शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में हाल ही में मेगा डॉग वैक्सीनेशन ड्राइव की शुरुआत की गई है। ये ड्राइव 15 अगस्त को शुरू हुई थी जो 29 अगस्त तक चलेगी। इस ड्राइव के जरिए 34 वार्डों के 4000 कुत्तों को रेबीज का टीका लगाया जाएगा। आइए जानते हैं रेबीज क्या होती है और इसकी वैक्सीनेशन क्यों जरूरी है।

वायरस से फैलती है बीमारी

कुत्ते की लार में एक ऐसा वायरस मौजूद होता है जो रेबीज जैसी खतरनाक बीमारी का कारण होता है। कुत्ते के काटने या खरोंच के जरिए ये वायरस कुत्ते से इंसान में फैलता है। ये बीमारी इतनी खतरनाक है कि ये लगभग हर बार जानलेवा साबित होती है।

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महीनों बाद दिखते हैं लक्षण

चिंता की बात ये है कि इस बीमारी के लक्षण कई दिन या कई महीनों बाद दिखता है। ये इस बात पर निर्भर होता है कि कुत्ते का काटा हुआ घाव कहां है और कितना गहरा है। सबसे पहले इंसान में शुरुआती लक्षण दिखते हैं, फिर कुछ दिन बाद गंभीर लक्षण दिखते हैं।

रेबीज के शुरुआती लक्षण (कुछ दिन तक)

  • बुखार
  • सिरदर्द
  • थकान
  • कमजोरी
  • घाव वाली जगह पर दर्द
  • खुजली महसूस होना

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गंभीर लक्षण (दिमाग में पहुंचा वायरस)

  • अचानक बेचैनी
  • घबराहट या भ्रम की स्थिति
  • असामान्य आक्रामक व्यवहार
  • पानी से डर लगना (हाइड्रोफोबिया)
  • हवा के झोंके से डर लगना
  • निगलने में कठिनाई
  • अत्यधिक लार निकलना
  • मांसपेशियों में ऐंठन और लकवा

रेबीज से कैसे करें बचाव 

अगर जानवर ने आपको काट लिया है तो सबसे पहले घाव को धोएं। घाव या खरोंच को तुरंत साबुन और पानी से 15 मिनट तक अच्छे से धोएं। ये वायरस को फैलने से रोकने में मदद करेगा।

 

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टीकाकरण करवाना जरूरी

इसके बाद तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। डॉक्टर घाव की गंभीरता के हिसाब से एंटी-रेबीज वैक्सीन और रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन के इंजेक्शन देंगे। टीकाकरण वायरस के खिलाफ तुरंत सुरक्षा देता है।

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आवारा जानवर से रहें दूर

अपने पालतू कुत्ते को रेबीज का टीका जरूर लगवाएं। ये इस बीमारी को फैलने से रोकने का सबसे अच्छा तरीका है। ध्यान देने वाली बात है कि आवारा या अनजान जानवरों के संपर्क में आने से बचें।