धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिला में मैगी के पैकेट में कीड़े निकलने के मामले में उपभोक्ता आयोग ने बड़ा फैसला सुनाया है। धर्मशाला में जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष हिमांशु मिश्रा, सदस्य आरती सूद और नारायण ठाकुर की अदालत ने मैगी बनाने वाली नेस्ले इंडिया लिमिटेड कंपनी को शिकायतकर्ता को 50 हजार रुपए जुर्माना अदा करने का फैसला सुनाया। 

जिला आयोग ने सुनाया फैसला

इसके अलावा नेस्ले कंपनी को शिकायतकर्ता को मुकद्दमेबाजी के लिए 10 हजार रुपए देने व  50 हजार रुपए उपभोक्ता आयोग के विधिक सहायता फंड में जमा करवाने का फैसला सुनाया है। यह निर्णय उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष हेमांशु मिश्रा, सदस्य आरती सूद व नारायण ठाकुर की खंडपीठ ने सुनाया है।

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सीएसडी कैंटीन से ली थी मैगी

उपभोक्ता आयोग में दर्ज करवाई शिकायत में शिकायतकर्ता पीयूष अवस्थी निवासी थंडोल तहसील पालमपुर जिला कांगड़ा ने बताया कि उसके पिता एयरफोर्स से सेवानिवृत्त हुए हैं। उन्होंने 9 जुलाई 2023 को होल्टा स्थित सेना की सीएसडी कैंटीन से छह पैकेट मैगी के खरीदे थे। मैगी के इन पैकेटों पर एक्सपायरी तिथि जनवरी 2024 दर्शाई गई थी।

मैगी के पैकेट में मिले थे जिंदा कीड़े

उपभोक्ता ने बताया कि जब उन्होंने 25 अगस्त को एक मैगी का पैकेट खोला तो उसमें जिंदा कीड़े निकले। जिसकी शिकायत उन्होंने मेल के माध्यम से नेस्ले इंडिया से की। जिस पर कंपनी की तरफ से उन्हें आश्वासन मिला कि एक प्रतिनिधि शिकायतकर्ता से संपर्क करेगा और  इस विषय पर जांच समिति बनाकर उचित कार्रवाई की जाएगी। 

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शिकायत के बाद भी कंपनी ने नहीं की कार्रवाई

शिकायतकर्ता के अनुसार दो महीने का समय बीतने पर भी जब कंपनी ने कोई कार्रवाई नहीं की तो उन्होंने उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत में पाया गया कि कीड़े युक्त मैगी दी गई थी। सभी पक्षों को सुनने के बाद उपभोक्ता आयोग ने यह निर्णय सुनाया है।

 

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आयोग ने शिकायतकर्ता को शिकायत की तिथि से लेकर उसके समाधान तक 9 फीसदी प्रति वर्ष की दर से ब्याज सहित 14 रुपए देने के आदेश दिए। इसके अलावा शिकायतकर्ता को 50,000 रुपए का मुआवजा और मुकदमेबाजी के लिए 10,000 रुपए देने को कहा।

 

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