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February 23, 2026
हिमाचल: टैक्सी की उम्र 15 साल... परमिट 12 साल का.. केंद्र की मोदी सरकार ने बदल दी परंपरा; जानें
1 अप्रैल से बदल जाएगी टैक्सी ऑपरेटरों की किस्मत
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शिमला। पर्यटन प्रधान राज्य हिमाचल प्रदेश के हजारों टैक्सी ऑपरेटरों के लिए केंद्र की मोदी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। केंद्र सरकार ने देश भर में टैक्सी परमिट की वैधता अवधि में संशोधन करते हुए इसे 12 वर्ष से बढ़ाकर 15 वर्ष कर दिया है। इस बदलाव से हिमाचल प्रदेश के करीब 70 हजार टैक्सी ऑपरेटरों को सीधा लाभ मिलेगा।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार नया प्रावधान आगामी 1 अप्रैल से पूरे देश में लागू होगा। अब टैक्सी वाहन की अधिकतम आयु और उसके परमिट की वैधता समान रूप से 15 वर्ष होगी। इससे पहले वाहन की आयु 15 वर्ष थी, जबकि परमिट केवल 12 वर्ष के लिए मिलता था, जिससे ऑपरेटरों को नुकसान उठाना पड़ता था।
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परमिट अवधि में तीन वर्ष की बढ़ोतरी से टैक्सी मालिकों को अपनी गाड़ियों का व्यावसायिक उपयोग अधिक समय तक करने का अवसर मिलेगा। इससे उनकी आमदनी में इजाफा होगा और अतिरिक्त आर्थिक बोझ कम होगा। खासकर उन ऑपरेटरों को राहत मिलेगी, जिन्होंने महंगी गाड़ियां बैंक लोन पर खरीदी हैं।
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प्रदेश में कई टैक्सी मालिक 20 से 30 लाख रुपये तक की गाड़ियां फाइनेंस पर लेते हैं। ऋण की किश्तें चुकाने में 8 से 10 वर्ष लग जाते हैं। पहले जब असली कमाई का समय आता था, तब परमिट समाप्त हो जाता था। अब नई व्यवस्था से ऑपरेटरों को अतिरिक्त तीन साल का समय मिलेगाए जिससे उन्हें बेहतर रिटर्न मिल सकेगा।
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हिमाचल प्रदेश में पंजीकृत कुल वाहनों की संख्या 24 लाख से अधिक है, जिनमें व्यावसायिक टैक्सियों की हिस्सेदारी अहम है। पर्यटन राज्य होने के कारण टैक्सी सेवाएं यहां की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती हैं। परमिट की अवधि बढ़ने से न केवल टैक्सी कारोबार को मजबूती मिलेगी, बल्कि पर्यटन क्षेत्र को भी सकारात्मक प्रभाव मिलेगा।
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राज्य सरकार की ओर से भी इस मुद्दे को केंद्र के समक्ष उठाया जाता रहा था। अब केंद्र सरकार द्वारा नियमों में संशोधन किए जाने के बाद टैक्सी मालिकों ने राहत की सांस ली है। इस फैसले को प्रदेश में स्वरोजगार से जुड़े युवाओं और टैक्सी यूनियनों ने स्वागतयोग्य कदम बताया है। उनका मानना है कि परमिट संबंधी इस बदलाव से रोजगार के अवसर मजबूत होंगे और आर्थिक स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा।