#अपराध

June 3, 2026

हिमाचल पुलिस ने दबोचा 'टाइगर'- पाकिस्तान से 20 किलो चिट्टा लाने की फिराक में था सप्लायर

चिट्टा तस्करी के बड़े नेटवर्क का खुलासा

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शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में हाल ही में पकड़ी गई चिट्टा और आईस की खेप की जांच अब ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है- जिसने पुलिस अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है। शुरुआती तौर पर यह मामला स्थानीय स्तर पर नशा तस्करी का प्रतीत हो रहा था।

चिट्टा सप्लायर का पाकिस्तान कनेक्शन

अब जांच आगे बढ़ने के साथ पुलिस एक ऐसे कथित सप्लायर तक पहुंची है- जिसका नाम पहले भी बड़े मादक पदार्थ तस्करी मामलों में सामने आ चुका है। यही वजह है कि अब इस पूरे प्रकरण को एक संगठित और अंतरराज्यीय नेटवर्क से जोड़कर देखा जा रहा है।

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हिमाचल पुलिस ने 'टाइगर' को दबोचा

जिला शिमला पुलिस ने पंजाब के खरड़ क्षेत्र से 32 वर्षीय समर सिंह उर्फ टाइगर को गिरफ्तार किया है। पुलिस का दावा है कि शिमला में बरामद हुई हेरोइन और आईस की खेप इसी आरोपी के माध्यम से पहुंचाई गई थी। फिलहाल आरोपी पुलिस रिमांड पर है और उससे लगातार पूछताछ की जा रही है।

खुली तस्करी की परतें

पूरे मामले की शुरुआत 29 मई को हुई पुलिस कार्रवाई से हुई। ढली चौक के समीप स्थित एक मकान में पुलिस ने छापेमारी कर दो युवाओं को गिरफ्तार किया था। इनमें 19 वर्षीय युवती और 20 वर्षीय युवक शामिल थे। तलाशी के दौरान उनके कब्जे से लगभग 65 ग्राम हेरोइन (चिट्टा) और 20 ग्राम आईस (मेथामफेटामाइन) बरामद की गई थी।

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जांच में जुटी पुलिस टीम

बरामदगी के बाद पुलिस ने NDPS एक्ट के तहत मामला दर्ज कर दोनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया। इसके बाद शुरू हुई जांच में पुलिस ने मोबाइल डेटा, संपर्क सूत्रों, वित्तीय लेन-देन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया। इसी दौरान जांच टीम को पंजाब से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण सुराग मिले।

हुए कई बड़े खुलासे

पुलिस ने मामले की तह तक जाने के लिए बैकवर्ड लिंकेज यानी सप्लाई चेन की उल्टी दिशा में जांच शुरू की। पूछताछ और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर यह पता चला कि बरामद मादक पदार्थों की आपूर्ति पंजाब के खरड़ क्षेत्र से की गई थी।

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पंजाब से किया गिरफ्तार

इसके बाद शिमला पुलिस की विशेष टीम ने पंजाब में दबिश देकर समर सिंह उर्फ टाइगर को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार आरोपी के कब्जे से करीब 131 ग्राम हेरोइन, 27 ग्राम आईस और 60,400 रुपये नकद बरामद किए गए।

 

इस कार्रवाई के बाद पूरे मामले में कुल 196 ग्राम हेरोइन, 47 ग्राम आईस और 60,400 रुपये नकदी की बरामदगी हो चुकी है। पुलिस का मानना है कि यह केवल एक खेप नहीं, बल्कि बड़े नेटवर्क की गतिविधियों का हिस्सा हो सकती है।

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पुराने मामलों से खुली परतें

जांच के दौरान सामने आया कि समर सिंह का नाम पहले भी कई गंभीर मामलों में जुड़ चुका है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 2018 में राजस्थान के श्रीकरणपुर क्षेत्र में दर्ज एक मामले में उस पर पाकिस्तान सीमा से 20 किलोग्राम हेरोइन की खेप भारत में लाने की कथित कोशिश का आरोप लगा था।

 

इसके अलावा उसके खिलाफ विभिन्न राज्यों में NDPS एक्ट के तहत कई अन्य मामले भी दर्ज बताए जा रहे हैं। इनमें बड़ी मात्रा में हेरोइन और अफीम बरामदगी के मामले शामिल हैं।

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जेल के अंदर से लेन-देन

जांच एजेंसियों के रिकॉर्ड में उसका नाम जेल के भीतर से संचालित कथित ड्रग नेटवर्क से जुड़े वित्तीय लेन-देन में भी सामने आया था। फिरोजपुर और मोहाली में दर्ज मामलों में भी उसका नाम मादक पदार्थों और अन्य आपत्तिजनक सामान की बरामदगी से जोड़ा गया है। इन्हीं तथ्यों को देखते हुए शिमला पुलिस इस गिरफ्तारी को केवल एक सप्लायर की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि बड़े नेटवर्क तक पहुंचने की महत्वपूर्ण कड़ी मान रही है।

हिमाचल तक कैसे पहुंच रहा था नशा?

पुलिस अब यह जानने की कोशिश कर रही है कि हिमाचल प्रदेश में यह नेटवर्क कब से सक्रिय था और इसके तार किन-किन जिलों तक फैले हुए हैं। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि क्या राज्य में सक्रिय अन्य तस्करों के साथ भी आरोपी का संपर्क था।

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और हो सकती हैं गिरफ्तारियां

अधिकारियों का मानना है कि अगर पूछताछ में और महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आती हैं तो आने वाले दिनों में इस मामले में कई और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। साथ ही ड्रग सप्लाई के लिए इस्तेमाल किए जा रहे रास्तों और आर्थिक नेटवर्क की भी जांच की जा रही है।

नशा माफिया पर शिकंजा

SSP शिमला गौरव सिंह ने कहा कि पुलिस केवल नशे की खेप पकड़ने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि उसके स्रोत और पूरे नेटवर्क को खत्म करने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने बताया कि ढली मामले की जांच के दौरान बैकवर्ड लिंकेज पर फोकस करने से यह महत्वपूर्ण सफलता मिली है।

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43 आरोपियों को किया गिरफ्तार

उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 में इसी रणनीति के तहत अब तक 43 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस का उद्देश्य केवल छोटे स्तर के तस्करों को पकड़ना नहीं, बल्कि उन लोगों तक पहुंचना है जो पूरे नेटवर्क को संचालित करते हैं और विभिन्न राज्यों के बीच मादक पदार्थों की आपूर्ति सुनिश्चित करते हैं।

बढ़ती चुनौती, सख्त कार्रवाई की जरूरत

हिमाचल प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों के दौरान चिट्टा और अन्य सिंथेटिक ड्रग्स की तस्करी लगातार कानून-व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। युवाओं में नशे की बढ़ती लत को देखते हुए पुलिस और अन्य एजेंसियां लगातार अभियान चला रही हैं। फिलहाल शिमला पुलिस द्वारा पूरे मामले की जांच जारी है और पुलिस को उम्मीद है कि आरोपी से पूछताछ के दौरान नेटवर्क से जुड़े कई अन्य महत्वपूर्ण राज सामने आ सकते हैं।

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