कुल्लू। हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज चुनावों के परिणाम आने के बाद विजयी प्रत्याशियों के बीच उत्साह का माहौल है। जिला कुल्लू में भी चुनावी तस्वीर साफ हो चुकी है और यहां की 14 जिला परिषद सीटों में भाजपा ने 9, कांग्रेस ने 4 तथा एक सीट निर्दलीय उम्मीदवार के खाते में गई है।
राजघराने की बहू जीती चुनाव
हालांकि पूरे जिले में जिस जीत की सबसे अधिक चर्चा हो रही है- वह ज्येष्ठा जिला परिषद वार्ड से निर्दलीय प्रत्याशी विभा सिंह की है। जिन्होंने रिकॉर्ड मतों के साथ शानदार जीत दर्ज कर स्थानीय राजनीति में राजपरिवार के प्रभाव को एक बार फिर साबित कर दिया है।
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विभा को मिले 12,728 मत
ज्येष्ठा जिला परिषद वार्ड से चुनाव लड़ने वाली विभा सिंह को 12,728 मत प्राप्त हुए। जो इस बार कुल्लू जिले के जिला परिषद चुनावों में किसी भी प्रत्याशी को मिले सबसे अधिक वोट हैं।
लोगों ने भरोसे का परिणाम
उनके मुकाबले भाजपा समर्थित कमलेश कुमारी को 4,543 और कांग्रेस की अंजू शर्मा को 2,516 वोट मिले। इस तरह विभा सिंह ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी पर 8 हजार से अधिक मतों की बड़ी बढ़त बनाकर जीत हासिल की। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल चुनावी जीत नहीं, बल्कि क्षेत्र में लंबे समय से कायम जनसंपर्क और जनता के भरोसे का परिणाम है।
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राजपरिवार का दबदबा बरकरार
विभा सिंह कुल्लू के प्रसिद्ध राजपरिवार की बहू हैं। उनके पति हितेश्वर सिंह भी स्थानीय राजनीति का जाना-पहचाना चेहरा हैं और दो बार जिला परिषद सदस्य रह चुके हैं। इससे पहले विभा सिंह स्वयं भी धाउगी जिला परिषद वार्ड से चुनाव जीत चुकी हैं। ऐसे में यह लगातार तीसरा अवसर है जब परिवार का कोई सदस्य जिला परिषद स्तर पर जनता का समर्थन हासिल करने में सफल रहा है।
निर्दलीय लड़ रहा परिवार
दिलचस्प बात यह है कि राजपरिवार का पारंपरिक जुड़ाव भाजपा से माना जाता रहा है। मगर पिछले कई चुनावों से परिवार के सदस्यों को पार्टी टिकट नहीं मिला। इसके बावजूद उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनावी मैदान में उतरकर अपनी लोकप्रियता साबित की है।
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2022 के बाद बदले स्मीकरण
कुल्लू राजपरिवार और भाजपा के रिश्तों में खटास की चर्चा 2022 विधानसभा चुनावों के दौरान सबसे अधिक हुई थी। उस समय हितेश्वर सिंह ने बंजार विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने का फैसला किया था। वहीं, उनके पिता एवं पूर्व सांसद महेश्वर सिंह को भाजपा ने कुल्लू विधानसभा सीट से उम्मीदवार घोषित किया था।
चुनाव से हटने का दबाव
बताया जाता है कि पार्टी नेतृत्व ने हितेश्वर सिंह को चुनाव मैदान से हटाने का दबाव बनाया था। मगर उन्होंने चुनाव लड़ने का निर्णय नहीं बदला। इसके बाद भाजपा ने महेश्वर सिंह का टिकट वापस लेकर दूसरे उम्मीदवार को मैदान में उतार दिया। उस घटनाक्रम ने प्रदेश की राजनीति में काफी सुर्खियां बटोरी थीं और तब से राजपरिवार स्वतंत्र राजनीतिक पहचान के साथ चुनाव लड़ता आ रहा है।
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जनता को दिया जीत का श्रेय
ज्येष्ठा वार्ड से विजयी होने के बाद विभा सिंह ने अपनी सफलता का श्रेय क्षेत्र की जनता को दिया। उन्होंने कहा कि यह जीत ग्रामीणों के विश्वास, सहयोग और वर्षों से बने रिश्तों का परिणाम है। लोगों ने एक बार फिर उन पर भरोसा जताया है, जिसके लिए वह क्षेत्र की जनता की आभारी हैं।
चुनाव जीतना बड़ी जिम्मेदारी
उन्होंने कहा कि चुनाव जीतना केवल सम्मान नहीं बल्कि बड़ी जिम्मेदारी भी है। आने वाले समय में क्षेत्र के विकास, सड़क, पेयजल, शिक्षा और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता के आधार पर उठाया जाएगा ताकि जनता की उम्मीदों पर खरा उतरा जा सके।
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बढ़ सकता है निर्दलीय प्रभाव
कुल्लू जिला परिषद में भले ही भाजपा सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी हो। मगर विभा सिंह की बड़ी जीत ने यह संकेत भी दिया है कि स्थानीय स्तर पर व्यक्तिगत छवि और जनसंपर्क आज भी राजनीतिक दलों से अधिक प्रभावी साबित हो सकते हैं। आने वाले समय में जिला परिषद के गठन और विभिन्न समितियों के गठन के दौरान निर्दलीय सदस्य की भूमिका भी अहम मानी जा रही है।
लगातार मिल रही सफलता
कुल्लू के राजनीतिक गलियारों में फिलहाल यही चर्चा है कि राजपरिवार का प्रभाव अभी भी कायम है। जनता का भरोसा उन्हें लगातार चुनावी सफलता दिला रहा है। विभा सिंह की रिकॉर्ड जीत ने इस धारणा को और मजबूत कर दिया है।
