शिमला। केंद्र सरकार के ऊर्जा मंत्रालय ने हिमाचल प्रदेश में कुछ हाइड्रो प्रोजेक्ट्स के मामले में पिछली भाजपा सरकार के एसजेवीएन और एनएचपीसी के साथ हुए समझौते में बदलाव करने पर आपत्ति जताते हुए हिमाचल सरकार ने कहा है कि या तो वह ब्याज सहित पैसा लौटाए या फिर पिछले समझौतों की शर्तों को बहाल करे।
केंद्रीय ऊर्जा सचिव पंकज अग्रवाल ने मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना को पत्र लिखा है। पत्र में ऐसा नहीं करने पर हिमाचल सरकार को ब्याज सहित खर्च की गई राशि लौटाने को कहा गया है।
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संशोधन को बताया एकतरफा
पत्र में कहा गया कि समझौतों की शर्तों में बदलाव से लुहरी स्टेज-एक (210 मेगावाट), धौलासिद्ध (66 मेगावाट), सुन्नी बांध (382 मेगावाट) और डुगर (500 मेगावाट) सहित प्रमुख ऊर्जा परियोजनाओं की वित्तीय व्यवहार्यता को खतरा है। इन परियोजनाओं को शुरू में एसजेवीएन (लुहरी स्टेज-एक, धौलासिद्ध और सुन्नी बांध) को बिल्ड, ओन, ऑपरेट और मेंटेन (बीओओएम) मॉडल के तहत और एनएचपीसी (डुगर एचई परियोजना) को बिल्ड, ओन, ऑपरेट और ट्रांसफर (बीओओटी) आधार पर 2019 में हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापनों के अनुसार सौंपा गया था।
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दोबारा समझौता करना चाहती है सरकार
हिमाचल सरकार ने 30 सितंबर 2024 को जारी अधिसूचना में संशोधन कर पहले से सहमत शर्तों में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। ऊर्जा सचिव ने पत्र में लिखा है कि इन शर्तों के संशोधन ने गंभीर चिंताएं पैदा की हैं। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के एक आंतरिक अध्ययन से पता चला है कि रियायतों के बिना परियोजनाएं वित्तीय रूप से अव्यवहारिक हो जाएंगी।
हिमाचल सरकार इन दोनों कंपनियों के साथ दोबारा कार्यान्वयन समझौता करना चाहती है। सरकार का तर्क है कि पूर्व सरकार ने प्रदेश के हितों के खिलाफ जाकर समझौता किया।
