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February 23, 2026

हिमाचल : रेहड़ी की आड़ में चला रहा था चिट्टे का धंधा, पुलिस ने बस अड्डे से दबोचा तस्कर

सरवरी बस अड्डे के पास 12.67 ग्राम चिट्टा बरामद

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कुल्लू। हिमाचल प्रदेश की शांत वादियों में अब एक और खामोश जंग चल रही है- नशे के खिलाफ। जिस धरती को युवा ऊर्जा और पर्यटन की पहचान माना जाता था, वहीं अब चिट्टे की लत कई घरों की नींद उड़ा रही है। इसी बीच कुल्लू से आई ताजा कार्रवाई ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर हिमाचल का युवा किस दिशा में जा रहा है?

गश्त के दौरान पकड़ा गया आरोपी

जिला कुल्लू पुलिस की टीम सरवरी बस अड्डे के पास नियमित गश्त पर थी। इसी दौरान एक रेहड़ी लगाने वाले युवक की गतिविधियां संदिग्ध लगीं। शक के आधार पर जब तलाशी ली गई तो उसके कब्जे से 12.67 ग्राम चिट्टा बरामद हुआ।

 

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मंडी का आरोपी सलाखों के पीछे

आरोपी की पहचान प्रवीण कुमार पुत्र रौनकी राम निवासी गांव पंजागना, तहसील जोगिंद्रनगर, जिला मंडी के रूप में हुई है। पुलिस ने मौके पर ही उसे गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई की पुष्टि मदन लाल, एसपी कुल्लू ने की है। उन्होंने बताया कि आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है और यह जांच की जा रही है कि वह नशा कहां से लाया और किसे सप्लाई करने वाला था।

 

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रेहड़ी की आड़ में तस्करी

पुलिस के अनुसार आरोपी रेहड़ी लगाकर रोजी-रोटी कमाने का दिखावा कर रहा था, लेकिन उसी आड़ में कथित रूप से नशे का धंधा चला रहा था। बस अड्डे जैसे भीड़भाड़ वाले इलाके में इस तरह की गतिविधि ने पुलिस की सतर्कता पर भी मुहर लगा दी है।

 

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कुल्लू जैसे पर्यटन क्षेत्र में नशे की बढ़ती मौजूदगी चिंता का विषय है। बीते कुछ वर्षों में चिट्टे के मामलों में तेजी देखी गई है, जिनमें कई बार युवा और छात्र भी शामिल पाए गए हैं।

हिमाचल का युवा और नशे का जाल

हिमाचल प्रदेश में नशे का फैलता नेटवर्क अब सामाजिक चुनौती बन चुका है। सीमावर्ती राज्यों से आने वाली सप्लाई, बेरोजगारी, और तेज रफ्तार जिंदगी की चाहत ने कुछ युवाओं को गलत राह पर धकेला है।

 

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पुलिस ने चलाया है ताबड़तोड़ अभियान

विशेषज्ञ मानते हैं कि चिट्टा जैसी घातक ड्रग्स कम समय में लत लगा देती हैं और परिवारों को आर्थिक व मानसिक रूप से तोड़ देती हैं। कई मामलों में युवा खुद उपभोक्ता से सप्लायर बन जाते हैं। सरकार और पुलिस लगातार अभियान चला रही है, लेकिन समाज और परिवार की भूमिका भी उतनी ही अहम है। जरूरत है जागरूकता, कड़ी निगरानी और युवाओं को सकारात्मक दिशा देने की।

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