शिमला। हिमाचल प्रदेश में मौसम ने फिलहाल करवट ली हुई है। अगले तीन दिन प्रदेशभर में आसमान पूरी तरह साफ रहने का पूर्वानुमान है, जिससे तापमान में और बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है।

दिन के समय गर्मी का एहसास

विदित रहे कि, फरवरी के आखिरी हफ्ते में आमतौर पर हल्की ठंड बनी रहती है, लेकिन इस बार कई शहरों में अधिकतम और न्यूनतम तापमान सामान्य से ऊपर चल रहा है। दिन के समय धूप तेज होने से लोगों को मार्च जैसी गर्मी का एहसास होने लगा है। सुबह-शाम हल्की ठंड जरूर है, मगर दोपहर में जैकेट उतारनी पड़ रही है।

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बर्फ के बिना सर्दी फीकी

राजधानी शिमला, पर्यटन नगरी मनाली, धर्मशाला, सोलन और ऊना समेत अधिकांश शहरों में तापमान सामान्य से अधिक दर्ज किया जा रहा है। मैदानी जिलों में दोपहर के समय हल्की गर्म हवाओं जैसा असर दिखने लगा है, जबकि मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी बर्फ के बिना सर्दी फीकी पड़ गई है।

पर्यटन कारोबार पर असर

मौसम साफ रहने से पर्यटन कारोबार को राहत मिली है। होटल कारोबारियों का कहना है कि साफ आसमान और खुली धूप के कारण सैलानी घूमने-फिरने का भरपूर आनंद ले पा रहे हैं। बर्फबारी न होने से भले ही स्नो-टूरिज्म प्रभावित हुआ हो, लेकिन पारिवारिक पर्यटक और वीकेंड ट्रैवलर अच्छी संख्या में पहुंच रहे हैं।

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कई पर्यटकों में निराशा

हालांकि, बर्फ देखने की उम्मीद लेकर आने वाले कई पर्यटक निराश भी लौट रहे हैं। खासकर मनाली और लाहौल की ओर जाने वाले पर्यटकों को इस बार अपेक्षित बर्फबारी नहीं मिल पाई। पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हल्की बर्फबारी होती है तो फिर से सैलानियों की संख्या बढ़ सकती है।

कब होगी बारिश-बर्फबारी?

मौसम विभाग के अनुसार, 27 फरवरी से एक ताजा वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय होने जा रहा है। इसके प्रभाव से 27 और 28 फरवरी को ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हल्की बारिश और बर्फबारी की संभावना है। चंबा और लाहौल स्पीति जिलों में मौसम खराब रहने का अनुमान है, जबकि अन्य हिस्सों में मौसम मुख्य रूप से साफ ही रहेगा।

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किसानों-बागवानों की बढ़ी चिंता

इस वर्ष सर्दियों में वर्षा की भारी कमी दर्ज की गई है। विंटर सीजन में सामान्य से करीब 37 प्रतिशत कम और फरवरी में तो लगभग 81 प्रतिशत कम बारिश हुई है। यह स्थिति किसानों और बागवानों के लिए चिंता का कारण बनती जा रही है।

 

सेब उत्पादक क्षेत्रों में पर्याप्त “चिलिंग आवर्स” न मिलने से आगामी फसल पर असर पड़ने की आशंका है। गेहूं और सरसों की फसलों को भी नमी की आवश्यकता है। कई इलाकों में किसान सिंचाई के सहारे फसल बचाने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे लागत बढ़ रही है।

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पानी के स्रोतों पर असर

बागवानी विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मार्च में भी पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो सेब, खुबानी और प्लम की पैदावार प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा, कम बर्फबारी का असर गर्मियों में पानी के स्रोतों पर भी पड़ सकता है।

तीन दिन तक साफ रहेगा मौसम

फिलहाल तीन दिन साफ मौसम के कारण तापमान में और बढ़ोतरी के संकेत हैं। दोपहर की गर्मी लोगों को अभी से गर्मियों का अहसास करा रही है। हालांकि महीने के अंत में संभावित हल्की बारिश-बर्फबारी से मौसम में थोड़ी ठंडक लौट सकती है।

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आसमान की ओर टकटकी

पर्यटन कारोबारियों को जहां हल्की बर्फबारी की उम्मीद है, वहीं किसान-बागवान आसमान की ओर टकटकी लगाए अच्छी वर्षा की प्रार्थना कर रहे हैं। आने वाले दिनों का मौसम ही तय करेगा कि यह बदलाव राहत लेकर आएगा या चिंता और गहराएगी।

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