#यूटिलिटी

August 16, 2025

हिमाचल विधानसभा में सबको रहता है शून्य काल का इंतजार, जानिए ऐसा क्या होता है खास ?

संसद की तर्ज पर हिमाचल में हुई थी शुरुआत

शेयर करें:

Himachal Vidhansabha

शिमला। हिमाचल प्रदेश का विधानसभा सत्र 18 अगस्त से शुरू होने वाला है। 2024 के विधानसभा सत्र में संसद की तर्ज पर पहली बार हिमाचल विधानसभा में शून्य काल की शुरुआत हुई थी। जीरो आवर के जरिए जरूरी मुद्दों को लेकर सरकार पर दबाव डाला जा सकता है। आइए आज जानते हैं कि ये शून्य काल होता क्या है।

क्या होता है शून्य काल ?

जीरो आवर यानी शून्य काल संसद या विधानसभा का एक जरूरी हिस्सा है। इसके जरिए सांसदों या विधायकों को जनहित के जरूरी मुद्दों को तत्काल उठाने का मौका मिलता है। आमतौर पर शून्य काल की कार्यवाही प्रश्न काल के बाद शुरू होती है। इसका समय दिन के नियमित एजेंडा शुरू होने से पहले तक ही होता है।

यह भी पढ़ें : हिमाचल यूथ कांग्रेस में घमासान: राजा और सुक्खू गुट आमने-सामने, भूख हड़ताल तक पहुंचा मुद्दा

पहले नहीं देना होता नोटिस

आमतौर पर सांसदों और विधायकों के लिए शून्यकाल एक महत्वपूर्ण मंच है। इस काल में सांसद और विधायक बिना 10 दिन के नोटिस के जनता से जुड़े मुद्दे तत्काल उठा सकते हैं। जिस तरह प्रश्न काल में सवाल पूछने के लिए कई दिन पहले नोटिस देना पड़ता है, शून्य काल के लिए ये लागू नहीं होता। शून्य काल के लिए उसी दिन नोटिस देना होता है।  

मंत्री का जवाब अनिवार्य नहीं

नोटिस में विधायक को मुद्दे का विषय स्पष्ट करना होता है। फिर स्पीकर तय करते हैं कि कौन सा मुद्दा उठाया जाएगा। जीरो आवर में उठाए गए मामले पर संबंधित मंत्री जवाब दे सकते हैं। हालांकि जीरो आवर में मंत्रियों का जवाब देना अनिवार्य नहीं होता जैसा प्रश्नकाल में होता है। जीरो आवर के जरिए उन मुद्दों को उठाने का मौका मिलता है जो जनता के लिए महत्वपूर्ण हैं जैसे प्राकृतिक आपदा और आतंकवाद।

 

यह भी पढ़ें : मणिमहेश यात्रा का आगाज : आज होगा शाही स्नान, गंदगी फैलाने पर सख्ती- कई नियम बदले

नियम पुस्तिका में नहीं है जिक्र

भारतीय संसद में शून्य काल की शुरुआत 1962 में हुई थी। इसका जिक्र संसद की नियम पुस्तिका में भी नहीं है। इसी की तर्ज पर हिमाचल विधानसभा में भी 2024 से इसकी शुरुआत हुई। इसे जीरो आवर इसलिए कहते हैं क्योंकि ये दोपहर 12 बजे शुरू होता है। ये प्रश्नकाल के बाद और नियमित कार्यवाही शुरू होने से पहले का समय है।

नियंत्रण के लिए बनाए गए नियम

जीरो आवर की समय सीमा कम होती है इसलिए सांसदों और विधायकों को बोलने के लिए कम समय मिलता है। हालांकि स्पीकर इस समय को बढ़ा भी सकते हैं। संसदीय भाषा के अनुसार जीरो आवर वो समय है जब सांसद या विधायक सरकार का ध्यान तत्काल मुद्दों की तरफ खींचते हैं। 9वें लोकसभा स्पीकर रबी रे ने शून्य काल को व्यवस्थित किया था। उन्होंने ही इसके नियंत्रण के लिए नियम बनाए थे।

यह भी पढ़ें : जयराम ने सुक्खू सरकार पर जड़े आरोप,बोले- मंडी में BJP के विधायक, इसलिए नहीं मिली मदद

हिमाचल विधानसभा में शून्य काल

साल 2024 में लोकसभा की तर्ज पर हिमाचल विधानसभा में भी शून्य काल शुरू हुआ था। इस काल की अवधि आधे घंटे की रही थी। सदन की कार्यवाही शुरू होने से एक घंटा पहले इससे जुड़े प्रस्ताव दिए गए थे। इस दौरान बीते एक साल में सदन में उठाए गए मुद्दों को शून्य काल में उठाने की इजाजत नहीं थी। सवालों की सार्थकता पर ही सवालों का चयन किया गया था।

ट्रेंडिंग न्यूज़
LAUGH CLUB
संबंधित आलेख