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August 16, 2025
हिमाचल में है चंडीगढ़ सेक्टर-13, इंदिरा गांधी के एक वादे के चलते पड़ा था नाम- जानें रोचक इतिहास
नहीं पूरा हुआ 33 परिवारों से किया वादा
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लाहौल-स्पीति। हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले में एक गांव का नाम चंडीगढ़ है। इसका पूरा नाम चंडीगढ़ सेक्टर-13 है। ये काजा उपमंडल से करीब 33 किलोमीटर दूर है। ये जगह असल चंडीगढ़ की तरह साफ और हरभरी है। आखिर हिमाचल के गांव का नाम चंडीगढ़ सेक्टर-13 कैसे पड़ा, आज यही जानेंगे।
स्पीति घाटी का एक गांव ऐसा है जो यहां आने वाले हर पर्यटक के लिए किसी आकर्षण से कम नहीं है। इस गांव का नाम सभी को सोचने पर मजबूर कर देता है। दरअसल जब 80 के दशक में चीन सीमा पर विवाद बढ़ गया तो बॉर्डर से सटे कौरिक गांव के लोगों को वहां से हटना पड़ा। तत्कालीन प्रधानमंत्री ने बॉर्डर का दौरा कर गांव के 33 परिवारों को एक वादा किया। ये वादा था कि उन्हें चंडीगढ़ में बसाया जाएगा लेकिन ये वादा कभी पूरा नहीं हुआ।
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आर्मी को कौरिक गांव के लोगों को बॉर्डर से करीब 60 किलोमीटर पीछे जमीन देकर शिफ्ट करना पड़ा। PWD के इंजीनियर ने ही इस गांव का नाम चंडीगढ़ रखा। सरकारी रिकॉर्ड में भी इस गांव का नाम चंडीगढ़ ही है। जब ग्रामीणों को असली चंडीगढ़ में नहीं शिफ्ट किया गया तो उन्होंने गांव का नाम चंडीगढ़ सेक्टर-13 रख दिया। बता दें कि असली चंडीगढ़ में सेक्टर 13 है ही नहीं।
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जानकारी के मुताबिक चंडीगढ़ को बनाने वाले ली कार्बूजिए ने 13 सेक्टर बनाया ही नहीं था। वे 13 नंबर को अनलकी मानते थे। इसी वजह से सेक्टर-12 के बाद सीधा सेक्टर-14 बनाया गया। यही वो कारण है जिसकी वजह से गांव वासियों ने विरोध स्वरूप गांव का नाम चंडीगढ़ की बजाय चंडीगढ़ सेक्टर-13 कर दिया।
चंडीगढ़ सेक्टर-13 चारों ओर से पहाड़ों से घिरा है जिसकी खूबसूरती देखते ही बनती है। टूरिस्ट इस गांव को जरूर देखते हैं। बता दें कि चंडीगढ़ सेक्टर-13 के ज्यादातर लोग किसानी करते हैं। सब्जियां उगाकर ही यहां के लोग अपना जीवन यापन करते हैं। गौर करने वाली बात है कि भले ही इस गांव के लोग असली चंडीगढ़ में नहीं बस पाए लेकिन अपने गांव के नाम के चलते वे फेमस जरूर हो गए।