महसूस की गई। रविवार को राजधानी शिमला में भी गरज के साथ बारिश हुई। बारिश के बाद शहर के मौसम में ठंडक बढ़ गई और लोगों को तापमान में बदलाव महसूस हुआ।
तापमान को लेकर मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले तीन से चार दिनों में न्यूनतम तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। यानी रात के तापमान में फिलहाल बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को नहीं मिलेगा। वहीं अधिकतम तापमान अगले 24 घंटे तक सामान्य के आसपास बना रह सकता है।
इसके बाद अगले तीन से चार दिनों के दौरान अधिकतम तापमान में धीरे-धीरे करीब 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आने की संभावना है। बारिश और तापमान में कमी के चलते प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम पहले की तुलना में अधिक ठंडा महसूस हो सकता है।
प्रदेश में फिलहाल किसी बड़े मौसम अलर्ट के नहीं होने के बावजूद बारिश के दौरान पहाड़ी सड़कों पर यात्रा करने वाले लोगों को सावधानी बरतनी होगी। लगातार या अचानक होने वाली बारिश के कारण कहीं-कहीं सड़क पर फिसलन बढ़ सकती है। पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश के दौरान भूस्खलन अथवा पत्थर गिरने जैसी स्थानीय घटनाओं की आशंका से भी पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता।